रविवार, 20 सितमबर 2026

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12:29 IST

येमेन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों की भीषण लड़ाई, 24 घंटे में 44 मरे

तैझ और लहज प्रांतों में जोरदार गोलीबारी और मिसाइल हमलों के बीच दोनों तरफ से भारी सैन्य कुमक भेजी गई है।

येमेन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों की भीषण लड़ाई, 24 घंटे में 44 मरे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मिडिल ईस्ट के देश येमेन में बरसों से चल रहा गृहयुद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकारी सेना और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच पिछले 24 घंटों में कई मोर्चों पर हुई जबरदस्त झड़प में कम से कम 44 लोगों की जान चली गई।

यह हिंसा येमेन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित तैझ और लहज नाम के दो बेहद अहम प्रांतों में हुई है। इससे पूरे रेड सी इलाके के व्यापारिक रास्तों और सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा हो गई है।

स्थानीय सैन्य सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों ने अपने-अपने कब्जे वाली रणनीतिक जगहों पर पकड़ मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियां और अत्याधुनिक हथियार भेजना शुरू कर दिया है। खासकर वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद संवेदनशील माने जाने वाले बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब स्थित कहाबुब, अल-काधा और अल-वाजिया इलाकों में लड़ाई सबसे तेज देखी जा रही है।

एक वरिष्ठ सरकारी सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तैझ और लहज प्रांतों के मोर्चे पर दोनों सेनाओं के बीच जोरदार गोलीबारी और मिसाइल हमले जारी हैं। हूती विद्रोहियों ने तैझ प्रांत के अल-काधा और अल-वाजिया में सरकारी सेना की चौकियों और अहम जगहों पर कब्जा करने के लिए एक के बाद एक कई जानलेवा हमले किए। बड़ी तादाद में सैनिक भेजकर सरकारी सेना की मोर्चाबंदी तोड़ने की कोशिश हूती लड़ाकों ने की।

हालांकि येमेन की सरकारी सेना ने जोरदार जवाबी कार्रवाई करते हुए हूती विद्रोहियों के ये सारे हमले नाकाम कर दिए। इस भीषण मुठभेड़ में 6 सरकारी सैनिकों की जान गई, जबकि सेना की जवाबी कार्रवाई में 11 हूती विद्रोही मारे गए। इस इलाके में कब्जा बनाए रखने के लिए अब भी दोनों तरफ से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है।

वहीं लहज प्रांत का कहाबुब नाम का दुर्गम पहाड़ी इलाका लड़ाई का मुख्य केंद्र बन गया है। यह जगह अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते पर नजर रखने के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है। यहां हुई लड़ाई में दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ है। सरकारी सैन्य अधिकारी ने पुष्टि की कि हूतियों से लड़ते हुए पिछले 24 घंटों में यहां 12 सरकारी सैनिक शहीद हुए। हूती गुट के सैन्य सूत्र ने भी माना है कि इस इलाके में उनके भी बड़े नुकसान हुए हैं। हूतियों के दावे के मुताबिक कहाबुब इलाके की झड़प में उनके एक बड़े कमांडर समेत 15 हूती लड़ाके मारे गए हैं। दोनों तरफ से यहां तोपखाने और भारी हथियारों का इस्तेमाल बढ़ा दिया गया है, जिससे आसपास की आबादी में डर का माहौल है।

येमेन में ताजा हिंसा की जड़ इसी महीने की शुरुआत में हुई घटनाओं से जुड़ी है। सितंबर की शुरुआत से ही हूती विद्रोहियों ने येमेन के दक्षिण-पश्चिमी रेड सी तट पर तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया था। 10 सितंबर को हूतियों ने रणनीतिक रूप से अहम मोखा बंदरगाह शहर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था। अगले ही दिन यानी 11 सितंबर को उन्होंने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के ठीक बीच में स्थित मय्यून यानी पेरिम द्वीप पर भी अपना कंट्रोल जमा लिया।

मय्यून द्वीप और मोखा बंदरगाह पर कब्जे के बाद हूती विद्रोहियों का हौसला बढ़ा है और उन्होंने जमीन पर आगे बढ़कर तैझ और लहज प्रांत पर दबदबा बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इस इलाके से दुनिया के बड़े तेल और व्यापारिक ट्रैफिक का रास्ता गुजरता है, इसलिए इंटरनेशनल कम्युनिटी की नजर इस लड़ाई पर टिकी है।

येमेन के इस भयानक संघर्ष की शुरुआत 2014 के आखिर में हुई थी, जब शिया पंथ के हूती विद्रोहियों ने येमेन की राजधानी सना और उत्तर येमेन का ज्यादातर हिस्सा अपने कब्जे में लेकर तत्कालीन सरकार को गिरा दिया था। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरेबिया की अगुआई वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने येमेन की आधिकारिक सरकार को दोबारा सत्ता में लाने के लिए सैन्य दखल दिया था।

पिछले एक दशक से चल रहे इस गृहयुद्ध में लाखों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करोड़ों लोग बेघर हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र पहले भी कई बार इस हालात को दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट बता चुका है। अब फिर से इस इलाके में शुरू हुई तेज लड़ाई से शांति की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं और येमेन एक बार फिर बड़े विनाशकारी संघर्ष में फंस गया है।

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