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19:39 IST

PepsiCo इंडिया के pep+ अभियान से देशभर के 36000 किसानों को फायदा

कंपनी ने पानी बचाने, खेती सुधारने और पैकेजिंग बदलने पर 2025 की ESG रिपोर्ट जारी की।

PepsiCo इंडिया के pep+ अभियान से देशभर के 36000 किसानों को फायदा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

PepsiCo ने अपनी 2025 की ESG परफॉर्मेंस अपडेट रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कंपनी ने अपने 'pep+' यानी पेप्सिको पॉजिटिव अभियान के तहत हुई प्रगति के आंकड़े दिए हैं। दुनियाभर में कंपनी ने 60 से ज्यादा देशों में 4.7 मिलियन एकड़ जमीन पर पुनरुत्पादक और संरक्षक खेती के तरीके अपनाए हैं। पानी की ज्यादा किल्लत वाले इलाकों में कंपनी की अपनी फैक्ट्रियों में 100 प्रतिशत पानी वापस भर दिया गया है, और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले नए प्लास्टिक की मात्रा 6 प्रतिशत घटाई गई है।

भारत की बात करें तो कंपनी इन सारे लक्ष्यों पर लगातार अच्छा काम कर रही है। PepsiCo के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर जिम एंड्रयू ने कहा कि pep+ से उनके पूरे बिजनेस में बदलाव आ रहा है और इसी वजह से उनकी टीम उत्साहित है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने पुनरुत्पादक और संरक्षक खेती के तरीके 47 लाख एकड़ तक फैला दिए हैं, अपने कामकाज से होने वाला उत्सर्जन घटाया है, और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में भी बदलाव किए हैं ताकि ग्राहकों को ज्यादा ऑप्शन मिलें। उनका कहना है कि यह सब इस तरह किया जा रहा है कि आगे चलकर कंपनी का बिजनेस और मजबूत हो, हालांकि अभी काफी काम बाकी है।

भारत में यह वैश्विक लक्ष्य किसानों, प्राकृतिक संसाधनों, प्रोडक्शन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और ग्राहकों तक, यानी पूरी फूड वैल्यू चेन में जमीन पर उतारे जा रहे हैं। PepsiCo इंडिया के मुताबिक, कंपनी देश के 14 राज्यों में करीब 36,000 किसानों से जुड़ी हुई है और अपनी चिप्स के लिए जो बटाटे चाहिए, वो 100 प्रतिशत देश के अंदर ही स्थानीय स्तर पर खरीदती है।

PepsiCo इंडिया और साउथ एशिया की चीफ कॉरपोरेट अफेयर्स ऑफिसर और सस्टेनेबिलिटी हेड यशिका सिंग ने कहा कि भारत में कंपनी की ग्रोथ आसपास के पूरे इकोसिस्टम की मजबूती से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों से लेकर समुदायों, प्राकृतिक संसाधनों और ग्राहकों तक, वैल्यू चेन का हर हिस्सा आपस में जुड़ा हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि जब किसानों को मजबूत बनाया जाता है तो सप्लाई चेन मजबूत होती है, पानी और संसाधनों का सही इस्तेमाल होने से कामकाज में लचीलापन आता है, और पोर्टफोलियो बदलने से ग्राहकों की बदलती पसंद का जवाब मिलता है।

पिछले कुछ सालों में कंपनी ने स्टार्ट-अप्स के साथ मिलकर डिजिटल तकनीक को किसानों तक तेजी से पहुंचाया है। 'मिट्टी दीदी' जैसी पहल से हजारों किसानों को मिट्टी की सेहत की जांच और रियल-टाइम जानकारी मिलती है, वहीं 'क्रॉपिन' के साथ मिलकर बनाए गए 'लेज स्मार्ट फार्म्स' प्रोग्राम से खेती की पैदावार और संसाधनों का सही इस्तेमाल बेहतर हो रहा है। स्मार्ट फार्म्स प्रोग्राम अभी 18,000 एकड़ से ज्यादा जमीन कवर करता है और 7,000 से ज्यादा किसानों को जानकारी देता है। बटाटे के प्रमुख इलाकों में माइक्रो-इरिगेशन का इस्तेमाल 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश की 2,300 एकड़ से ज्यादा जमीन भी शामिल है।

पानी को लेकर भी कंपनी ने काफी काम किया है। पानी की भारी किल्लत वाली फैक्ट्रियों में इस्तेमाल हुए पानी का 100 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा वापस लोकल जलस्रोतों में लौटाया जाता है। पुणे की फैक्ट्री इसका बड़ा उदाहरण है, जहां पानी का इस्तेमाल 90 प्रतिशत से ज्यादा घटाया गया है। दुनियाभर में 2010 से अब तक कंपनी ने 23 अरब लीटर पानी वापस लौटाया है और करीब 9.7 करोड़ लोगों तक साफ पानी पहुंचाया है।

कंपनी भारत में भी पैकेजिंग को ज्यादा चक्रीय और संसाधन-बचत वाली बनाने की दिशा में काम कर रही है। फूड और बेवरेज, दोनों बिजनेस में लोकल एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी नियमों का पालन किया जा रहा है। फूड पैकेजिंग में मोनो-मटेरियल और पॉलिओलेफिन आधारित पैकेजिंग अपनाई जा रही है, और बेवरेज के कुछ प्रोडक्ट्स की बोतलें 100 प्रतिशत rPET में बदली जा रही हैं। इसके अलावा PepsiCo इंडिया के फ्यूल मिक्स में बायोमास का हिस्सा 97 प्रतिशत है, जिससे कंपनी कम कार्बन वाले कामकाज की तरफ बढ़ रही है।

क्लीन ट्रांसपोर्ट के मामले में PepsiCo इंडिया ने कल्याणी पावरट्रेन लिमिटेड और वायुदूत रोड कैरियर्स के साथ मिलकर कोसी-पटौदी EV ग्रीन कॉरिडोर बनाया है। इस कॉरिडोर पर फिलहाल 13 बत्तीस-फुटी इलेक्ट्रिक कंटेनर ट्रक चल रहे हैं, जिनसे हर साल करीब 6 लाख इलेक्ट्रिक किलोमीटर की ढुलाई हो रही है। कंपनी ने देशभर में डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े 800 से ज्यादा वाहनों को भी अपडेट कर दिया है ताकि लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क में सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा मिले।

ग्राहकों की बदलती पसंद के हिसाब से कंपनी अपना पोर्टफोलियो भी बदल रही है। भारत में PepsiCo के बेवरेज पोर्टफोलियो में 50 प्रतिशत से ज्यादा ड्रिंक्स अब कम या जीरो शुगर वाली हैं। स्नैक्स के मामले में कंपनी 40 प्रतिशत कम फैट वाले 'रेड रॉक डेली' के बेक्ड वर्जन और भारत की खेती विरासत को दर्शाने वाले बाजरा आधारित 'कुरकुरे ज्वारी पफ्स' जैसे प्रोडक्ट ला रही है, ताकि ग्राहकों को उनके स्वाद और लाइफस्टाइल के हिसाब से ज्यादा विकल्प मिल सकें। कंपनी का कहना है कि ये सारे कदम मिलकर भारत में एक ऐसा पॉजिटिव सर्कल बनाना चाहते हैं जहां मजबूत इकोसिस्टम मजबूत बिजनेस को सहारा दे और किसानों, समुदाय, ग्राहकों व पर्यावरण के लिए लंबे समय तक फायदा हो।

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