होर्मुझ, बाब अल-मंदेब और सऊदी पाइपलाइन ठप, 36 साल में सबसे बड़ा तेल संकट, भारत पर असर की आशंका
तेल सप्लाई के तीन बड़े रास्ते एक साथ बंद होने से दुनिया भर में तेल संकट गहरा गया है, भारत जैसे बड़े आयातक देश पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।
दुनिया में सबसे ज्यादा तेल इंपोर्ट करने वाले देशों में भारत का नाम शुरू से रहा है। रूस को छोड़ दें तो कच्चे तेल की ज्यादातर जरूरत भारत आखाती देशों से पूरी करता है। मगर आखात में जो अशांति चल रही है, उसका सीधा असर सप्लाई पर लगातार पड़ रहा है। फरवरी से ही इरान और अमेरिका के बीच जंग की वजह से होर्मुझ की खाड़ी बंद पड़ी है, जो तेल सप्लाई के लिए समुद्री रास्तों में से एक अहम रास्ता मानी जाती है। इस वजह से इस रूट पर आवाजाही पूरी तरह गड़बड़ा गई है। अब इसके अलावा बाकी रास्ते भी ठप हो गए हैं, जिससे भारत समेत कई और देशों पर भी इसका बड़ा असर पड़ने के आसार हैं।
होर्मुझ की खाड़ी दुनिया में तेल सप्लाई के मुख्य रास्तों में गिनी जाती है। दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से जाता है। इसी बीच हुथी बागी अपने तेज हमलों के दम पर बाब अल-मंदेब नाम के एक और अहम तेल रूट पर कब्जा करने के बिल्कुल करीब पहुंच गए हैं।
इन दोनों रास्तों पर काफी समय से तनाव बना हुआ है। अब सऊदी अरब ने भी एक और अहम सप्लाई सिस्टम बंद कर दिया है। रॉयटर्स की जानकारी के मुताबिक सऊदी अरब की पूरब-पश्चिम पाइपलाइन पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों की वजह से देश का मुख्य वैकल्पिक तेल रास्ता भी बंद हो गया है। तीन बड़े तेल रास्तों का एक साथ बंद होना पूरी दुनिया के लिए चिंता की बात है।
सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में गिना जाता है। यह समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइन से दुनिया भर के कई देशों को तेल भेजता है। रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब की मुख्य पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और यह होर्मुझ की खाड़ी पर निर्भर हुए बगैर अरब प्रायद्वीप से रोजाना करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। यह मात्रा दुनिया भर की तेल सप्लाई का करीब 4 से 5 फीसदी बैठती है। अगर यह पाइपलाइन भी बंद हुई तो तेल संकट और गंभीर हो सकता है।
11 सितंबर को ब्रिटेन ने ओपेक को जो ताजा आंकड़े सौंपे, उनके मुताबिक महीने दर महीने उत्पादन में रोजाना करीब 19 लाख बैरल की बड़ी गिरावट दिखी है। रिपोर्ट के अनुसार तेल उत्पादन में आई इस अचानक गिरावट से जून में उत्पादन में आई थोड़े वक्त की तेजी भी खत्म हो गई है। उस दौर में तेल उत्पादन रोजाना 71 लाख बैरल दर्ज हुआ था।
रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब में तेल उत्पादन 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो दुनिया भर में बढ़ते तनाव का इशारा दे रहा है। सप्लाई संकट की वजह से तेल के दाम भी काफी बढ़ गए हैं और लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने हुए हैं। इसका असर भारत समेत दुनिया भर के दूसरे देशों पर बड़े पैमाने पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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