पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में मस्जिद के पास विस्फोटकों से भरी गाड़ी टकराई, 16 की मौत
कोहाट पुलिस लाइंस के पास मस्जिद में नमाज के दौरान बड़ा धमाका, 30 से ज्यादा जख्मी
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में शुक्रवार को नमाज के वक्त एक मस्जिद में जबरदस्त बम धमाका हुआ है। यह मस्जिद कोहाट पुलिस लाइंस के पास है। धमाके में 16 लोगों की मौत हो गई और 30 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं। मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मस्जिद में हुए इस धमाके के वीडियो टीवी और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में लोग मलबे के नीचे दबे नजर आ रहे हैं, जबकि आसपास के लोग उन्हें बचाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। प्रशासन ने भी मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जुल्फिकार हमीद ने जो शुरुआती बयान जारी किया है, उसके मुताबिक यह धमाका कोहाट पुलिस लाइंस के पास वाली मस्जिद में हुआ। शुरुआती रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को इमारत के अंदर घुसा दिया गया था। इसके अलावा स्पेशल ब्रांच की बिल्डिंग के पास एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया, और फितना अल-ख्वारिज के आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ भी जारी है।
स्थानीय न्यूज चैनल के मुताबिक जिला मुख्यालय अस्पताल के एमएस ताहिर अली शाह ने बताया कि धमाके के बाद 50 से ज्यादा जख्मी लोगों को 15 शवों के साथ अस्पताल लाया गया। जख्मी होने वालों में ज्यादातर लोग वही थे जो उस वक्त नमाज पढ़ रहे थे। धमाके की वजह से मस्जिद के बाहर एक बड़ा गड्ढा भी बन गया है।
रेस्क्यू 1122 खैबर पख्तूनख्वा के प्रवक्ता बिलाल अहमद फैजी ने बताया कि खबर मिलते ही रेस्क्यू टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं और उन्होंने राहत-बचाव का काम शुरू कर दिया। उन्होंने आगे बताया कि कई लोग जख्मी हुए हैं जिन्हें प्राथमिक इलाज के लिए पास के अस्पताल भेजा जा रहा है। रेस्क्यू टीमें अभी भी मौके पर मौजूद हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
इससे पहले इसी साल फरवरी में इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में भी बड़ा धमाका हुआ था। वहां एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया था। उस धमाके में 70 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और 250 लोग जख्मी हुए थे। यह धमाका इस्लामाबाद के तरलाई इलाके की खदीजतुल कुबरा मस्जिद-कम-इमामबाड़े में हुआ था।
पुलिस और चश्मदीदों के मुताबिक आत्मघाती हमलावर को इमामबाड़े के गेट पर रोका गया था, लेकिन उसने खुद को वहीं उड़ा लिया। इससे पहले अगस्त महीने में इस्लामाबाद की ही एक मस्जिद में लश्कर-ए-तोयबा का एक सीनियर कार्यकर्ता शक की परिस्थितियों में मारा गया था। वह वहां नमाज पढ़ने आया था।