गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:37 IST

नागपुर मेयो अस्पताल में BP की टेल्मिसार्टन टैबलेट घटिया निकली, बिक्री-वितरण पर रोक

नागपुर के मेयो अस्पताल में टेल्मिसेव-40 के एक बैच को सरकारी जांच में घटिया गुणवत्ता का पाया गया, जिसके बाद स्टॉक वापस मंगाया जा रहा है।

नागपुर मेयो अस्पताल में BP की टेल्मिसार्टन टैबलेट घटिया निकली, बिक्री-वितरण पर रोक
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर के इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल यानी मेयो में एक और दवा को लेकर हड़कंप मचा है। ब्लड प्रेशर के मरीजों को दी जाने वाली टेल्मिसेव-40 यानी टेल्मिसार्टन टैबलेट्स IP-40mg के एक बैच को सरकारी विश्लेषक ने जांच में 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' यानी घटिया गुणवत्ता का करार दिया है।

यह खुलासा होते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया और इस दवा की बिक्री एवं वितरण को तुरंत रोकने का आदेश जारी कर दिया। साथ ही जितना भी स्टॉक बाजार और वार्डों में पहुंच चुका था, उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए। गौर करने वाली बात यह है कि इससे कुछ ही दिन पहले इसी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल में पैरासिटामोल की गुणवत्ता को लेकर भी ऐसी ही कार्रवाई हो चुकी है, जिसके बाद अब टेल्मिसार्टन पर लगी रोक से चर्चा और तेज हो गई है।

मेयो के मेडिकल स्टोर से जारी पत्र में जिस बैच का जिक्र है, उसका बैच नंबर CHPLT416 है। इसकी निर्माण तिथि जुलाई 2025 और समाप्ति तिथि जून 2027 दर्ज है। यह दवा इंदौर, मध्य प्रदेश स्थित क्यूरेजा हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड ने बनाई है। पत्र के साथ खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए की जांच रिपोर्ट भी लगाई गई है। यह टैबलेट ब्लड प्रेशर के मरीजों को दी जाती है और कई मरीज इसे रोजाना लेते हैं, इसलिए इस खबर ने मरीजों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है।

जांच में दवा के नमूने में दो बड़ी खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक 40 में से लगभग सभी टैबलेट्स पर सामान्य रोशनी में देखने पर असमान हल्के भूरे रंग के धब्बे नजर आए। इसके अलावा नमूना डिसॉल्यूशन टेस्ट यानी घुलनशीलता की जांच में भी तय मानकों पर खरा नहीं उतरा। इन्हीं दो वजहों से इस बैच को मानक गुणवत्ता का नहीं माना गया।

इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित उत्पाद की बिक्री और वितरण रोकने के साथ-साथ जो स्टॉक पहले ही बांटा जा चुका था, उसे तुरंत वापस लेने का आदेश दिया। संबंधित पक्ष यानी सप्लायर से इस दवा की खरीद, वितरण और बिक्री से जुड़े सारे दस्तावेज प्रमाणित प्रतियों के साथ मांगे गए हैं। पत्र में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के जरूरी प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है। पत्र जारी होते ही वार्डों और अस्पताल की औषधालय से यह दवा वापस ली जाने लगी है।

पैरासिटामोल के बाद अब टेल्मिसार्टन के बैच पर रोक लगने से सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता जांच और सप्लाई व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मरीजों और उनके परिजनों में यह चिंता जायज है कि जो दवाई वे रोज ले रहे हैं, उसकी जांच पहले से क्यों नहीं हो पाई।

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