जरांगे का उपोषण टला, ओबीसी कोटे पर कोई असर नहीं - विधायक परिणय फुके
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का बीस दिन से चल रहा उपोषण रुका, सरकार को तीन महीने की मोहलत मिली।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील पिछले बीस दिनों से उपोषण पर बैठे थे, जिसे अब उन्होंने फिलहाल रोक दिया है। सरकार को इस मामले में अगले तीन महीने की मोहलत दी गई है। मुंबई की तरफ जो आंदोलन कूच होने वाला था, वह भी फिलहाल टल गया है। सरकार की तरफ से भेजे गए शिष्टमंडल के साथ हुई बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के ओबीसी नेता और विधायक डॉ. परिणय फुके ने अपनी प्रतिक्रिया में साफ कहा कि ओबीसी आरक्षण को कहीं भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
विधायक डॉ. फुके ने कहा, "सबसे पहले तो मैं मनोज जरांगे पाटील का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने अपना आंदोलन रोकने का फैसला लिया। गणेशोत्सव के दौरान अगर बड़ी तादाद में आंदोलनकारी मुंबई पहुंच जाते, तो मुंबई के आम लोगों, गणेश मंडलों और प्रशासन के सामने भारी दिक्कत खड़ी हो सकती थी। इसलिए यह फैसला स्वागत करने लायक है।"
उन्होंने आगे कहा, "ओबीसी आरक्षण के मामले में कोई नुकसान नहीं हुआ है। मराठा समाज को ओबीसी आरक्षण में से हिस्सा देने का कोई फैसला नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ओबीसी समाज के अलग-अलग संगठनों के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह वादा किया था कि किसी भी हालत में ओबीसी आरक्षण को धक्का नहीं लगने देंगे। उन्होंने वह वादा निभाया है।"
मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी बताया है कि जरांगे की तेरह मांगों में से बारह मांगें मान ली गई हैं, जबकि एक मांग के आगे कानूनी अड़चन है।
विधायक डॉ. फुके ने आगे कहा, "सरकार ने ओबीसी समाज के आरक्षण के हक को बिना कोई धक्का पहुंचाए मराठा समाज की मांगों पर रास्ता निकालने की कोशिश की है। इसलिए ओबीसी समाज की तरफ से मैं दिल से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का शुक्रिया अदा करता हूं।"
मराठा समाज की मांगों को लेकर उन्होंने कहा कि तेरह में से बारह मांगें मान लिया जाना बड़ी बात है। पढ़ाई, नौकरी, ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप और अलग-अलग आर्थिक योजनाओं के जरिए मराठा समाज के छात्रों और युवाओं को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने फैसले लिए हैं। इससे साफ है कि सरकार मराठा समाज को भी न्याय देने के इरादे पर कायम है।
डॉ. फुके ने यह भी साफ किया, "मराठा समाज को न्याय देते वक्त ओबीसी समाज के आरक्षण को धक्का न लगे, यह रुख बनाए रखना जरूरी है। दोनों समाजों के बीच टकराव पैदा किए बिना, कानूनी दायरे में रहकर और बातचीत के जरिए ही रास्ता निकालना सही तरीका है।"
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