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23:50 IST

जरांगे के उपोषण वापसी पर सवाल: 1400 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट, 6 करोड़ की सुपारी और ईडी जांच के आरोप

मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील के उपोषण वापस लेने के बाद उन पर और उनके आंदोलन पर गंभीर आरोप लगने लगे हैं, जिसमें कॉन्ट्रैक्टरों से जुड़े दावे और ईडी जांच का जिक्र शामिल है।

जरांगे के उपोषण वापसी पर सवाल: 1400 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट, 6 करोड़ की सुपारी और ईडी जांच के आरोप
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने अपना उपोषण वापस ले लिया है, और उसके बाद से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। बीड जिले के पाटोदा में जैसे ही उपोषण स्थगित होने का ऐलान हुआ, विरोधी दलों और जरांगे के कुछ पुराने साथियों की तरफ से आंदोलन को लेकर गंभीर आरोप सामने आने लगे। आंदोलन के पीछे की मंशा, पैसे का लेनदेन, कॉन्ट्रैक्टरों से लागेबांधे और राजनीतिक समझौते जैसे मुद्दों पर अभी जोरदार बहस चल रही है।

जरांगे के पुराने साथी अमोल खुणे ने दावा किया कि आंदोलन में बड़े पैमाने पर पैसे का लेनदेन हुआ है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि आंदोलन के लिए पैसा किसने दिया, कैसे लाया गया और कहां रखा गया, इसकी जांच होनी चाहिए। खुणे ने एक और चौंकाने वाला दावा किया कि शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट को बदनाम करने के लिए मनोज जरांगे ने विधायक अब्दुल सत्तार से 6 करोड़ रुपये की सुपारी ली थी। खुणे ने किसी मंत्री या विधायक का सीधा नाम लेने से परहेज किया, लेकिन कहा कि ईडी और बाकी जांच एजेंसियों की पड़ताल में यह सब हिसाब सामने आ जाएगा।

कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने भी इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी और सरकार व जरांगे के बीच समझौता होने का दावा किया। उनके मुताबिक जरांगे का आंदोलन स्थगित होना कोई पहली बार नहीं हुआ, सरकार हमेशा उनके सामने झुक जाती है। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों को खुलेआम गालियां देने के बावजूद सरकार उनकी सारी मांगें मान लेती है, ऐसा तंज उन्होंने कसा। वडेट्टीवार ने दावा किया कि जरांगे के करीबी लोगों के करीब 1400 करोड़ रुपये के काम सरकार ने रोक दिए थे, और यही काम रुकने की नाराजगी में जरांगे ने मुंबई की तरफ मोर्चा निकाला था, जिसके बाद समझौता कर उपोषण वापस लिया गया। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि हैदराबाद गजट के तहत प्रमाणपत्र देने और बाद में वैधता के लिए अलग कानून बनाने की मांग सही है या नहीं यह वक्त बताएगा, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में ओबीसी समाज को भारी नुकसान होगा।

मराठा आरक्षण के अध्ययनकर्ता अजय महाराज बारस्कर ने जरांगे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 20 दिन चला उपोषण एक नाटक था। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरवाली सराटी के सरपंच के बेटे और एक कॉन्ट्रैक्टर ने मिलकर मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के साथ सेटिंग की है। एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए बारस्कर ने सवाल किया कि जिस जगह जरांगे ने उपोषण छोड़ा वहां कॉन्ट्रैक्टर किशोर बलांडे क्या कर रहे थे। बारस्कर ने कहा कि बलांडे की कंपनी माणिक इन्फ्रा को पिछले कुछ सालों में 750 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट कैसे मिला, और आंदोलन में बीच-बचाव करने वालों की कंपनियों को ही कॉन्ट्रैक्ट क्यों मिलते हैं। उन्होंने सीधा सवाल उठाया कि क्या किशोर बलांडे को ईडी का नोटिस आया था और उस नोटिस को रोकने के लिए ही यह आंदोलन वापस लिया गया।

शिवसेना के सचिव डॉ. संजय लाखे पाटील ने भी कहा कि जरांगे के आंदोलन ने पूरी तरह राजनीतिक रूप ले लिया है। उन्होंने दावा किया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का निजी, राजनीतिक और सामाजिक चरित्रहनन करने की सुपारी जरांगे ने ली है। लाखे पाटील के मुताबिक जब जरांगे का बेटा मुंबई के लीलावती अस्पताल में इलाज करा रहा था, उसी दौरान शिंदे को बदनाम करने की साजिश रची गई थी। हैदराबाद गजटियर के हिसाब से वंशावली न मिलने की वजह से कुणबी प्रमाणपत्र देना संभव नहीं है, ऐसा भी उन्होंने कहा।

इन सभी आरोपों पर जरांगे के समर्थक और साथी गंगाधर काळकुटे ने पलटवार किया है। उन्होंने अमोल खुणे और अजय महाराज बारस्कर पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या ये दोनों ईडी के प्रवक्ता बन गए हैं। काळकुटे ने ऐलान किया कि वे खुद आने वाले बुधवार या गुरुवार को ईडी दफ्तर से संपर्क कर विधिवत समय मांगेंगे और कहेंगे कि उन्हें दफ्तर बुलाया जाए, पूछताछ की जाए या गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं निकली तो मुंबई से लौटते ही खुणे और बारस्कर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा, और झूठे आरोपों के सबूत देने या कोर्ट में लड़ाई के लिए तैयार रहने की चुनौती भी दी।

मनोज जरांगे पाटील के नेतृत्व में चल रहे मराठा आरक्षण आंदोलन ने पूरे महाराष्ट्र का ध्यान खींचा है। लेकिन जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ रहा है, इसमें आपसी मतभेद, पैसों के लेनदेन के आरोप, कॉन्ट्रैक्टरों के नाम और राजनीतिक समझौते के दावे सामने आ रहे हैं। एक तरफ अमोल खुणे, विजय वडेट्टीवार, अजय महाराज बारस्कर और संजय लाखे पाटील ने आंदोलन पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक साजिश के गंभीर आरोप लगाए हैं, तो दूसरी तरफ जरांगे समर्थकों ने ये सारे आरोप खारिज करते हुए कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। आने वाले दिनों में इन आरोपों की जांच होती है या यह राजनीतिक जुबानी जंग यूं ही चलती रहती है, यह देखना अहम होगा।

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