वडेट्टीवार का दावा - सिंचन विभाग का कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने से भड़का जरांगे का आंदोलन
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन को लेकर गंभीर आरोप लगाया है।
मराठा आंदोलक मनोज जरांगे पाटील ने हैदराबाद गजट और कुनबी प्रमाणपत्र की मुख्य मांग को लेकर 20 दिन का आमरण अनशन किया था। इसके बाद मुंबई में भी उनका मोर्चा पहुंचने वाला था। बीड जिले के पाटोदा में सरकार के प्रतिनिधिमंडल की सफल मध्यस्थता के बाद जरांगे ने सरकार को मांगें पूरी करने के लिए तीन महीने की मोहलत दी और अपना अनशन खत्म कर दिया। लेकिन इसी आंदोलन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने एक गंभीर आरोप लगाया है कि इसके पीछे कुछ और ही अंडरकरंट था।
वडेट्टीवार ने कहा कि उनके पास इसके सबूत हैं और वे जरूरत पड़ने पर अभी भी दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा, "मेरे पास पुरावे हैं, मैं पुरावे भेज दूंगा, चाहें तो अभी दिखा सकता हूं, इसलिए उस चैलेंज को मैं फुसका बार समझता हूं। बेवजह कुछ भी नहीं लाना चाहिए। मेरे पास सबूत हैं कि यह इरिगेशन का काम है, उनके फोटो हैं जिसमें जरांगे पाटील का ड्राइवर गाड़ी चला रहा है, और कभी कॉन्ट्रैक्टर मंच पर बैठा हुआ है - वह कॉन्ट्रैक्टर है। मैं बिना सबूत के नहीं बोलता, इसलिए इस विषय के सबूत जिसे चाहिए उसे भेज दूंगा।"
वडेट्टीवार ने आगे कहा कि इस पर ज्यादा गहराई से बोलना ठीक नहीं होगा, लेकिन चरणबद्ध तरीके से बताएंगे। उन्होंने बताया कि एक काम सिंचन विभाग ने दिया था और उसे रद्द करने का आदेश खुद सीएम ऑफिस से आया था। उनका शक है कि इसी वजह से हुई गड़बड़ी से आंदोलन को धार मिली होगी।
दूसरी तरफ, विजय वडेट्टीवार की अगुवाई में नागपुर में ओबीसी समिति की बैठक हुई, जिसमें ओबीसी की जातिगत जनगणना की मांग को लेकर दिल्ली में आंदोलन करने का फैसला लिया गया। इस बैठक में नागपुर विभाग के ओबीसी पदाधिकारी शामिल हुए, और तय हुआ कि नवंबर महीने के पहले हफ्ते में दिल्ली में यह आंदोलन किया जाएगा।
वडेट्टीवार ने चुनाव आयोग पर भी SIR को लेकर निशाना साधा। उनका आरोप है कि SIR के नाम पर महाराष्ट्र में विरोधी दलों के वोट काटकर, जनता के बीच अपनी साख खो चुकी सरकार सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि आयोग की सूची के अनुसार स्थलांतरित, मृत और दोहरी एंट्री वाले लगभग 2 करोड़ 66 लाख 88 हजार 478 मतदाताओं पर सवाल उठ रहा है, यानी अंतिम सूची से करीब 21 प्रतिशत मतदाता हट सकते हैं। इसमें से 76 लाख 135 मतदाता स्थलांतरित बताए गए हैं, 45 लाख 520 मतदाता गैरहाजिर दिखाए गए हैं, और 62 लाख 48 हजार 281 मतदाताओं में विसंगति है। यह कुल आंकड़ा 2 करोड़ 10 लाख 88 हजार तक पहुंचता है।
वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि जिन 37 अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर बड़ी संख्या में मतदाता बढ़ाए गए, उसका आंकड़ा 29.77 प्रतिशत है। ये मुस्लिम बहुल, एससी, एसटी सीटें हैं और वहीं यह गड़बड़ी की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ताधारी दल की सीटों पर मतदाता कम नहीं हुए, लेकिन विरोधी दलों की सीटों पर कम हुए हैं, और 76 लाख मतदाता स्थलांतरित कैसे हो गए, इसका जवाब आयोग के पास नहीं है।