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17:26 IST

बॉयलर अग्निप्रदीपन में जाचक बोले, जरूरत पड़ी तो खुद को बेच दूंगा, छत्रपती कारखाना बंद नहीं होने दूंगा

भवानीनगर के श्री छत्रपती सहकारी साखर कारखाने में बॉयलर अग्निप्रदीपन समारोह में अध्यक्ष पृथ्वीराज जाचक ने कारखाने को बचाने की कसम खाई।

बॉयलर अग्निप्रदीपन में जाचक बोले, जरूरत पड़ी तो खुद को बेच दूंगा, छत्रपती कारखाना बंद नहीं होने दूंगा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पुणे जिले के भवानीनगर स्थित श्री छत्रपती सहकारी साखर कारखाने में बॉयलर अग्निप्रदीपन का कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर कारखाने के अध्यक्ष पृथ्वीराज जाचक ने साफ कहा कि पैसों की कमी की वजह से छत्रपती कारखाना कभी बंद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वक्त आने पर वे खुद को बेच देंगे, मगर छत्रपती को बंद नहीं पड़ने देंगे।

जाचक ने बताया कि पिछले साल का पेराई सीजन दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजितदादा और कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे के सहयोग से ही पूरा हो सका था। उनका कहना था कि फिलहाल कारखाना मुश्किल दौर से गुजर रहा है, लेकिन सबके साथ मिलकर इसे इस स्थिति से बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने सभासदों से अपील की कि गन्ने के दाम के मामले में छत्रपती दूसरे कारखानों से पीछे नहीं रहेगा, इसके लिए सभासद सहयोग करें।

यूनिट नंबर एक का बॉयलर अग्निप्रदीपन समारोह कारखाने के डायरेक्टर नीलेश टिळेकर और उनकी पत्नी रश्मी टिळेकर के हाथों संपन्न हुआ, जबकि यूनिट नंबर दो का समारोह डायरेक्टर संतोष मासाळ और उनकी पत्नी वैशाली मासाळ के हाथों हुआ। इस मौके पर कारखाने के उपाध्यक्ष शिवाजीराव निंबाळकर समेत मौजूदा और पूर्व डायरेक्टर व पदाधिकारी मौजूद थे।

जाचक ने आगे कहा कि पुणे जिले में इस साल का पहला बॉयलर अग्निप्रदीपन समारोह छत्रपती कारखाने का हो रहा है, जिसकी उन्हें खुशी है। उन्होंने बताया कि गन्ना तुड़ाई का एडवांस देने वाला छत्रपती जिले का पहला कारखाना है। इस सीजन में साढ़े बारह लाख टन गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना था कि लगातार आठ साल बारह लाख टन से ज्यादा पेराई होने के बाद कारखाना पूरी तरह मुश्किलों से बाहर आ जाएगा। इस साल के गन्ना सीजन के लिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे, सांसद पार्थ पवार के साथ साथ मुख्यमंत्री और सहकार मंत्री ने भी सहयोग किया है।

जाचक ने बताया कि छत्रपती का सीजन एक अक्टूबर से शुरू होगा और कारखाने की सारी व्यवस्था तैयार है। उन्होंने कहा कि पिछले दस साल में प्रति टन पांच सौ रुपये कम दर मिलने का हिसाब लगाया जाए तो साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। उनका कहना था कि मुश्किल में फंसे छत्रपती को बाहर निकालने की जिम्मेदारी सबकी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे पिछले कई सालों से सह विद्युत निर्माण प्रोजेक्ट का विरोध करते आए हैं, क्योंकि यह प्रोजेक्ट साखर कारखाने के लिए फायदेमंद नहीं है। जिन कारखानों ने यह प्रोजेक्ट लगाया, वे घाटे में चले गए, और गुजरात में एक भी कारखाना सह विद्युत निर्माण प्रोजेक्ट नहीं लगाता।

उन्होंने कहा कि फिलहाल साखर के दाम बढ़ रहे हैं और इस सीजन में भी साखर का दाम पचास रुपये किलो के अंदर नहीं आएगा। छत्रपती को फंड दिलाने के लिए अधिकारियों के मुंबई दिल्ली के चक्कर लगातार चल रहे हैं। जाचक ने कहा कि फिलहाल मुश्किलें हैं, मगर पैसों की कमी से छत्रपती बंद नहीं रहेगा, वक्त आने पर पृथ्वीराज जाचक खुद को बेच देगा, मगर अब छत्रपती को बंद नहीं पड़ने देंगे। गन्ने के दाम के मामले में भी छत्रपती पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने सभासदों से अपील की कि वे अपना गन्ना छत्रपती को ही पेराई के लिए दें।

इस मौके पर कारखाने के डायरेक्टर रामचंद्र निंबाळकर के साथ जयराम रायते, एडवोकेट संभाजीराव काटे, बाळासाहेब शिंदे, शंकरराव रुपनवर वगैरह ने अपने भाषण में अलग अलग सुझाव रखे। कार्यक्रम की शुरुआत में इस गन्ना सीजन का जायजा कार्यकारी डायरेक्टर अशोक जाधव ने लिया। सूत्रसंचालन कामगार नेता युवराज रणवरे ने किया और आभार डायरेक्टर तानाजी शिंदे ने माना। इस मौके पर डायरेक्टर अशोक पाटील, कैलास गावडे, सतीश देवकाते, एडवोकेट शरद जामदार, पृथ्वीराज घोलप, कार्यकारी डायरेक्टर अशोक जाधव, जनरल मैनेजर हनुमंत करवर समेत अन्य मान्यवर और सभासद मौजूद थे।

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