मारुती सुझुकी की इन-प्लांट रेलवे साइडिंग से 10 लाख गाड़ियों की डिलीवरी पूरी
मारुती सुझुकी ने अपनी गाड़ियों की ढुलाई में रेलवे का इस्तेमाल बढ़ाते हुए एक और बड़ा पड़ाव पार कर लिया है। गुजरात के हंसलपुर और हरियाणा के मानेसर प्लांट में बनाई गई इन-प्लांट रेलवे साइडिंग से कंपनी ने मिलाकर 10 लाख से ज्यादा गाड़ियां भेजी हैं। इनमें से हंसलपुर प्लांट से करीब 7.9 लाख और मानेसर से करीब 2.1 लाख गाड़ियां सीधे डिस्पैच हुई हैं।
हंसलपुर की रेलवे साइडिंग मार्च 2023 में शुरू हुई थी, जबकि मानेसर वाली सुविधा जून 2025 में चालू हुई। इन दोनों जगहों से 10 लाख गाड़ियों का यह आंकड़ा 3 साल 5 महीने में पूरा हुआ है। खास बात यह है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 31 अगस्त तक इन्हीं दोनों साइडिंग से 3 लाख से ज्यादा गाड़ियां भेजी जा चुकी हैं। कंपनी के कुल रेलवे डिस्पैच में इन दोनों सुविधाओं की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है।
पिछले एक दशक में मारुती सुझुकी की लॉजिस्टिक्स में रेलवे की अहमियत काफी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2014-15 में कंपनी की कुल गाड़ी ढुलाई का सिर्फ 5 प्रतिशत हिस्सा रेलवे से होता था। यह हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 26.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। अब कंपनी ने वित्त वर्ष 2030-31 तक रेलवे के जरिए 35 प्रतिशत गाड़ियां भेजने का लक्ष्य रखा है।
रेलवे का इस्तेमाल बढ़ने से फैक्ट्री में तैयार गाड़ियों को बाहर के लोडिंग टर्मिनल तक ट्रक से ले जाने की जरूरत कम हो जाती है। इससे ट्रकों की आवाजाही, ईंधन की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है। वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक मारुती सुझुकी ने रेलवे के जरिए कुल मिलाकर 33 लाख से ज्यादा गाड़ियां भेजी हैं, जिनमें से 10 लाख गाड़ियां सीधे इन-प्लांट साइडिंग से रवाना हुई हैं।
यह रेलवे साइडिंग पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है। मारुती सुझुकी ने अब हरियाणा के खरखौदा प्लांट के लिए भी अपनी अलग इन-प्लांट रेलवे साइडिंग बनाने की योजना बनाई है। इससे आगे चलकर कंपनी की गाड़ी डिस्पैच में रेलवे का हिस्सा और बढ़ने की संभावना है।