'साहब' की ब्लैकमेलिंग से त्रस्त है कई थानेदार
'निजामी फरमान' देकर बना रहे दबाव, दर्ज नहीं हो रहे धोखाधड़ी के मामले, चक्कर काट रहे पीड़ित नागरिक
नागपुर.
शहर पुलिस के कई थानेदार और दूसरे अधिकारी अपने 'साहब' की ब्लैकमेलिंग से त्रस्त हो गए है. यह साहब पुलिस आयुक्त विश्वास नागरे पाटिल की सख्त पॉलिसी को भी ठेंगा दिखाकर रोज नया फरमान जारी करके थानेदार और दूसरे अधिकारियों को हलाकान करने में लगे है. इनके ताजा फरमान का सवार्धिक खामियाजा धोखाधड़ी के पीड़ित नागरिक भुगत रहे है. उनके थाने के लगातार चक्कर काटने के बाद भी मामले दर्ज नहीं हो रहे है.
शहर में धोखाधड़ी की घटनाएं काफी बढ़ रही है. हर थाने में रोज पांच से छह धोखाधड़ी की शिकायत आती है. कई शिकायतों को पुलिस स्टेशन के स्तर पर ही निपटा दिया जाता है. उन्हें दिवानी प्रकरण बताकर शिकायतकर्ता को अदालत जाने की सलाह दी जाती है. जो शिकायतें गंभीर स्वरूप की होती है अथवा पीड़ित पुलिस पर दबाव बनाकर रखता है उनमें मामला दर्ज किया जाता है. धोखाधड़ी के प्रकरण की पुलिस स्टेशन स्तर पर जांच की जाती है. इसके बाद संबंधित डीसीपी के पास मंजुरी के लिए भेजा जाता है. डीसीपी की मंजुरी के बाद धोखाधड़ी का मामला दर्ज होता है. राज्य के सभी पुलिस आयुक्तालय में इस प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है. लेकिन, साहब ने हाल में थानेदारों को डीसीपी से अनुमति लेने के बाद उनके पास 'हाजिरी' लगाने का फरमान जारी किया है. साहब के फरमान जारी करने के 'टारगेट' से अधिकांश थानेदार परिचित थे. नियम और प्रक्रिया से वाकिफ थानेदारों ने कोई प्रतिसाद नहीं दिया. इससे साहब हत्थे से उखड़ गए. वह थानेदारों पर अलग-अलग तरीके से भड़ास निकालने लगे. थानेदारों को उनका सर्विस रिकार्ड खराब करने की धमकी देने लगे. साहब से पंगा लेना उचित नहीं होने से अधिकांश थानेदार शांत हो गए जबकि कुछ ने अधिकारियों को आपबिती बताई.
साहब के अड़ियल रवैये से थानेदार ही नहीं उनके वरिष्ठ भी त्रस्त है. यह देखकर कई थानेदारों ने 'डिमांड' पूरी करने में ही भलाई समझी. जो इससे बच रहे है उन्हें मुसीबत गले पढ़ने की चिंता सता रही है. साहब के इस 'निजामी फरमान' का सवार्धिक खामियाजा धोखाधड़ी के पीड़ितों को रहा है. वह वक्त पर मामले दर्ज कराने के लिए थानेदार और दूसरे अधिकारियों के चक्कर काट रहे है. वहां से पीड़ितों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है. उत्तर नागपुर में तो थानेदार के संतोषजनक जवाब नहीं देने पर उसके बड़े अधिकारी के पास पहुंचे पीड़ित को मदद की बजाय दुत्कार का सामना करना पड़ा. यह साहब हमेशा से ही मातहत अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब रहे है. किसी वक्त उनके और परिवार के सदस्यों की विमान यात्राओं का बोझ उठानेवाले अधिकारियों का दम निकल गया था. एक महिला अधिकारी को 70 हजार रुपए का गॉगल लाने के लिए बोला गया. एक थानेदार को आईफोन की डिमांड की गई. क्लॅब में होनेवाली पार्टी का पेमेंट करने के लिए भी कई मर्तबा मजबूर किया जाता है. थानेदार 'सिस्टम' में शामिल होने के बावजूद साहब ने डीबी टीम को भी 'टारगेट' दिया है. दागदार छवि के चलते पूर्व पुलिस आयुक्त ने साहब को झटका भी दिया था. पून: सक्रिय होने से झटके का असर खत्म होने की चर्चा की जा रही है.