रविवार, 20 सितमबर 2026

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01:27 IST

बोईसर में नए रेलवे गुड्स यार्ड के लिए वनभूमि हस्तांतरण को केंद्र की अंतिम मंजूरी

तारापूर एमआईडीसी की मालढुलाई और विरार-डहाणू रेलवे लाइन के चौपदरीकरण को देखते हुए बोईसर के नए गुड्स यार्ड की राह अब साफ हो गई है।

बोईसर में नए रेलवे गुड्स यार्ड के लिए वनभूमि हस्तांतरण को केंद्र की अंतिम मंजूरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बोईसर में प्रस्तावित नए रेलवे गुड्स यार्ड के काम को अब और रफ्तार मिलने वाली है। तारापूर इंडस्ट्रियल एस्टेट से बढ़ती मालढुलाई और विरार-डहाणू रेलवे लाइन के चौपदरीकरण को देखते हुए यह यार्ड काफी अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बोईसर-काटकर पाडा इलाके में रेलवे यार्ड के लिए जरूरी 4.985 हेक्टर वनभूमि के हस्तांतरण को अंतिम मंजूरी दे दी है।

यह वनभूमि अब मुंबई रेलवे विकास महामंडल के नाम ट्रांसफर की जाएगी। वनभूमि का मसला सुलझने से प्रोजेक्ट के रास्ते में आ रही एक बड़ी अड़चन दूर हो गई है। नए यार्ड का निर्माण कार्य पहले से ही चल रहा है, और वनभूमि के अलावा इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 7.7 हेक्टर गैर-वन व निजी जमीन का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

तारापूर एमआईडीसी में स्टील, केमिकल, कपड़ा और दूसरे उद्योगों से होने वाली भारी मालढुलाई के लिए यह यार्ड बहुत जरूरी बताया जा रहा है। फिलहाल बोईसर पश्चिम का गुड्स यार्ड विरार-डहाणू मार्ग की तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के काम में रुकावट बन रहा है, इसलिए इसे काटकर पाडा इलाके की नई जगह पर शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है। मौजूदा गुड्स यार्ड हटने के बाद विरार-डहाणू लाइन पर दो अतिरिक्त पटरियां बिछाने का काम भी आसान हो जाएगा। इससे आगे चलकर लोकल और मालगाड़ी सेवाओं की क्षमता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

नया यार्ड शुरू होने के बाद तारापूर एमआईडीसी से आने वाली भारी मालढुलाई को तय रास्ते से सीधे यार्ड की ओर मोड़ा जाएगा। इससे बिरसा मुंडा चौक और बोईसर-पालघर रोड पर भारी वाहनों का दबाव कम होने में मदद मिल सकती है। चित्रालय इलाके में बनने वाले इस नए यार्ड से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को भी कुछ हद तक राहत मिलने की संभावना है।

तारापूर एमआईडीसी के साथ साथ प्रस्तावित वाढवण पोर्ट को देखते हुए भी बोईसर में बड़ी क्षमता का आधुनिक गुड्स यार्ड बनाना जरूरी समझा जा रहा है। रेलवे के जरिए औद्योगिक माल की ढुलाई बढ़ने से सड़कों पर भारी वाहनों का बोझ भी कम हो सकता है। वनभूमि हस्तांतरण के बदले पालघर जिले में करीब 10 हेक्टर इलाके में पूरक वृक्षारोपण किया जाएगा, यानी प्रोजेक्ट के लिए वनभूमि के इस्तेमाल की एवज में पर्यावरण भरपाई की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

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