रविवार, 20 सितमबर 2026

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14:44 IST

बैंक बदलने पर भी FASTag रहेगा वही, वनटैग से नहीं लेना पड़ेगा नया टैग

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वनटैग फीचर शुरू किया, जिससे बैंक बदलने पर भी पुराना FASTag चलेगा।

बैंक बदलने पर भी FASTag रहेगा वही, वनटैग से नहीं लेना पड़ेगा नया टैग
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

फास्टैग यूज करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। जिन लोगों को अपने फास्टैग की बैंक बदलनी है, उनको अब नया टैग खरीदने या पुराना टैग बंद करवाने की झंझट नहीं करनी पड़ेगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वनटैग नाम का एक नया फीचर शुरू किया है। इससे गाड़ी मालिक अपना वही फास्टैग रखते हुए उसकी बैंक बदल सकते हैं। लेकिन बैंक बदलने के बाद पुराने फास्टैग वॉलेट में पड़े पैसों का क्या होगा, और क्या दोबारा केवाईसी करानी पड़ेगी, ये सारी बातें जान लेते हैं।

वनटैग एनएचएआई के राजमार्गयात्रा मोबाइल ऐप में मिलता है। इसी ऐप के जरिए फास्टैग की बैंक बदलने का पूरा काम हो जाता है। सबसे पहले ऐप में लॉगिन करके गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर डालना होता है। इसके बाद ऐप बता देगा कि गाड़ी वनटैग के लिए योग्य है या नहीं। अगर बैंक बदली जा सकती है, तो आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिसमें पहचान वेरिफाई करना, सहमति देना और नई बैंक चुनना जैसे स्टेप शामिल हैं।

नई बैंक में दोबारा केवाईसी करानी पड़ेगी या नहीं, इसका जवाब है हां। बैंक बदलने पर नई केवाईसी प्रोसेस पूरी करनी होगी। केवाईसी में बैंक आपकी पहचान और बाकी जानकारी की जांच करती है। इसके लिए पहले मौजूदा बैंक से छह अंकों का मोबाइल वेरिफिकेशन कोड यानी MVC लिया जाता है, जिससे पहचान की पुष्टि होती है। इसके बाद नई बैंक चुननी होती है, और वो बैंक आपकी केवाईसी और वॉलेट एक्टिवेशन का काम पूरा करती है। ये सब हो जाने के बाद फास्टैग नई बैंक के साथ काम करने लगता है।

पुराने फास्टैग वॉलेट में पड़े पैसों की बात करें तो बैंक बदलने के बाद पुराना वॉलेट बंद कर दिया जाता है। पुरानी बैंक में जो भी बकाया रकम है, वो जरूरी हिसाब-किताब और कटौती के बाद वापस कर दी जाती है। यानी बैंक बदलने पर पुराने वॉलेट की रकम के लिए भी यही तरीका अपनाया जाता है। पैसे लौटाने से पहले पुरानी बैंक जरूरी वेरिफिकेशन और हिसाब पूरा करती है।

क्या नया फास्टैग खरीदना पड़ेगा, इसका जवाब है नहीं। वनटैग की खासियत यही है कि बैंक बदलने के बाद भी गाड़ी से जुड़ी फास्टैग आईडी वही रहती है। इसलिए विंडस्क्रीन पर पहले से लगा हुआ टैग ही चलता रहेगा। एक बात ध्यान रखनी है कि एक बार बैंक बदलने के बाद, फास्टैग को दूसरी बैंक में ट्रांसफर करने से पहले छह महीने का इंतजार करना पड़ेगा। इसे कूलिंग पीरियड कहा जाता है।

वनटैग असल में एक ऐसा फीचर है जो फास्टैग यूजर्स को नया फास्टैग खरीदे बिना, जरूरत पड़ने पर बैंक बदलने की सुविधा देता है। इसका मकसद बैंक बदलने का काम आसान बनाना और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प देना है।

फास्टैग एक छोटा सा टैग होता है जो गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। इसमें RFID तकनीक होती है, जो टोल प्लाजा पर गाड़ी की पहचान करने में मदद करती है। जब गाड़ी टोल प्लाजा से गुजरती है, तो जुड़े हुए खाते से टोल की रकम अपने आप कट जाती है, जिससे बार-बार कैश देने की जरूरत नहीं पड़ती। फास्टैग से टोल प्लाजा पर रुकने का समय कम होता है, ट्रैफिक जाम कम करने में मदद मिलती है, और टोल भरने की जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकती है। भारत में 1 जनवरी 2021 से माल या सवारी ढोने वाली सभी चार पहिया और उससे बड़ी गाड़ियों के साथ-साथ M और N कैटेगरी की गाड़ियों के लिए फास्टैग अनिवार्य है।

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