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19:16 IST

उदय नगर चौक चाकूबाजी: 7 साल बाद कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद, छह बरी

जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने जितेंद्र बडे हत्याकांड में प्रसाद रोकड़े को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि सबूतों की कमी में छह अन्य आरोपी बरी हो गए।

उदय नगर चौक चाकूबाजी: 7 साल बाद कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद, छह बरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर के उदय नगर चौक में 2019 में हुई जितेंद्र वासुदेव बडे की हत्या के मामले में जिला न्यायालय ने करीब सात साल बाद अपना फैसला सुना दिया। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी प्रसाद दशरथ रोकड़े (29) को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है, और अगर वह यह रकम नहीं भरता तो उसे अतिरिक्त तीन महीने की सश्रम कैद काटनी होगी।

इस मामले में जिन छह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था, उन्हें अदालत ने बरी कर दिया क्योंकि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोप पर्याप्त सबूतों के साथ साबित नहीं कर पाया। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.एच. ग्वालानी ने बुधवार को यह फैसला सुनाया।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक पूरा वाकया 28 अक्टूबर 2019 की रात करीब 12.10 बजे उदय नगर चौक स्थित रिंग रोड पर हुआ था। उस वक्त रितीक धनराज डेंगे, अभिजीत खरात और जितेंद्र वासुदेव बडे आपस में बातचीत कर रहे थे, जबकि थोड़ी दूरी पर प्रसाद रोकड़े अपने साथियों के साथ खड़ा था। तभी वहां से पुलिस की गश्ती गाड़ी गुजरी। गाड़ी देखते ही प्रसाद रोकड़े और उसके साथी वहां से भागने लगे। आरोप है कि उन्हें भागता देख जितेंद्र बडे ने कथित तौर पर ताना मार दिया, जिसके बाद दोनों गुटों में बहस शुरू हुई और देखते ही देखते बात मारपीट तक जा पहुंची।

अभियोजन के अनुसार, इस झगड़े के दौरान प्रसाद रोकड़े के साथ मौजूद अनिमेष कविंद्र तागड़े (19), रोहन संदीप राऊत (23), सुमित गजानन दहाने (21), अभिषेक सुरेश डोईफोडे (20), अर्चित नरेश भावे (23) और दीपक दिलीप चौधरी (21) ने शिकायतकर्ता और उसके साथियों को पीटा। इसी बीच प्रसाद रोकड़े ने कथित तौर पर जितेंद्र बडे पर चाकू से वार कर दिया। चाकू के इस हमले में जितेंद्र के बाएं हाथ और सीने पर गंभीर चोटें आईं, और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था।

वारदात के बाद रितीक धनराज डेंगे की शिकायत पर हुडकेश्वर पुलिस थाने में सातों आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया था। जांच उस समय की महिला पुलिस निरीक्षक शुभांगी देशमुख ने की, जिन्होंने सबूतों, गवाहों के बयान और अन्य कानूनी पहलुओं के आधार पर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने गवाह और साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर कोर्ट ने प्रसाद रोकड़े को जितेंद्र बडे की हत्या का दोषी माना और उसे उम्रकैद सुना दी। वहीं बाकी छह आरोपियों के खिलाफ आरोप पर्याप्त रूप से साबित न हो पाने के चलते अनिमेष तागड़े, रोहन राऊत, सुमित दहाने, अभिषेक डोईफोडे, अर्चित भावे और दीपक चौधरी को बरी कर दिया गया।

देर रात हुई इस चाकूबाजी ने उस वक्त पुलिस के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी, क्योंकि मामूली बहस के बाद हुए हमले में एक युवक की जान चली गई थी। करीब सात साल तक चली इस न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब कोर्ट ने मुख्य आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद दी है, जबकि बाकी छह को संदेह का फायदा देकर बरी किया गया है। मामले में राज्य सरकार की तरफ से एडवोकेट कल्पना पांडे ने पैरवी की, जबकि आरोपियों की ओर से एडवोकेट रमेश रावलानी और एडवोकेट जलतारे ने पक्ष रखा।

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