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20:15 IST

रामटेक की ढाई साल की श्रीनिका के इलाज के लिए 10 करोड़ चाहिए, मंत्री जायसवाल ने CM फडणवीस से मिलकर मांगी मदद

रामटेक की मासूम श्रीनिका माकडे दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 से जूझ रही है, इलाज के लिए अमेरिकी कंपनी के इंजेक्शन पर 10 करोड़ रुपये खर्च आने की बात सामने आई है।

रामटेक की ढाई साल की श्रीनिका के इलाज के लिए 10 करोड़ चाहिए, मंत्री जायसवाल ने CM फडणवीस से मिलकर मांगी मदद
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

रामटेक में रहने वाली करीब 2 साल 11 महीने की बच्ची श्रीनिका रोहित माकडे एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही है। डॉक्टरों ने बताया है कि उसे स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 नाम की बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती हैं और सही समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है।

इस बीमारी के इलाज के लिए एक खास इंजेक्शन चाहिए, जो अमेरिका की एक कंपनी बनाती है। परिवार को बताया गया है कि इस इंजेक्शन की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये है। इतनी बड़ी रकम जुटा पाना एक आम परिवार के लिए लगभग नामुमकिन जैसा है, इसलिए अब मामला सरकार तक पहुंच गया है।

राज्य मंत्री आशीष जायसवाल इस मामले को लेकर खुद आगे आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अलग-अलग मुलाकात की और दोनों नेताओं को श्रीनिका की बीमारी की पूरी जानकारी दी। मंत्री जायसवाल ने उन्हें बताया कि बच्ची को किस तरह के इलाज की जरूरत है और उसमें कितना खर्च आ सकता है।

इन मुलाकातों में मुख्य मुद्दा यही रहा कि सरकार की ओर से बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक मदद कैसे दी जा सकती है। चूंकि इंजेक्शन की कीमत ही करीब 10 करोड़ रुपये आंकी गई है, इसलिए मंत्री जायसवाल ने दोनों नेताओं के सामने सरकारी स्तर पर सहायता देने की मांग रखी।

जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे ने श्रीनिका के मामले को गंभीरता से लिया है। दोनों नेताओं ने भरोसा दिलाया है कि बच्ची के इलाज के लिए जो भी जरूरी कदम उठाने होंगे, वे उठाए जाएंगे। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि मदद किस रूप में और कब तक मिलेगी।

फिलहाल श्रीनिका का परिवार और रामटेक के स्थानीय लोग सरकार की तरफ से आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजरें टिकाए हुए हैं। अगर सरकारी स्तर पर आर्थिक मदद मिल जाती है, तो बच्ची के महंगे इलाज का रास्ता आसान हो सकता है। तब तक परिवार के सामने यह चुनौती बनी हुई है कि इतनी बड़ी रकम आखिर कैसे जुटाई जाए।

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