शनिवार, 19 सितमबर 2026

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19:25 IST

महाराष्ट्र में 403 चिकित्सा अधिकारियों की सैलरी 6 महीने से अटकी, नागपुर के डागा अस्पताल में डॉक्टर आंदोलन पर

नागपुर के डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल के 7 जूनियर डॉक्टर विद्यावेतन न मिलने से कामबंद आंदोलन पर हैं, जबकि राज्य के 403 सेवांतर्गत चिकित्सा अधिकारियों की सैलरी भी महीनों से लंबित है।

महाराष्ट्र में 403 चिकित्सा अधिकारियों की सैलरी 6 महीने से अटकी, नागपुर के डागा अस्पताल में डॉक्टर आंदोलन पर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

त्योहारों का सीजन है, घर-घर में तैयारियां चल रही हैं, लेकिन महाराष्ट्र के सैकड़ों डॉक्टरों के परिवार पैसों की टेंशन में हैं। राज्य के 403 सेवांतर्गत चिकित्सा अधिकारियों को पिछले 6 महीने से सैलरी नहीं मिली है, ऐसा दावा चिकित्सा अधिकारी संगठन ने किया है। उधर नागपुर के डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल में तो 7 जूनियर निवासी डॉक्टर भी 7 महीने से विद्यावेतन न मिलने के विरोध में कामबंद आंदोलन पर बैठे हैं।

महाराष्ट्र राज्य राजपत्रित वैद्यकीय अधिकारी गट-अ संगठन का कहना है कि NEET PG-2025 के तहत ये 403 सेवांतर्गत चिकित्सा अधिकारी पदव्युत्तर पढ़ाई के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए हैं। इनमें NEET-PG, NEET-DNB और AIA-PGET के जरिए ट्रेनिंग ले रहे अधिकारी शामिल हैं। संगठन के मुताबिक प्रतिनियुक्ति के बाद अधिसंख्य पदों के निर्माण का प्रस्ताव करीब चार महीने से प्रशासनिक मंजूरी के इंतजार में अटका पड़ा है, और यही वजह है कि इन डॉक्टरों की सैलरी में देरी हो रही है।

सैलरी न मिलने से डॉक्टरों के लिए घर का बजट संभालना मुश्किल हो गया है। बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस, होम लोन की EMI, घर का किराया, राशन और रोज के खर्चे तो चलते ही रहते हैं, ऊपर से त्योहारों के एक्स्ट्रा खर्चे ने प्रेशर और बढ़ा दिया है। संगठन के मुताबिक कुछ डॉक्टरों की लोन की किस्तें भी पेंडिंग हो गई हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सभी डॉक्टर अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं और साथ ही अस्पतालों में मरीजों की सेवा भी कर रहे हैं।

नागपुर के डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल में भी विद्यावेतन का यही मामला सामने आया है। यहां बालरोग और स्त्रीरोग एवं प्रसूति विभाग में पीजी कोर्स चलते हैं, और इन्हीं दो विभागों के 7 जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि फरवरी से सेवाएं देने के बावजूद अब तक उनके खाते में विद्यावेतन नहीं आया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने अस्पताल प्रशासन के सीनियर अफसरों से कई बार बात की है, लेकिन उनका आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने वरिष्ठ कार्यालय को टाइम पर हाजिरी पत्रक ही नहीं भेजा, जिसकी वजह से विद्यावेतन अटका पड़ा है।

विद्यावेतन की मांग को लेकर ये 7 जूनियर डॉक्टर 31 अगस्त से कामबंद आंदोलन पर हैं। इतने लंबे समय से आंदोलन चलने के कारण प्रसूति, सर्जरी और नवजात शिशु विभाग की रेगुलर व्यवस्था पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ने की बात सामने आई है, जिससे मरीजों की सेवा पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है। फिलहाल दोनों ही मामलों में प्रशासन की तरफ से लंबित सैलरी और विद्यावेतन का भुगतान कब तक होता है, इस पर डॉक्टरों और उनके परिवारों की नजर टिकी हुई है।

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