नवी मुंबई: कंत्राटी कामगारों की वेतनवृद्धि पर महासभा में प्रशासन को घेरा, १५ दिन की मोहलत
नवी मुंबई महानगरपालिका की महासभा में कंत्राटी कामगारों को मिलने वाली वेतनवृद्धि लागू न होने पर लोकप्रतिनिधियों ने प्रशासन को घेरा, प्रशासन को १५ दिन में कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया।
नवी मुंबई महानगरपालिका की महासभा में शुक्रवार को सेवा आधारित कंत्राटी कामगारों के न्यूनतम वेतन और विशेष भत्ते को लागू करने का मुद्दा जोर-शोर से उठा। जून महीने में मंजूर हुए प्रस्ताव पर अब तक अमल न होने से लोकप्रतिनिधियों ने प्रशासन को जमकर घेरा। आखिरकार तत्काल विषय क्रमांक २९ को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया और बढ़ी हुई वेतनवृद्धि व विशेष भत्ते को लागू करने के लिए प्रशासन को १५ दिन की मोहलत दी गई।
महासभा की बैठक में सभागृह नेता सागर नाईक ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि नवी मुंबई महानगरपालिका के कंत्राटी कामगारों को मंजूर हुई सात हजार पांच सौ रुपये की पगारवृद्धि प्रशासनिक लालफीताशाही में फंसी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि पालिका प्रशासन के पास न्यूनतम वेतन से ज्यादा पगार देने की क्षमता है और इसके लिए पर्याप्त फंड भी उपलब्ध है, फिर भी कामगारों को इससे वंचित रखा जा रहा है।
सागर नाईक ने साफ कहा कि ऑडिट की तकनीकी वजहों का बहाना बनाए बिना अगले १५ दिनों के भीतर काम पूरा होना चाहिए, गणपति में नहीं तो कम से कम दशहरे तक तो कामगारों का त्योहार मीठा होना ही चाहिए। उन्होंने इस पगारवृद्धि को असल में लागू करने का आखिरी आदेश और चेतावनी महानगरपालिका प्रशासन को दी।
उन्होंने मांग की कि चीफ अकाउंट ऑफिसर और संबंधित प्रशासन तकनीकी बातों की पूर्ति कर नवरात्रि-दशहरे से पहले कामगारों को बढ़ी हुई रकम का फायदा दें। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त आयुक्त डॉ. राहुल गेठे ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव के अध्ययन और कुछ तकनीकी बातों की पूर्ति के लिए समय चाहिए। हालांकि प्रशासन ने सभागृह में कहा कि १५ दिन के भीतर जरूरी कार्रवाई पूरी करने की कोशिश की जाएगी।
इसके बाद तत्काल विषय क्रमांक २९ को मंजूरी के लिए रखा गया, जिसे सभागृह ने सर्वसम्मति से मंजूर कर दिया। साथ ही नगरसचिव विभाग को निर्देश दिया गया कि मंजूर प्रस्ताव तुरंत प्रशासन के पास भेजकर आगे की कार्रवाई की जाए।
सभागृह नेताओं ने १९ जून को मंजूर हुए ठराव क्रमांक ७५२ का हवाला देते हुए बताया कि कंत्राटी कामगारों के लिए मंजूर विशेष भत्ता और वेतनवृद्धि अब तक उनके खाते में जमा नहीं हुई है। उनका आरोप था कि कंत्राट के व्हेरिएशन क्लॉज के मुताबिक सक्षम प्राधिकरण की नीति के अनुसार वेतनवृद्धि लागू करने की तरतूद होने के बावजूद प्रशासन देरी कर रहा है। उन्होंने बढ़ी हुई रकम का प्रस्ताव स्थायी समिति के पास भेजकर १५ दिन के भीतर कार्रवाई पूरी करने की मांग की। विरोधी पक्षनेता विजय चौगुले ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि जून से लंबित इस मुद्दे की वजह से कंत्राटी कामगारों के साथ अन्याय हो रहा है।
इस बीच महापौर ने प्रशासन की देरी पर नाराजगी जताते हुए कंत्राटी कामगारों के मुद्दे पर सभागृह का रुख साफ किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कामगारों की वेतनवृद्धि वक्त पर लागू नहीं हुई तो पूरा सभागृह कामगारों के साथ खड़े होकर सड़क पर उतरेगा।