'स्कूल ठीक करो' अभियान रंग लाया, राज्य सरकार ने स्कूलों की तुरंत मरम्मत के आदेश दिए
सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके के अभियान के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तुरंत ठीक करने का आदेश दिया है।
महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों में बरसों से चली आ रही बदहाली को लेकर आखिरकार राज्य सरकार हरकत में आई है। सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों की तुरंत मरम्मत करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इसमें बिजली, पानी, शौचालय, क्लासरूम और ब्लैकबोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के साफ निर्देश दिए गए हैं।
यह फैसला सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के बाद आया है, जिसकी वजह से इस अभियान की मांगों को अब सरकारी स्तर पर तवज्जो मिल गई है। सरकार ने तय किया है कि स्कूलों की मरम्मत का काम एक साथ नहीं बल्कि चरणों में होगा। गणेशोत्सव की छुट्टियों में पहले फेज का शुरुआती काम शुरू कर दिया जाएगा, जबकि बचा हुआ काम दिवाली की छुट्टियों में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। शौचालय, क्लासरूम, ब्लैकबोर्ड और पीने के पानी की सुविधाओं को इसमें सबसे ऊपर रखा गया है। इन कामों के लिए वित्त आयोग के फंड का इस्तेमाल करने की मंजूरी भी दे दी गई है।
राज्य के ग्रामीण विकास विभाग की एक बैठक में जिला परिषद स्कूलों की हालत का जायजा लिया गया, जिसमें कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। बैठक में पेश आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कुल 63,836 जिला परिषद स्कूल हैं। इनमें से 40,530 स्कूलों में लड़कियों के शौचालयों की हालत खराब पाई गई है, जबकि 663 स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की सुविधा है ही नहीं। इसके अलावा 1,638 स्कूलों में लड़कों के लिए भी शौचालय की सुविधा नहीं मिली।
'स्कूल ठीक करो' अभियान के दौरान कुछ जगहों पर दीपके और उनके साथियों के स्कूलों में घुसने को लेकर विवाद भी हुए थे। यह आरोप भी लगा था कि जयपुर के एक गांव में अभियान की टीम पर हमला हुआ। इस बीच दीपके ने अब एक नए राष्ट्रीय अभियान का ऐलान किया है, जिसे उन्होंने 'फिक्स ट्राइबल स्कूल्स' यानी 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' नाम दिया है। उनका कहना है कि यह अभियान गडचिरोली जिले से शुरू होगा और देशभर के आदिवासी इलाकों के स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं का मूल्यांकन कर उनमें सुधार के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।