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03:48 IST

मुंबई पुलिस ने जरांगे पाटील को आजाद मैदान आंदोलन की इजाजत नहीं दी, जरांगे भड़के

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 19 सितंबर को आझाद मैदान पर आमरण उपोषण करने की परमिशन मनोज जरांगे पाटील को मुंबई पुलिस ने नहीं दी, इसके बाद जरांगे ने सरकार को चेतावनी दी है।

मुंबई पुलिस ने जरांगे पाटील को आजाद मैदान आंदोलन की इजाजत नहीं दी, जरांगे भड़के तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई में आंदोलन करने की तैयारी में लगे मनोज जरांगे पाटील को मुंबई पुलिस से बड़ा झटका लगा है। जरांगे ने 19 सितंबर को आझाद मैदान पर आमरण उपोषण करने के लिए पुलिस से परमिशन मांगी थी। आंदोलन के दौरान पुलिस की सारी शर्तें मानने का हमीपत्र भी उन्होंने दिया था।

लेकिन आझाद मैदान पुलिस ने पिछले साल के आंदोलन में कथित तौर पर नियम-शर्तों के उल्लंघन का हवाला देकर इस बार परमिशन देने से मना कर दिया। इससे अब जरांगे और प्रशासन के बीच फिर टकराव बढ़ने के आसार बन गए हैं।

पुलिस के इस फैसले के बाद मनोज जरांगे पाटील ने गुस्से में रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा, "हम संविधान के मुताबिक चलते हैं। कोर्ट की सीमा में रहकर आंदोलन करेंगे। सरकार के अड़ियल नियम हमें मंजूर नहीं हैं।" जरांगे ने सवाल उठाया कि पिछले साल भी गणेशोत्सव था, तब आंदोलन को परमिशन कैसे मिल गई थी। उन्होंने साफ किया कि इस बार भी कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का उनका इरादा है।

परमिशन नामंजूर होने पर जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि सरकार कानून को अपनी सुविधा के हिसाब से चला रही है। जरांगे ने यह भी दावा किया कि राज्य में अराजकता और जातीय तनाव फैलाने की कोशिश हो रही है।

आक्रामक अंदाज में जरांगे ने कहा, "मैं शरण नहीं जाऊंगा, आपके सामने घुटने नहीं टेकूंगा। डटकर खड़ा रहूंगा, मर जाऊंगा, लेकिन सरकार के आगे झुकूंगा नहीं।" उन्होंने बताया कि अगर सरकार ने आंदोलन रोकने की कोशिश की तो वे 15 तारीख को मुंबई की तरफ निकल पड़ेंगे। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी मांगों के लिए आगे की कानूनी लड़ाई उनके वकील लड़ेंगे।

परमिशन नामंजूर होने के बाद जरांगे ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने पानी, सलाइन और इलाज बंद करने की चेतावनी दी है। जरांगे ने बताया कि परमिशन नामंजूर होने के फैसले के खिलाफ आगे कानूनी रास्ता अपनाना है, पुलिस कमिश्नर के पास जाना है या कोई और ऑप्शन चुनना है, इसका फैसला उनके वकील करेंगे। अब 19 सितंबर के आंदोलन को लेकर जरांगे पाटील आगे क्या रुख अपनाते हैं, इस पर महाराष्ट्र की नजर टिकी हुई है।

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