UPI के नए MDR नियम से LPG डिलीवरी में पेमेंट का झंझट बढ़ने की आशंका
2000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर 15 अक्टूबर से लगने वाले 5 रुपये MDR का असर LPG सिलेंडर की बुकिंग और पेमेंट पर भी पड़ सकता है, गैस वितरक अभी इसका आकलन कर रहे हैं।
डिजिटल पेमेंट और यूपीआई को लेकर देश भर में जो नए बदलाव होने वाले हैं, उनका असर अब एलपीजी गैस सिलेंडर की खरीद और डिलीवरी पर भी पड़ सकता है। NPCI ने 2,000 रुपये से ज्यादा रकम के कुछ व्यापारी लेनदेन पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का प्रस्ताव रखा है, और इसी शुल्क का असर एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर भी होने की आशंका जताई जा रही है। रसोई गैस के वितरक फिलहाल यही आकलन कर रहे हैं कि इस नए शुल्क से उनके कारोबार पर कितना फर्क पड़ेगा। प्रस्ताव के मुताबिक 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ लेनदेन पर 5 रुपये का MDR लागू किया जाएगा।
व्यावसायिक इस्तेमाल वाले 19 किलो के सिलेंडर की कीमत 2,500 रुपये से ज्यादा है, इसलिए इस पर 5 रुपये का MDR लगने की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि 1 सितंबर को 19 किलो के व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर का दाम 2,738 रुपये से बढ़ाकर 2,747.50 रुपये कर दिया गया था, यानी 9.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।
असल परेशानी घरेलू एलपीजी को लेकर ज्यादा है। 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 1,000 रुपये से कम है, ऐसे में यह शुल्क सीधे ग्राहकों के पेमेंट पर लागू होगा या नहीं, इसे लेकर वितरकों में उलझन बनी हुई है। वितरकों की सबसे बड़ी चिंता डिलीवरी के वक्त होने वाले यूपीआई पेमेंट को लेकर है। बहुत सी एलपीजी एजेंसियों में डिलीवरी वाला स्टाफ अपने पर्सनल यूपीआई अकाउंट पर ग्राहकों से सिलेंडर का पेमेंट लेता है और दिन भर जमा हुई रकम शाम को एजेंसी के खाते में ट्रांसफर करता है। ऐसे में शाम को स्टाफ की तरफ से एक साथ ट्रांसफर की गई रकम नए MDR के दायरे में आ सकती है।
वितरकों का कहना है कि हर डिलीवरी स्टाफ को अलग से QR कोड नहीं दिया जाता, इसी वजह से कई जगह पर्सनल यूपीआई अकाउंट से पेमेंट लेना आम बात बन गई है। ऐसे हालात में या तो नकद पेमेंट लेने का ऑप्शन बचता है, या फिर ग्राहकों से अतिरिक्त रकम मांगनी पड़ सकती है। इसी वजह से वितरक यह मुद्दा सरकार के सामने रखने की तैयारी में हैं और एलपीजी वितरण को MDR से छूट देने की मांग करने वाले हैं।
NPCI ने रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी कुछ मर्चेंट कैटेगरी में 2,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर 5 रुपये का एक जैसा MDR लगाने का प्रस्ताव दिया है। बताया जा रहा है कि कुछ कैटेगरी में पहले से लागू 0.4 प्रतिशत के बदलते रेट की जगह यह एक समान शुल्क इसलिए रखा गया है ताकि कम मुनाफे वाले सेक्टर में लागत को काबू में रखा जा सके।