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22:53 IST

ब्रम्हपुरी: ठाणेदार ने बस चालक को डंडे से पीटा, कोर्ट ने FIR के दिए आदेश

ब्रम्हपुरी के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक सुधाकर अंभोरे पर बस चालक की पिटाई का आरोप, कोर्ट ने मामला दर्ज करने का आदेश दिया

ब्रम्हपुरी: ठाणेदार ने बस चालक को डंडे से पीटा, कोर्ट ने FIR के दिए आदेश
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

ब्रम्हपुरी के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक सुधाकर अंभोरे की दादागिरी अब उन्हीं पर उलटी पड़ गई है। प्रथम श्रेणी न्यायदंडाधिकारी कोर्ट ने माजी ठाणेदार अंभोरे के खिलाफ FIR दर्ज करके उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया है, जिससे पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित बस चालक को आखिरकार इंसाफ की उम्मीद दिखने लगी है।

यह घटना 26 नवंबर 2023 की है। नागपुर के ट्रैवल्स ड्राइवर मोहन शालीकराम अडिवकर हमेशा की तरह पैसेंजर लेकर गडचिरोली से नागपुर की तरफ जा रहे थे। दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब ब्रम्हपुरी रेलवे फाटक बंद होने की वजह से गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई थी। फाटक खुलते ही गाड़ियां धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं, तभी एक आसमानी रंग की इनोवा कार (MH-29-AR-8855) रॉंग साइड से तेजी से आई। उस कार से सादे कपड़ों में उतरे एक शख्स ने ड्राइवर मोहन अडिवकर को गाली-गलौज करते हुए गाड़ी रोकने को कहा। भारी ट्रैफिक होने की वजह से अडिवकर ने सिर्फ इतना कहा, "मैं क्यों रुकूं?" इस बात पर वह शख्स गुस्से में निकल गया।

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। बस जब आगे क्रिस्तानंद हॉस्पिटल चौक पर पहुंची, तो वही शख्स वहां पहले से खड़ा मिला। ड्राइवर मोहन जैसे ही बस से नीचे उतरे, उस शख्स ने सीधे उन पर हमला बोल दिया और लाथ-घूंसों से मारपीट शुरू कर दी। इतने से भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ, तो उसने वहां तैनात ट्रैफिक पुलिस फिरोज पठान की लाठी हाथ में लेकर मोहन के पैरों और सिर पर लगातार वार किए। मारपीट इतनी बुरी थी कि मोहन के सिर से खून बहने लगा। बाद में पता चला कि मारने वाला शख्स कोई और नहीं, बल्कि ब्रम्हपुरी के ठाणेदार सुधाकर अंभोरे ही थे। सिर में गंभीर चोट लगने से दर्द से कराह रहे मोहन नजदीकी हॉस्पिटल जाने की गुजारिश कर रहे थे, लेकिन ठाणेदार अंभोरे ने पैसेंजरों को बस से उतार दिया और खून से लथपथ मोहन को खुद बस चलाकर पुलिस स्टेशन लाने पर मजबूर किया।

पुलिस स्टेशन लाने के बाद ड्राइवर मोहन शालीकराम अडिवकर की शराब पीने के शक में ली गई 'ब्रेथ टेस्ट' निगेटिव आई। इसके अलावा मोहन के मोबाइल में मौजूद घटना की रेकॉर्डिंग और फोटो एक ट्रैफिक पुलिस वाले ने जबरन लॉक नंबर लेकर डिलीट कर दिए। इलाज के लिए प्राइवेट सेंटर ले जाने पर सिटी स्कैन के 2500 रुपये भी ड्राइवर को ही देने पड़े।

रात को यह सब होने के बाद डरे हुए मोहन अडिवकर शिकायत देने ब्रम्हपुरी पुलिस स्टेशन गए। लेकिन वहां ड्यूटी पर मौजूद पुलिस उपनिरीक्षक संघमित्रा बांबोळे और प्रशांत खोब्रागडे ने अपने सीनियर ठाणेदार अंभोरे का बचाव करते हुए लिखित शिकायत लेने से साफ इनकार कर दिया। आखिरकार ड्राइवर ने उपविभागीय पुलिस अधिकारी के साथ-साथ माजी मंत्री विजय वडेट्टीवार और माजी मंत्री सुधीर मुनगंटीवार के पास भी फरियाद की। इस पूरे मामले में एक चौंकाने वाली बात भी सामने आई है। घटना वाले दिन ठाणेदार अंभोरे जिस इनोवा कार से ड्राइवर का पीछा करते आए थे, वह कार वणी (जिला यवतमाळ) के एक जाने-माने वरली-मटका किंग की बताई जा रही है, ऐसी चर्चा इलाके में गरम है। सवाल उठ रहा है कि कानून के रखवाले ही जब मटका किंग की गाड़ी में घूम रहे हों, तो इसके पीछे क्या साठगांठ है।

पुलिस प्रशासन ने अपने ही अफसर को बचाने की कोशिश की, इसके बाद पीड़ित ड्राइवर ने वकील के जरिए कोर्ट का रुख किया। प्रथम श्रेणी न्यायदंडाधिकारी ब्रम्हपुरी ने इस अर्जी को गंभीरता से लेते हुए फौजदारी अर्ज क्रमांक 28/2024 के तहत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने फौजदारी प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 156(3) के तहत तत्कालीन ठाणेदार सुधाकर अंभोरे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 324, 341, 504 और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 145(2) के अंतर्गत मामला दर्ज करके गहराई से जांच करने का स्पष्ट आदेश दिया है।

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