चंद्रपूर जिला बैंक में सहकार सप्ताह 2026 की धूमधाम से शुरुआत, वैशालीताई वासाडे का सम्मान
चंद्रपूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक ने सहकार महर्षी बाबासाहेब वासाडे को याद करते हुए सहकार सप्ताह की शुरुआत की, बैंक परिसर में उनकी पूर्णाकृति प्रतिमा लगाने का ऐलान भी हुआ।
चंद्रपूर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के प्रधान कार्यालय स्थित मा.सा. कन्नमवार सभागृह में 19 से 25 सितंबर तक चलने वाले 'सहकार सप्ताह 2026' की शुरुआत बड़े उत्साह के साथ हुई। यह आयोजन सहकार क्षेत्र को नई दिशा देने वाले सहकार महर्षी दिवंगत एडवोकेट बाबासाहेब वासाडे के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए किया गया। इस मौके पर सहकार क्षेत्र में योगदान के लिए पूर्व जिला परिषद अध्यक्षा वैशालीताई वासाडे का सार्वजनिक नागरी सत्कार किया गया। साथ ही बाबासाहेब वासाडे के साथ काम कर चुके सहकार निष्ठ साथियों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्रपूर-वणी-अर्णी लोकसभा क्षेत्र की सांसद और बैंक की संचालिका प्रतिभाताई धानोरकर ने की, जबकि उद्घाटन चिमूर के विधायक कीर्तिकुमार (बंटी) भांगडिया के हाथों हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष हंसराज अहीर, विधायक सुधाकर अडबाले, बैंक अध्यक्ष रवींद्र शिंदे, जिला उपनिबंधक जयसिंग ठाकूर, ओबीसी नेता अशोक जिवतोड़े, संजय वासाडे, बैंक के उपाध्यक्ष संजय डोंगरे और मानद सचिव अवेश खान पठान मौजूद रहे।
बैंक अध्यक्ष रवींद्र शिंदे ने बाबासाहेब वासाडे की यादें ताज़ा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब वासाडे की वजह से ही सहकार की असली ताकत, बारीकियां और मूल्य सीखने को मिले और आज भी बैंक सहकार क्षेत्र में मजबूती से खड़ी होकर जनता की सेवा कर पा रही है। शिंदे ने ऐलान किया कि आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए बैंक परिसर में बाबासाहेब की भव्य पूर्णाकृति प्रतिमा लगाई जाएगी और हर साल 19 सितंबर को उनकी पुण्यतिथि पर 'सहकार सप्ताह' मनाने का ऐतिहासिक फैसला बैंक ने लिया है। इस पर मौजूद लोगों ने सहमति जताई।
विधायक सुधाकर अडबाले ने कहा कि बाबासाहेब सिर्फ सहकार क्षेत्र के नेता नहीं थे, उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा काम करते हुए गांव के बच्चों के लिए शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई। उन्होंने बैंक के इस सहकार सप्ताह कार्यक्रम की तारीफ करते हुए इसे आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया।
विधायक बंटी भाऊ उर्फ कीर्तिकुमार भांगडिया ने उद्घाटन के मौके पर बाबासाहेब द्वारा तैयार किए गए एक कार्यकर्ता से जुड़ा एक किस्सा सुनाया और कहा कि बाबासाहेब की तालीम में तैयार हुआ कार्यकर्ता विचारों से समझौता किए बिना ईमानदारी से काम करता है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब वासाडे ने बैंक को सहकार क्षेत्र में मान-सम्मान दिलाया और बचत गट आंदोलन खड़ा कर चंद्रपूर जिला बैंक का नाम राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। आज करीब 6,000 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली यह जिला बैंक विदर्भ में पहले स्थान पर है, जिसमें बाबासाहेब और उनके साथियों का बड़ा योगदान है। उन्होंने बैंक से बाबासाहेब की पूर्णाकृति प्रतिमा जल्द लगाने का काम शुरू करने की मांग की।
हंसराज अहीर ने कहा कि बाबासाहेब के संबंध जिले के साथ-साथ राज्य के सभी दलों के नेताओं से थे, जिनमें राज्य के बड़े नेता शरदचंद्रजी पवार भी शामिल थे, और इन संबंधों का इस्तेमाल कर बाबासाहेब ने जिले में सहकार का जाल फैलाया और जिले का नाम रोशन किया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के विचार शहर और गांव दोनों जगह गहरे तक जड़ें जमाए हुए हैं और बैंक का यह सहकार सप्ताह आयोजन सहकारी संस्थाओं और उनके कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायी साबित होगा।
अध्यक्ष के तौर पर मौजूद सांसद प्रतिभाताई सुरेश धानोरकर ने कहा कि बाबासाहेब वासाडे ने पळसगांव येनबोडी गांव से शुरुआत कर ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए वहीं शिक्षा संस्थाएं खड़ी कीं और ग्रामीण जनता के प्रति वफादार रहकर सहकार का जाल बुना। इसी का नतीजा है कि उनके कार्यकाल में लगातार छह बार नाबार्ड पुरस्कृत बचत गट योजना में बेहतरीन काम के लिए चंद्रपूर जिला बैंक को पुरस्कार मिला। उन्होंने बताया कि इस साल बैंक ने 835 करोड़ रुपये के फसल कर्ज बांटने का लक्ष्य पूरा करते हुए 848 करोड़ रुपये का फसल कर्ज बांटा, साथ ही 7,074 महिला बचत गटों को 187 करोड़ रुपये का कर्ज देकर राज्य में बचत गट कर्ज वितरण में सबसे ऊपर रहीं। उन्होंने कहा कि बचत गटों को कर्ज देने का काम सबसे पहले बाबासाहेब वासाडे के कार्यकाल में शुरू हुआ था और आज भी लगातार जारी है, और बैंक द्वारा जिले की सभी शाखाओं और सहकारी संस्थाओं में सहकार सप्ताह मनाना ही बाबासाहेब को असली श्रद्धांजलि है।
विधायक देवराव भोंगले ने वीडियो संदेश के जरिए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बैंक बाबासाहेब के विचारों पर चलते हुए ग्रामीण इलाकों को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। बैंक की ओर से सभी किसानों, महिलाओं और सहकार क्षेत्र से जुड़े लोगों का आभार जताया गया।
इस मौके पर बैंक के संचालक सुदर्शन निमकर, गणेश तर्वेकर, रोहित बोम्मावार, गजानन पाचोडे, जयंत टेंभुर्डे, निशिकांत बोरकर, दिनेश चोखारे, उल्हास करपे, यशवंत दिघोरे, डॉ. ललित मोटघरे, दामोदर मिसार, डॉ. अनिल वाढई, नंदाताई अल्लुरवार और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र कल्याणकर के साथ बाबासाहेब को मानने वाले बड़ी संख्या में किसान, बचत गट की महिलाएं, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।