होर्मुझ तनाव के बावजूद भारत में एलपीजी सिलिंडर की कमी नहीं, जानिए वजह
होर्मुझ की खाड़ी में तनाव के बावजूद भारत में एलपीजी सिलिंडर की कमी की आशंका फिलहाल टली, घरेलू उत्पादन और मांग में गिरावट से राहत।
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होर्मुझ की खाड़ी में बने तनाव की वजह से दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ने का डर पैदा हो गया था। जंग शुरू होते ही भारत में भी एलपीजी सिलिंडर की किल्लत होने की चिंता बढ़ गई थी। कई शहरों से लेकर गांवों तक गैस एजेंसी और गोदामों के बाहर सिलिंडर के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती दिखी थीं। मगर मौजूदा हालात देखें तो भारत ने एलपीजी सप्लाई के लिए दूसरे रास्ते और देश के अंदर के उत्पादन पर जोर देना शुरू कर दिया है।
जंग से पहले भारत की करीब 90 फीसदी एलपीजी इंपोर्ट होर्मुझ की खाड़ी वाले रास्ते से ही होती थी। लेकिन अब स्थिति काफी बदल चुकी है। अमेरिका समेत कई और देशों से भारत को एलपीजी मिल रही है, जिससे होर्मुझ की खाड़ी पर भारत की पहले जैसी निर्भरता नहीं रही। इस रास्ते से कुछ हद तक सप्लाई अभी भी जारी है, मगर इसे पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा रहा। अगर यह जलमार्ग लगातार एक हफ्ते तक बंद रहा तो सप्लाई पर दबाव आ सकता है, इसीलिए भारत का ध्यान दूसरे इंपोर्ट सोर्स और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर है।
भारत फिलहाल रोजाना करीब 37,000 से 38,000 मेट्रिक टन एलपीजी बनाता है। देश की रिफाइनरियों से होने वाले उत्पादन को करीब 4,000 मेट्रिक टन और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यानी घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन में 10 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। देश में एलपीजी का स्टॉक भी फिलहाल ठीक-ठाक बताया जा रहा है, इसलिए तुरंत बड़ी किल्लत होने के आसार कम हैं। फिर भी जंग जैसे हालात और इंटरनेशनल सप्लाई में बनी अनिश्चितता को देखते हुए स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।
एलपीजी इंपोर्ट पर दबाव कम होने की एक और वजह मांग में आई भारी गिरावट है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में देश में एलपीजी का इस्तेमाल पिछले साल के मुकाबले 17 फीसदी कम हुआ। घरों, कमर्शियल ग्राहकों और उद्योगों में एलपीजी का यूज घटा है। इंडस्ट्रियल होलसेल एलपीजी की खपत में तो जुलाई में करीब 80 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी। कुछ ग्राहक पाइप्ड नैचुरल गैस, डीजल या लकड़ी जैसे दूसरे विकल्पों की तरफ भी शिफ्ट हुए बताए जा रहे हैं।
ईरान से जुड़ी जंग शुरू होने के बाद भारत की एलपीजी इंपोर्ट भी घटी है। अगस्त में एलपीजी इंपोर्ट करीब 25 फीसदी घटकर 14.5 लाख टन रह गई। फिर भी आंकड़ों के मुताबिक यह इस दौर की सबसे ज्यादा मासिक इंपोर्ट रही। दुनियाभर में भी एलपीजी सप्लाई घटी है। अगस्त में ग्लोबल समुद्री एलपीजी एक्सपोर्ट फरवरी 2026 के मुकाबले करीब 6 लाख मेट्रिक टन कम रहा, वहीं पिछले साल के मुकाबले यह करीब 12.5 लाख मेट्रिक टन कम था।
होर्मुझ की खाड़ी में संघर्ष की वजह से एलपीजी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है, लेकिन भारत ने दूसरे देशों से इंपोर्ट, घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी और मांग में आई गिरावट के दम पर हालात को काफी हद तक काबू में रखा है। इसलिए फिलहाल आम ग्राहकों को घबराकर सिलिंडर का ज्यादा स्टॉक जमा करने की जरूरत नहीं दिख रही। हालांकि आगे होर्मुझ की स्थिति और ग्लोबल एलपीजी सप्लाई पर नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा।
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