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18:42 IST

येमेन संघर्ष: दो हफ्तों में 1.12 लाख लोग बेघर, हजारों ने जिबूती में ली शरण

येमेन की पश्चिमी तटरेखा पर हिंसा बढ़ने से लाखों लोग विस्थापित हुए, हजारों समुद्री रास्ते से जिबूती पहुंचे।

येमेन संघर्ष: दो हफ्तों में 1.12 लाख लोग बेघर, हजारों ने जिबूती में ली शरण
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

येमेन में जारी संघर्ष एक बार फिर बड़े मानवीय संकट की शक्ल ले चुका है। पश्चिमी तटरेखा पर पिछले कुछ समय से हिंसा तेज हुई है, जिसकी वजह से बीते दो हफ्तों में कम से कम 1 लाख 12 हजार लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र की स्थलांतर से जुड़ी संस्था के मुताबिक, संघर्ष की वजह से हजारों नागरिकों ने देश छोड़ने का रास्ता चुना है। इनमें से करीब 3 हजार लोग समुद्री रास्ते से जिबूती पहुंच चुके हैं। इससे साफ है कि येमेन के हालात दिन-ब-दिन और गंभीर होते जा रहे हैं।

पश्चिमी तट के इलाकों में संघर्ष तेज होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हुआ। कई परिवारों को अचानक अपने घर, खेती और रोजगार छोड़कर सुरक्षित इलाकों में शरण लेनी पड़ी। कुछ जगहों पर विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाए गए हैं, लेकिन बढ़ती संख्या की वजह से रहने की जगह, खाने-पीने के पानी और मेडिकल सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ गया है।

येमेन से कई लोगों ने समुद्री रास्ता पकड़कर जिबूती की तरफ भागने की कोशिश की है। बताया जा रहा है कि कुछ ही दिनों में करीब 3 हजार लोग जिबूती पहुंच चुके हैं। बहुत सारे लोग जरूरत से ज्यादा भरी हुई नावों में बेहद मुश्किल हालात में सफर कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं ने यह भी बताया है कि इन लोगों के पास खाने और पानी की भी पूरी व्यवस्था नहीं है। आगे के हालात को देखते हुए जिबूती सरकार ने करीब 10 हजार तक शरणार्थियों के आने की तैयारी शुरू कर दी है।

येमेन के इस संघर्ष का असर सिर्फ विस्थापन तक सीमित नहीं रहा है। लंबे समय से चल रही इस लड़ाई की वजह से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं पहले से ही भारी दबाव में हैं। अब इस नए विस्थापन ने राहत कार्य में जुटी टीमों के सामने और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

जिबूती में बड़ी तादाद में शरणार्थी पहुंचने से वहां की स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। येमेन के संघर्ष से पैदा हुआ यह नया विस्थापन संकट आगे और गंभीर हो सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत भी बढ़ गई है।

ताजा जानकारी के मुताबिक करीब 3,000 लोग जिबूती पहुंच चुके हैं, और जिबूती 10,000 तक शरणार्थियों के संभावित आगमन के लिए तैयारी कर रहा है।

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