दिल्ली में प्रदूषण का असर मौसम बदलने के 51 घंटे बाद दिखता है, IITM पुणे के शोध में खुलासा
IITM पुणे के वैज्ञानिकों ने 2017 से 2025 तक के आंकड़ों का अध्ययन कर दिल्ली में मौसम और PM 2.5 प्रदूषण के बीच के संबंध को समझा है।
दिल्ली में हर साल फैलने वाला जानलेवा वायुप्रदूषण सिर्फ गाड़ियों के धुएं, फैक्ट्रियों से निकलने वाले उत्सर्जन या दूसरे मानवी कारणों की वजह से नहीं होता, बल्कि इसमें मौसम में होने वाले बदलावों का भी बड़ा हाथ है। यह बात एक नए शोध में सामने आई है। खास बात यह है कि तापमान या मौसम की स्थिति बदलने का असर प्रदूषण के स्तर पर तुरंत नहीं दिखता, बल्कि कुछ मौसमी कारकों का प्रभाव पूरे 51 घंटे की देरी से नजर आता है। पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के वैज्ञानिकों ने यह अहम निष्कर्ष निकाला है।
यह शोध 'एन्वायरनमेंटल साइंस: एटमॉस्फियर्स' नाम की पत्रिका में छपा है। IITM के मुख्य शोधकर्ता विवेक सिंह और उनके साथियों ने 2017 से 2025 के बीच दिल्ली के मौसम और PM 2.5 प्रदूषण का अध्ययन किया। इस दौरान तापमान, नमी, बारिश, हवा की रफ्तार, सौर विकिरण, सतह पर दबाव और वातावरण की निचली परत की ऊंचाई यानी बाउंड्री लेयर हाइट जैसे कारकों का PM 2.5 के स्तर से क्या संबंध है, इसकी जांच की गई।
शोध के मुताबिक तापमान में बदलाव का PM 2.5 पर असर दिखने में 51 घंटे तक की देरी हो सकती है। नमी और हवा की रफ्तार का असर भी कुछ घंटों बाद दिखता है। तापमान के लिए यह देरी तीन घंटे, नमी के लिए चार घंटे, बारिश के लिए पांच घंटे, जबकि हवा की रफ्तार के लिए करीब 11 घंटे की पाई गई।
वातावरण की निचली परत यानी बाउंड्री लेयर की ऊंचाई कम होने पर प्रदूषक कणों को ऊपर के वातावरण में फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। सर्दियों में यह ऊंचाई 500 मीटर से भी कम हो जाती है, जिससे प्रदूषक कण जमीन के करीब फंसे रह जाते हैं और PM 2.5 का स्तर तेजी से बढ़ता है। हवा कम चलने पर भी प्रदूषकों का जमाव बढ़ जाता है, जबकि तेज हवा प्रदूषकों को बिखेरने में मदद करती है।
दिल्ली में सुबह 6 से 9 बजे और रात 8 से 11 बजे के बीच प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा पाया गया। नवंबर से जनवरी के बीच PM 2.5 का स्तर अक्सर 200 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा रहा। अध्ययन की अवधि में यह अधिकतम 879.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंचा हुआ पाया गया। इसके उलट बारिश के मौसम में बारिश और हवा की वजह से यह स्तर 50 से भी कम हो जाता है।
2017 से 2025 के नौ साल में दिल्ली में PM 2.5 के औसत स्तर में धीरे-धीरे लेकिन लगातार कमी आई है। 2017 में यह औसत 127.7 था जो 2025 में घटकर 80 पर आ गया। मौसम और प्रदूषण के बीच का यह संबंध साफ होने से आने वाले समय में प्रदूषण का अनुमान लगाने और पहले से चेतावनी देने वाली प्रणाली को और सटीक बनाने में इस शोध से मदद मिल सकती है।