शनिवार, 19 सितमबर 2026

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22:53 IST

अरविंदो कोल खदान: पुनर्वसन और रोजगार को लेकर ग्रामीणों के सवाल, नागपुर हाईकोर्ट जाने की तैयारी

बेलोरा, जेना और निवळी के ग्रामीणों ने अरविंदो कोल प्रोजेक्ट की ब्लास्टिंग, ओवरबर्डन और पुनर्वसन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और अपेक्षित कार्रवाई न होने पर नागपुर खंडपीठ जाने का फैसला किया है।

अरविंदो कोल खदान: पुनर्वसन और रोजगार को लेकर ग्रामीणों के सवाल, नागपुर हाईकोर्ट जाने की तैयारी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अरविंदो कोल खदान प्रोजेक्ट को लेकर बेलोरा, जेना और निवळी सहित आसपास के गांवों में लंबे समय से सुलग रहे सवाल अब प्रशासनिक और कानूनी मोड़ ले चुके हैं। ग्रामीणों ने कोयला उत्खनन, ब्लास्टिंग, ओवरबर्डन के मैनेजमेंट, लोकल बेरोजगारों को रोजगार, पुनर्वसन की प्रक्रिया और प्रोजेक्ट के प्रशासनिक पहलुओं पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता पूजा गजानन पिंपळकर की अगुवाई में यह मुद्दा प्रशासन के सामने उठाया जा रहा है, और अगर उम्मीद के मुताबिक कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण नागपुर खंडपीठ में जाने का फैसला ले चुके हैं।

खदान प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद पूजा पिंपळकर ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जिला प्रशासन, उपविभागीय अधिकारी, वरोरा और जिला खनिकर्म विभाग के पास अर्जी देकर यह जानकारी मांगी थी कि प्रोजेक्ट किस प्रशासनिक और कानूनी आधार पर चल रहा है, कौन सी परमिशन ली गई हैं और पुनर्वसन की प्रक्रिया किस तरीके से चल रही है। इस अर्जी के जवाब में उपजिलाधिकारी (पुनर्वसन), चंद्रपुर के दफ्तर ने 1 सितंबर 2026 को जन माहिती अधिकारी सह जिला खनिकर्म अधिकारी, चंद्रपुर को पत्र भेजा। पत्र में कहा गया कि इससे जुड़ी जानकारी और फाइल खनिकर्म विभाग के दफ्तर में है, और सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत अर्जी संबंधित दफ्तर को फिर से भेज दी गई है।

उपजिलाधिकारी (पुनर्वसन) दफ्तर के पत्र में बेलोरा, गोटाळा रिठ, आष्टी रिठ, टाकळी, पानवडाळा, खंडाळा रिठ, डोंगरगाव खाडी, गोवरदिप रिठ, जेना-निवळी, किलोनी और सोमनाळा रिठ इन 11 गांवों की जमीन खरीदने की प्रोसेस का जिक्र किया गया है। इसी पत्र में यह भी बताया गया कि मौजा बेलोरा गांव का पुनर्वसन और पुनर्स्थापन अरविंदो कंपनी के जरिए किया जाना है, और बेलोरा गांव के पुनर्वसन की कार्रवाई पहले ही हो चुकी है जबकि बाकी गांवों के पुनर्वसन की कार्रवाई कंपनी प्रशासन की तरफ से चल रही है। खास बात यह है कि उपजिलाधिकारी (पुनर्वसन) दफ्तर ने साफ कहा कि बाकी पुनर्वसन की कार्रवाई से जुड़ी कोई फाइल उनके पास नहीं है और आगे की कार्रवाई कंपनी प्रशासन ही देख रहा है।

