सौदी-हुथी तनाव बढ़ा, अमेरिका ने मध्य पूर्व के 16 से ज्यादा देशों के लिए इमरजेंसी सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया
रियाध पर मिसाइल हमले और अरामको को निशाना बनाने की कोशिश के बाद अमेरिका ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों को सतर्क रहने को कहा
मध्य पूर्व में मिलिट्री टेंशन दिन-ब-दिन खतरनाक मोड़ ले रहा है। सऊदी अरब और यमन के ईरान-समर्थित हुथी बागियों के बीच नए सिरे से भड़की झड़पों के बाद ट्रंप प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने खाड़ी क्षेत्र में रह रहे और वहां से गुजरने वाले अपने सभी नागरिकों के लिए इमरजेंसी सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। कभी भी हालात बिगड़ सकते हैं, इसलिए नागरिकों को इस इलाके का सफर टालने या बहुत गंभीरता से दोबारा सोचने की साफ हिदायत दी गई है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि इस क्षेत्र का सिक्योरिटी माहौल बेहद उलझा हुआ और अनप्रेडिक्टेबल है। मिलिट्री कार्रवाइयों और मिसाइल हमलों की वजह से फ्लाइट्स अचानक कैंसिल होना, एयरस्पेस बंद हो जाना या ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ जाना जैसी बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। इसीलिए नागरिकों से कहा गया है कि वे सेफ जगह पर शरण लें और एयरपोर्ट्स के कामकाज पर लगातार नजर रखें।
यह सिक्योरिटी अलर्ट सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को कवर करता है। इस एडवाइजरी में बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक, इस्राइल, कब्जे वाला वेस्ट बैंक और गाजा, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन शामिल हैं।
इस पूरे इलाके में बनी मिलिट्री अनिश्चितता को देखते हुए, वहां मौजूद या वहां जाने का प्लान बना रहे हर नागरिक को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। किसी भी वक्त संघर्ष भड़क सकता है, इसलिए मध्य पूर्व के बाहर रह रहे अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे फिलहाल इस क्षेत्र का हर सफर कैंसिल कर दें।
इस अलर्ट की वजह सऊदी अरब में हाल की खतरनाक मिलिट्री घटनाएं हैं। शनिवार को सऊदी की राजधानी रियाध की तरफ दागी गई एक हाई-स्पीड बैलिस्टिक मिसाइल को सऊदी की एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोककर तबाह कर दिया। इसके अलावा सऊदी की अगुवाई वाली सेना ने बिशा, ताईफ, फरासान और यानबू जैसे संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाने वाले कई ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने का दावा किया है।
दूसरी तरफ यमन के हुथी बागियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए खुला दावा किया है कि उन्होंने रियाध में एक बेहद संवेदनशील मिलिट्री बेस के साथ-साथ यानबू में सऊदी की बड़ी 'अरामको' तेल सुविधा पर मिसाइलों और बिना पायलट वाले ड्रोन से सटीक हमले किए हैं। इस संघर्ष की आंच अब सीधे ग्लोबल फ्यूल सप्लाई तक पहुंचने की आशंका पैदा हो गई है।
इस पूरे मिलिट्री संघर्ष और हिंसा के लिए ट्रंप प्रशासन ने सीधे ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका का कहना है कि ईरान-समर्थित हुथी मिलिशिया जानबूझकर सऊदी अरब की सिविलियन बस्तियों और एयरपोर्ट्स को निशाना बना रही है। आम नागरिक इस्तेमाल करने वाले एयरपोर्ट्स पर हमला करना इंटरनेशनल नियमों का उल्लंघन है, और इससे इंटरनेशनल सिक्योरिटी को बड़ा खतरा पैदा हुआ है। अमेरिका के डिप्लोमैटिक ठिकानों और दूतावासों पर भी हमले का खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते सिक्योरिटी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अगर यह संघर्ष इसी तरह भड़कता रहा, तो इसका ग्लोबल इकोनॉमी और क्रूड ऑयल मार्केट पर बहुत बुरा असर पड़ेगा, ऐसी आशंका जताई जा रही है।