IIT मुंबई में छात्र की आत्महत्या, अभिजीत दीपके ने सरकार से पूछा-अब कितनी जानें जाएंगी
एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक छात्र की मौत के बाद कैंपस में 400 से ज्यादा छात्रों ने आंदोलन किया, कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने सरकार पर सवाल उठाए।
मुंबई के नामी आयआयटी मुंबई कैंपस में एक छात्र की आत्महत्या से पूरे कैंपस में हड़कंप मच गया है। एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक की पढ़ाई कर रहे इस दूसरे साल के छात्र ने 18 सितंबर को हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।
इस घटना के बाद आयआयटी मुंबई कैंपस में छात्रों ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन में 400 से ज्यादा छात्र शामिल हुए। आंदोलन की वजह से चल रही मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं भी स्थगित करनी पड़ीं।
इस पूरे मामले की एक पृष्ठभूमि भी है, जिसकी अब खूब चर्चा हो रही है। आयआयटी मुंबई प्रशासन के मुताबिक, परीक्षा के दौरान यह छात्र मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़ा गया था। संस्थान का कहना है कि उसने परीक्षा का प्रश्नपत्र चैटजीपीटी पर अपलोड करके उससे जवाब निकालने की कोशिश की थी। हालांकि आयआयटी मुंबई का दावा है कि इस मामले में छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
संस्थान के मुताबिक विभाग के हेड और संबंधित प्रोफेसरों ने छात्र से बात करके उसकी काउंसलिंग की थी। साथ ही उसे यह भी भरोसा दिलाया गया था कि इस घटना का उसके करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में चला गया था और कुछ देर बाद वह मृत पाया गया। इस पूरे मामले में आखिर क्या हुआ, इसकी जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
इस मामले पर कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने सरकार से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों से लेकर मुंबई जैसे बड़े शहर तक, छात्रों की जिंदगी का सवाल गंभीर होता जा रहा है और यह संकट भौगोलिक सीमाओं से परे है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार छात्रों की जिंदगी को प्राथमिकता देगी या नहीं, और अभी और कितने छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी।
छात्र की मौत की खबर सामने आते ही कैंपस में छात्रों में गुस्सा देखने को मिला। 400 से ज्यादा छात्रों ने आंदोलन करते हुए प्रशासन के सामने अपनी अलग-अलग मांगें रखीं। इसी आंदोलन के चलते चल रही मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं रोकनी पड़ीं।
वहीं इस पूरे मामले में आयआयटी प्रशासन के रुख और छात्रों के लगाए गए आरोपों में फर्क भी सामने आया है। ऐसे में इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच होकर असली सच्चाई सामने आना जरूरी माना जा रहा है।