आरटीआई अर्जी के जरिए परमिशन, प्रशासनिक प्रोसेस और पुनर्वसन की जानकारी मांगने पर अलग-अलग सरकारी दफ्तरों से अर्जी एक दूसरे दफ्तर को भेजी जा रही है, जिससे ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर असली फैसला कौन सा दफ्तर लेता है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है। चूंकि उपजिलाधिकारी (पुनर्वसन) के पत्र में जानकारी और फाइल जिला खनिकर्म दफ्तर से जुड़ी बताई गई है, ग्रामीणों की मांग है कि जिला खनिकर्म विभाग खदान प्रोजेक्ट के लिए जरूरी परमिशन, मंजूरी और शर्तों की साफ जानकारी दे।

इसके साथ ही पूजा पिंपळकर पहले भी कंपनी प्रशासन से मांग कर चुकी हैं कि प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों, खेत मजदूरों और लोकल परिवारों के 40 बेरोजगार युवक-युवतियों को अरविंदो प्रोजेक्ट में रोजगार दिया जाए। ग्रामीणों के मुताबिक कंपनी प्रशासन ने एक साथ 40 लोगों को रोजगार देने के बजाय हर महीने गांव के बेरोजगार युवक-युवतियों में से पांच लोगों को रोजगार देने का भरोसा दिया था, लेकिन ग्रामीणों ने यह शर्त मानने से इनकार किया और सभी 40 बेरोजगारों को एक साथ रोजगार देने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि इतना वक्त बीतने के बाद भी एक भी बेरोजगार को अभी तक रोजगार नहीं मिला है।

ग्रामीणों का यह भी दावा है कि खदान इलाके में हो रही ब्लास्टिंग से बेलोरा, जेना और निवळी के कई घरों में दरारें आ गई हैं और कुछ घरों की छत तक उड़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लास्टिंग के झटकों से घरों को नुकसान पहुंच रहा है, इसलिए इन घरों का आधिकारिक पंचनामा और तकनीकी सर्वे कराकर नुकसान का आकलन किया जाए और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा और मदद दी जाए।

खदान से निकलने वाले ओवरबर्डन के मैनेजमेंट पर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर ओवरबर्डन पर मिट्टी डाली जा रही है, जिससे धूल प्रदूषण, पानी के बहाव और आसपास के पर्यावरण पर असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन खुद मौके पर जाकर यह जांचे कि ओवरबर्डन का भंडारण और निपटान किन नियमों के तहत हो रहा है।

एक तरफ सरकारी पत्र में पुनर्वसन की कार्रवाई कंपनी प्रशासन के जरिए चलने की बात कही गई है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों का दावा है कि लोकल नागरिकों की कई शिकायतें अब भी जस की तस हैं। इसी वजह से ग्रामीणों ने मांग की है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करके सामने साफ भूमिका रखे। ग्रामीणों ने कहा कि रोजगार, घरों का नुकसान, ब्लास्टिंग, ओवरबर्डन मैनेजमेंट और पुनर्वसन, इन सभी मुद्दों पर प्रशासन को अलग से ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि लोकल जनप्रतिनिधि आगे आकर प्रशासन से हकीकत साफ कराएं।

प्रशासन से उम्मीद के मुताबिक कार्रवाई न होने पर नागपुर खंडपीठ में याचिका दाखिल कर प्रोजेक्ट से जुड़ी प्रशासनिक परमिशन, पुनर्वसन की प्रक्रिया, पर्यावरण से जुड़े मुद्दे, ब्लास्टिंग से हुआ बताया जा रहा नुकसान, ओवरबर्डन मैनेजमेंट और लोकल लोगों को रोजगार, इन सभी मुद्दों की तरफ कोर्ट का ध्यान खींचा जाएगा, यह बात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताई गई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूजा गजानन पिंपळकर, प्रज्ञा भोयर, कुणाल कुडकर, हर्षदा वाकडे के साथ बेलोरा, जेना, निवळी और आसपास के प्रभावित ग्रामीण मौजूद थे, जिन्होंने अपनी मांगों के लिए प्रशासनिक और कानूनी, दोनों स्तर पर लड़ाई जारी रखने का इरादा जताया।

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