जरांगे के शब्दों पर मंत्री नाराज, कैबिनेट बैठक में फडणवीस के सामने रखी बात
मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर मनोज जरांगे पाटील की भाषा पर राज्य कैबिनेट में नाराजगी जताई गई, वहीं जरांगे मुंबई की ओर रवाना हो चुके हैं।
मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राज्य की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मनोज जरांगे पाटील मुंबई की तरफ निकल पड़े हैं, और ठीक इसी वक्त उनकी भाषा को लेकर आज हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में नाराजगी सामने आने की बात सूत्रों के हवाले से पता चल रही है।
बताया जा रहा है कि जरांगे जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं वह ठीक नहीं है, ऐसा कहते हुए कई मंत्रियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने कड़ी नाराजगी जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक, बैठक के बाद हुई चर्चा में मंत्रियों ने कहा कि राज्य सरकार मराठा समाज के लिए अहम फैसले ले रही है, ऐसे में आंदोलनकारियों का यह रवैया आपत्तिजनक है।
खास बात यह है कि कुछ मंत्रियों ने यह सवाल भी उठाया कि हिंदू त्योहार के दौरान ही मुंबई में आंदोलन क्यों किया जा रहा है।
इस बीच मनोज जरांगे अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं। उनके सफर का आज का पड़ाव बीड जिले के पाटोदा में होगा। जरांगे के स्वागत के लिए पाटोदा इलाके में जोरदार तैयारियां की गई हैं। मांजरसुंबा से पाटोदा तक के रास्ते पर 14 बड़े अन्नछत्र लगाए गए हैं, जबकि पाटोदा शहर में 11 अन्नछत्र बनाए गए हैं। इसके अलावा करीब 25 जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। जरांगे की सभा और उनके ठहरने की जगह पर आने वाले मराठा बंधुओं को दिक्कत न हो, इसके लिए स्वयंसेवक भी तैनात किए गए हैं।
एक तरफ जरांगे मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ मराठा समन्वयकों ने मुंबई के आजाद मैदान का दौरा किया। मुंबई पुलिस ने आंदोलन की इजाजत नहीं दी है, फिर भी तैयारियों के मद्देनजर यह दौरा किया गया। मराठा समन्वयक प्रशांत सावंत ने आजाद मैदान का निरीक्षण किया।
मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण आंदोलन के लिए 13 प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें शिंदे समिति की ओर से खोजे गए कुणबी दस्तावेजों के आधार पर सर्टिफिकेट बांटना, हैदराबाद गजट लागू करना, अलग-अलग गजेटियर के लिए जीआर, आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेना, मराठा-कुणबी के लिए अलग मंत्रालय, कुणबी सर्टिफिकेट और उसकी वैलिडिटी, ओबीसी को मिलने वाली सुविधाएं लागू करना, सारथी की योजनाएं, आंदोलन में जान गंवाने वाले मराठा बंधुओं के परिवारों की मदद, शिंदे समिति को दोबारा दस्तावेज खोजने के निर्देश, EWS/SEBC/ESBC में चुने गए लोगों को नियुक्ति, अण्णासाहेब पाटील महामंडल की ब्याज वापसी की रकम और सगेसोयरे अधिसूचना को तुरंत लागू करना शामिल है।
अब जरांगे के मुंबई पहुंचने के बाद सरकार उनके आंदोलन पर किस तरह जवाब देती है और आजाद मैदान पर आंदोलन की इजाजत मिलती है या नहीं, इस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं।
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