मराठा आंदोलन: मुंबई कूच के दौरान मनोज जरांगे की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों ने भर्ती की सलाह दी
मराठा आरक्षण के लिए मुंबई की तरफ निकले मनोज जरांगे पाटील की सेहत लगातार भूख हड़ताल की वजह से बिगड़ गई है, वहीं आझाद मैदान में उपोषण की परमिशन को लेकर पुलिस और कोर्ट में भी हलचल तेज हो गई है।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई की तरफ कूच कर रहे मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन के सामने एक बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है। लगातार चल रही भूख हड़ताल की वजह से उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई है और अब तो उनसे जगह से हिलना भी मुश्किल हो गया है।
बुधवार सुबह 11 बजे उन्हें पाटोदा से आगे बढ़कर अगले पड़ाव श्रीगोंदा की तरफ रवाना होना था, लेकिन तबीयत ठीक न होने की वजह से वे पाटोदा में ही रुके रहे। इससे यह असमंजस बन गया है कि वे आज आगे का सफर शुरू करेंगे या बीड के पाटोदा में ही रुकेंगे।
बीड के जिला शल्य चिकित्सक डॉ. सतीश सोळंके और उनकी टीम ने पाटोदा जाकर जरांगे की मेडिकल जांच की। जांच में सामने आया कि उनके खून में शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर बहुत नीचे गिर गया है, और वे गंभीर डिहाइड्रेशन के करीब पहुंच गए हैं।
डॉक्टरों ने उन्हें सलाइन तो लगाई है, लेकिन उनका कहना है कि सिर्फ सलाइन के भरोसे मुंबई तक का सफर पूरा करना मुमकिन नहीं है और उन्हें तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती करने की जरूरत है। जरांगे की यूरिन रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का मेडिकल फैसला लिया जाएगा, लेकिन डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत इलाज नहीं हुआ तो तबीयत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
दूसरी तरफ, मुंबई पुलिस ने आझाद मैदान में मनोज जरांगे के उपोषण के लिए अब तक लगाई गई दोनों अर्जियां रिजेक्ट कर दी हैं, जिसके बाद जरांगे ने तीसरी बार अर्जी दी है। इसी बीच मुंबई पुलिस ने आझाद मैदान में आंदोलन करने वाले 50 मराठा आंदोलकों के मोबाइल नंबर, पर्सनल डिटेल्स और वे किन गाड़ियों से आएंगे, इसकी पूरी जानकारी मांगी है।
ये 50 आंदोलक कौन होंगे, इसका फैसला खुद मनोज जरांगे लेंगे और वह लिस्ट आझाद मैदान पुलिस स्टेशन को सौंपी जाएगी। यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस आंदोलन की परमिशन देगी या नहीं, इस पर सबकी नजर टिकी है।
आझाद मैदान में उपोषण की परमिशन लेने के लिए मनोज जरांगे की तरफ से मुंबई हाईकोर्ट में तुरंत सुनवाई के लिए याचिका डाले जाने की बात कही जा रही है, हालांकि अभी तक ऐसी कोई याचिका दाखिल नहीं हुई है।
इसी बीच मुंबई पुलिस के सीनियर अफसर हाईकोर्ट पहुंचे और उन्होंने प्रमुख सरकारी वकील शिशिर हिरे से मुलाकात की। मुंबई पुलिस ने जरांगे के आंदोलन को परमिशन क्यों नकारी और कोर्ट में इस आंदोलन को इजाजत क्यों नहीं दी जानी चाहिए, इसे लेकर पुलिस प्रशासन अपनी कानूनी दलील सरकारी वकीलों के सामने रख रहा है।
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