जरांगे के मुंबई आंदोलन पर वडेट्टीवार का हमला, ओबीसी और सूखे के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा
मुंबई में मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन की घोषणा होने के बाद कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य सरकार पर जोरदार निशाना साधा।
मनोज जरांगे पाटील ने मुंबई में आंदोलन करने का ऐलान किया है और वह भी उस वक्त जब शहर में गणेशोत्सव की भीड़ चरम पर होगी। इस वजह से मुंबई की कानून व्यवस्था को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता और विधायक विजय वडेट्टीवार ने नागपुर में मीडिया से बात करते हुए राज्य सरकार पर जबरदस्त हमला बोला।
वडेट्टीवार ने कहा कि गणेशोत्सव के चलते मुंबई में भीड़ तो होनी ही है, असली सवाल यह है कि सरकार इस आंदोलन को कैसे संभालती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ओबीसी बनाम हिंदू ऐसा विवाद खड़ा कर रही है और यह पूरा मामला ओबीसी समाज पर आया संकट है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार के मंत्री जरांगे पाटील के सामने इतनी गर्दन झुकाकर जाते हैं कि पालतू जानवर भी शरमा जाए, ऐसी तीखी टिप्पणी उन्होंने की। इतना झुकने पर मंत्रियों की गर्दन दुखती क्यों नहीं, यह सवाल भी उन्होंने उठाया। सरकार बार बार झुकती है, इसी वजह से जरांगे पाटील को खुद के बादशाह होने का भ्रम हुआ है, ऐसा वडेट्टीवार ने कहा। ट्विटर पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन के आगे बार बार यह सरकार गर्दन झुकाती आई है। इसी वजह से जरांगे पाटील खुद को बादशाह समझने लगे हैं। अब फिर वे मुंबई में आंदोलन करने वाले हैं। हम उसमें नहीं पड़ेंगे, महायुती सरकार कानून और व्यवस्था देख लेगी।" आगे क्या करना है यह सरकार और जरांगे का आपसी मामला है, वे खुद निपट लेंगे, ऐसा भी उन्होंने कहा।
ओबीसी के मुद्दे पर वडेट्टीवार और आक्रामक दिखे। उनके मुताबिक नौकरियों में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था से अस्सी प्रतिशत लोगों को महज पंद्रह प्रतिशत जगहें मिल पा रही हैं। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को लेकर उन्होंने दावा किया कि कुछ जिलों में करीब नब्बे प्रतिशत सीटें फर्जी ओबीसी सर्टिफिकेट के सहारे चुनाव जीतने वालों के हाथ चली गई हैं, पहले जिला परिषद चुनावों में भी यही हुआ था। स्थापित और ताकतवर लोग ही जगह घेर लेते हैं और असली ओबीसी उम्मीदवार को मौका ही नहीं मिलता, यह पूरा खेल बनावटी है, ऐसा आरोप उन्होंने लगाया। सरकार सचमुच ओबीसी का भला करना चाहती है या नहीं, यह सवाल भी उन्होंने खड़ा किया।
वडेट्टीवार ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार में सचमुच दम है तो जरांगे का आंदोलन रोककर दिखाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के अपने लोग ओबीसी नेताओं के लिए घटिया और नीचे दर्जे की भाषा इस्तेमाल करते हैं, फिर भी सरकार में कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है। आंदोलन करने पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं, लेकिन सरकार पूंछ दबाकर बैठी है, ऐसा तंज उन्होंने कसा। वरना फिर मंत्रियों को भेजकर आंदोलनकारियों के पैर दबवाए जाएं, जरांगे पाटील के पैरों की मालिश करवा दी जाए ताकि वे मान जाएं, ऐसा व्यंग्य भी उन्होंने किया। जो हो रहा है उसे पूरा महाराष्ट्र देख रहा है, यह उन्होंने दोहराया।
इसी बातचीत में वडेट्टीवार ने राज्य में बने सूखे जैसे हालात पर भी सरकार को घेरा। उनके मुताबिक राज्य पर इतना बड़ा संकट पहले कभी नहीं आया, कई बांधों में पानी लगभग खत्म हो चुका है और आने वाले दिनों में पीने के पानी की दिक्कत भी खड़ी हो सकती है। इस बारे में राज्यपाल को पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करे, असरदार आपातकालीन योजना बनाए, फसल बीमे की भरपाई की प्रक्रिया आसान और तेज करे, खरीफ का कर्ज माफ करे, ब्याज में छूट दे, मौसम पर आधारित कार्ययोजना बनाए और पशुधन तथा चारे की अलग से व्यवस्था करे। सरकार गंभीरता नहीं दिखाएगी तो किसान टिक नहीं पाएगा, ऐसी चेतावनी उन्होंने दी और गणपति बप्पा से किसानों को इस संकट से उबारने की प्रार्थना भी की।
केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से कोई उम्मीद नहीं बची, उद्योगपतियों के नखरे पूरे किए जा रहे हैं, यह सोच ही गलत है, ऐसा वडेट्टीवार ने कहा। सत्ताधारी पार्टी के एक मंत्री ने सामान सिर्फ हिंदुओं से ही खरीदने की बात कही थी, इसका हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मंत्रियों को हनुमान चालीसा तो याद है, पर संविधान की बात करने की भी उनमें लियाकत नहीं है।
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