शनिवार, 19 सितमबर 2026

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22:53 IST

प्यार कम नहीं हुआ, फिर भी रिश्ते में दूरी क्यों आ रही? इन 7 आदतों पर रखें नजर

रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के मुताबिक बड़े झगड़े न होने पर भी छोटी-छोटी रोजाना की आदतें दो लोगों के बीच दूरी ला सकती हैं

प्यार कम नहीं हुआ, फिर भी रिश्ते में दूरी क्यों आ रही? इन 7 आदतों पर रखें नजर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

कई बार ऐसा होता है कि रिश्ते में कोई बड़ा झगड़ा नहीं होता, फिर भी दोनों के बीच वो पुरानी अपनापन वाली बात महसूस नहीं होती। बातचीत कम हो जाती है, छोटी-छोटी बातों पर चिढ़चिढ़ापन बढ़ जाता है और साथ रहते हुए भी एक अजीब सी दूरी सी लगती है। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह कोई बड़ी गलती नहीं, बल्कि रोज की छोटी आदतें होती हैं। जैसे सामने वाले की बात बीच में काट देना, हर बातचीत के दौरान फोन पर लगे रहना, या पार्टनर की कोशिशों को हल्के में लेना।

ये आदतें देखने में मामूली लगती हैं, लेकिन बार-बार दोहराई जाएं तो पार्टनर को नजरअंदाज किया हुआ या कम अहमियत का महसूस हो सकता है। इन आदतों को पहचानना ही एक अच्छे रिश्ते को बनाए रखने का पहला कदम है। हर रिश्ते में मतभेद होते ही हैं, लेकिन जब छोटी-छोटी बातें रोजमर्रा का हिस्सा बन जाएं तो दिक्कत बढ़ जाती है। प्यार होने के बावजूद अगर पार्टनर को बार-बार नजरअंदाज किया हुआ या अनसुना किया हुआ महसूस हो रहा है, तो कुछ जरूरी आदतें बदलनी पड़ेंगी।

पहली आदत है बात करते वक्त फोन में लगे रहना। पार्टनर किसी जरूरी बात पर आपसे बात कर रहा हो और आपका ध्यान लगातार फोन पर हो, तो भले ही आप सिर्फ कुछ मिनट के लिए मैसेज चेक कर रहे हों, सामने वाले को लग सकता है कि उसकी बात उतनी अहमियत नहीं रखती। हर बातचीत में फोन दूर रखना जरूरी नहीं, लेकिन जरूरी या इमोशनल बातचीत के दौरान पूरा ध्यान देने से रिश्ते की नजदीकी बनी रहती है।

दूसरी आदत है छोटी-छोटी बातों को बार-बार "बाद में देखते हैं" कहकर टाल देना। बहुत लोगों को लगता है कि अभी वक्त नहीं है, बाद में बात कर लेंगे, ये आम बात है। लेकिन जब पार्टनर की मांगें या छोटी-छोटी ख्वाहिशें लगातार टाली जाती हैं तो दिक्कत शुरू होती है। जब वो कोई परेशानी, खुशी या छोटी सी इच्छा बताना चाहते हैं, तब उन्हें बार-बार इंतजार करवाने से उन्हें लगता है कि रिश्ते में उनकी भावनाओं को कम आंका जा रहा है।

तीसरी आदत है हर बात में गलती निकालना। घर के काम से लेकर कपड़ों, दोस्तों या फैसलों तक, हर चीज में लगातार गलती निकालने से रिश्ता प्रभावित हो सकता है। सलाह देना अलग बात है, लेकिन हर चीज में कमी निकालना बिल्कुल अलग। अगर ज्यादातर बातचीत शिकायतों के इर्द-गिर्द घूमती है, तो पार्टनर को लगने लगता है कि आखिर वो आपके साथ क्यों है।

चौथी आदत है शुक्रिया और तारीफ को जरूरी न समझना। रिश्ता लंबे समय का हो जाए तो अक्सर हम सामने वाले की कोशिशों को हल्के में लेने लगते हैं। वो आपके लिए खाना बनाते हैं, कोई काम संभालते हैं, मुश्किल दिन में सहारा देते हैं, आपके लिए वक्त निकालते हैं, आपकी पसंद-नापसंद का ख्याल रखते हैं। ये सब वो आपसे प्यार की वजह से करते हैं, लेकिन "उसने किया तो क्या हुआ" वाला रवैया सब कुछ बिगाड़ सकता है। ऐसे में एक छोटा सा शुक्रिया या तारीफ भी बहुत मायने रखती है। हर छोटी बात की तारीफ करना जरूरी नहीं, लेकिन सामने वाले की कोशिशों को पहचानने से रिश्ते में इज्जत बनी रहती है।

पांचवीं आदत है गुस्से में पुराने मुद्दे उखाड़ना। झगड़ा हो और बात अचानक महीनों या सालों पहले की गलतियों की तरफ मुड़ जाए, इस आदत से झगड़ा सुलझने की बजाय लंबा खिंचता है। अगर पुराना मुद्दा वाकई मौजूदा दिक्कत से जुड़ा है, तो उस पर किसी और वक्त शांति से बात हो सकती है। हर झगड़े में पुराने विवाद उखाड़ना दोनों के लिए थकाने वाला हो सकता है।

छठी आदत है पार्टनर की बात पूरी होने से पहले ही जवाब दे देना। कई बार हमें लगता है कि सामने वाला क्या कहने वाला है, ये हमें पहले से पता है, इसलिए हम उन्हें बीच में रोककर जवाब दे देते हैं। इससे बातचीत झगड़े जैसी लगने लगती है। पहले सुनना और फिर जवाब देना एक छोटी मगर असरदार आदत है। जरूरी नहीं कि आप उनकी हर बात से सहमत हों, बस ये दिखाना जरूरी है कि आपने समझने की कोशिश की।

सातवीं आदत है साथ वक्त बिताने को महज एक औपचारिकता बना देना। एक ही घर में रहना और साथ वक्त बिताना, ये दोनों बातें हमेशा एक जैसी नहीं होतीं। अगर दोनों अपने-अपने फोन में व्यस्त रहें या बातचीत सिर्फ घर के काम और जिम्मेदारियों तक सीमित रह जाए, तो इमोशनल रिश्ता कमजोर पड़ सकता है। साथ चाय पीना, थोड़ी देर टहलने जाना या बिना फोन के कुछ देर बात करना, ये रिश्ते की नजदीकी बनाए रखने के आसान तरीके हो सकते हैं।

रिश्ता मजबूत बनाने के लिए किसी बड़े उपाय की जरूरत नहीं होती। कई बार बदलाव रोजाना की बातचीत से ही शुरू होता है। पार्टनर की बात ध्यान से सुनना, उनकी कोशिशों को नोटिस करना और मतभेद होने पर भी इज्जत से बात करना, ये छोटी चीजें हैं, लेकिन इनका असर लंबे समय तक रहता है।

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