शनिवार, 19 सितमबर 2026

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21:59 IST

यूपीआय पेमेंट पर चार्ज को राज ठाकरे ने बताया 'डिजिटल जाल', केंद्र पर साधा निशाना

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले यूपीआय एमडीआर चार्ज पर केंद्र सरकार को घेरा, अर्थ मंत्रालय का पुराना स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।

यूपीआय पेमेंट पर चार्ज को राज ठाकरे ने बताया 'डिजिटल जाल', केंद्र पर साधा निशाना
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

यूपीआय के जरिए होने वाले बड़े व्यापारी लेनदेन पर एमडीआर चार्ज लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर सियासत गरम हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। 'दरवाजे पर टकटक' यानी दरवाजे पर दस्तक, ऐसा कहते हुए उन्होंने इस फैसले पर कई सवाल खड़े किए हैं।

नए नियमों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M यूपीआय लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा। यह चार्ज व्यापारियों से वसूला जाएगा। 75 हजार रुपये या उससे ज्यादा के लेनदेन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। हालांकि, पर्सन-टू-पर्सन यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआय लेनदेन आगे भी मुफ्त रहेंगे। राज ठाकरे ने इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाया। पहले डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए यूपीआय की आदत डलवाई गई, और अब उसी व्यवस्था पर चार्ज लगाया जा रहा है, ऐसी आलोचना उन्होंने की।

अपने आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट से पोस्ट करते हुए राज ठाकरे ने कहा, "केंद्र सरकार ने यूपीआय लेनदेन पर 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' यानी आसान भाषा में कहें तो यूपीआय लेनदेन पर, बिल्कुल सभी पर नहीं लेकिन चार्ज लगाकर भारतीयों पर, चाहे वो व्यापारी हों या ग्राहक, 'डिजिटल जाल' बिछाया है। पहले नोटबंदी करके, फिर हम कैसे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दे रहे हैं यह दिखाते हुए यूपीआय व्यवस्था लाई गई। फिर उसका खूब प्रचार किया गया, खुद की तारीफ करवाई गई, लोगों को इसकी आदत डलवाई गई और अचानक एक दिन ऐलान कर दिया गया कि अब इन लेनदेन पर चार्ज लगेगा। कुल मिलाकर नागरिकों को उलझाए रखा और चुपके से 'डिजिटल जाल' में फंसा दिया। मैं पिछले कई सालों से कह रहा हूं कि लापरवाह मत रहिए या सब कुछ कितना ठीक-ठाक चल रहा है ऐसा बिल्कुल मत मानिए। आपके दरवाजे पर यह सरकार कभी न कभी दस्तक देगी। और उसकी शुरुआत हो चुकी है।"

उन्होंने आगे कहा, "सरकार ने डिजिटल लेनदेन के लिए यूपीआय व्यवस्था लाई। उसे रिस्पॉन्स मिलेगा ऐसा देखा और मिला भी, यह सब ठीक है। लेकिन अगर मकसद डिजिटल पेमेंट व्यवस्था लाकर आर्थिक लेनदेन को आसान बनाना इतना ही साफ था, तो जिस दिन इस पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया गया उसी दिन वह चलता रहे और आम आदमी की जेब पर झटका न लगे, इसके लिए प्रावधान क्यों नहीं किया गया? ऐसी पेमेंट व्यवस्थाओं के लिए लंबे समय की देखभाल हो या साइबर सिक्योरिटी, इसके लिए पैसा लगेगा तो उसका प्रावधान बजट में स्थायी रूप से क्यों नहीं किया गया?"

उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुमकिन होता तो वित्त मंत्री सांस लेने पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी लगा देतीं। उनका कहना था कि ग्राहक अगर 2,000 रुपये से ज्यादा की खरीदारी करता है तो 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, और सरकार कह रही है कि यह बोझ व्यापारी उठाएंगे, लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि व्यापारी यह बोझ खुद उठाएंगे और ग्राहकों पर नहीं डालेंगे, इसके लिए सरकार के पास कोई सिस्टम है क्या, जवाब है बिल्कुल नहीं। प्रधानमंत्री मोदी विदेश जाकर यूपीआय का प्रचार करते थे और खुद अपनी पीठ थपथपाते थे, अब जब वे फिर विदेश जाएंगे तो कैसे एमडीआर और जीएसटी लगाया, यह भी हंसते हंसते बताएंगे क्या, ऐसा सवाल भी उन्होंने पूछा।

राज ठाकरे ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह सब अमेरिकी सरकार के दबाव में किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन यह फैसला लेते वक्त केंद्र सरकार ने किससे सलाह मशविरा किया, या विदेशी कार्ड कंपनियों और ग्लोबल पेमेंट सिस्टम की बेचैनी नहीं थी, ऐसा सरकार पक्के तौर पर कह सकती है क्या, जवाब नहीं है। सरकार पर कहीं न कहीं से दबाव होगा, और उन्होंने उसका फायदा अपना खजाना भरने के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सवाल चार पैसे या चालीस रुपये का नहीं है, सवाल सरकार की नीयत का है। नोटबंदी हो या डिजिटल पेमेंट लेनदेन, इसमें सरकार की नीयत कभी साफ नहीं दिखी। यूपीआय चलाने का खर्च कौन उठाएगा, इसका विचार व्यवस्था खड़ी करते वक्त ही होना चाहिए था। यह नहीं किया गया या शुरू से ही न करने का फैसला था। 2022 में अर्थ मंत्रालय ने साफ कहा था कि यूपीआय पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। लेकिन यह कहते वक्त कब जेब में हाथ डालना है यह भी तय हो चुका था। दो लोगों के लेनदेन पर चार्ज नहीं लगा रहे ऐसी बेकार दलील सरकार को नहीं देनी चाहिए। सरकार ने डिजिटल जाल बिछाया है और उसमें हर भारतीय अब फंस चुका है।

राज ठाकरे और उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस एमडीआर का विरोध जताया है। उन्होंने व्यापारियों से अपील की है कि यह चार्ज भरने का पूरी तरह विरोध करें। इसके साथ ही उन्होंने 21 अगस्त 2022 को अर्थ मंत्रालय के आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है, जिसमें सरकार ने यूपीआय लेनदेन पर कोई चार्ज न लगाने का ऐलान किया था। इस घोषणा के बाद अब यूपीआय के एमडीआर को लेकर व्यापारियों, ग्राहकों और केंद्र सरकार के बीच बहस और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सरकार यूपीआय व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने का मुद्दा उठा रही है, तो दूसरी तरफ विरोधी दल और कुछ व्यापारी संगठन इस चार्ज से डिजिटल लेनदेन पर असर पड़ने की आशंका जता रहे हैं।

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