गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:35 IST

विरार के कोपरी में गणेश विसर्जन को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों में टकराव, तनाव का माहौल

विरार के कोपरी तालाब में गणेशमूर्ति विसर्जन पर प्रशासन की रोक के बाद ग्रामीणों ने गेट तोड़कर विसर्जन किया, इलाके में पुलिस बंदोबस्त तैनात।

विरार के कोपरी में गणेश विसर्जन को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों में टकराव, तनाव का माहौल
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

विरार के कोपरी इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने गणेशोत्सव के उत्साह पर असर डाला। गणेशमूर्ति के विसर्जन को लेकर ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने आ गए, और इस विवाद की वजह से इलाके में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया। कोपरी तालाब में गणेशमूर्ति विसर्जन करने को महानगरपालिका प्रशासन और विरार पुलिस ने रोका, लेकिन यह रोक ग्रामीणों को मंजूर नहीं थी, जिसके बाद उन्होंने आक्रामक रुख अपना लिया।

ग्रामीणों का कहना है कि कोपरी इलाके के इस तालाब में पिछले कई सालों से पारंपरिक तरीके से गणेशमूर्तियों का विसर्जन होता आया है। स्थानिक लोगों के लिए यह सिर्फ विसर्जन की जगह नहीं बल्कि उनकी धार्मिक और सामाजिक परंपरा का हिस्सा है। लेकिन इस बार प्रशासन ने तालाब में विसर्जन पर रोक लगाई और मनाही के बाद तालाब का गेट बंद कर दिया, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई।

गेट बंद किए जाने के बाद ग्रामीणों ने आक्रामक भूमिका अपनाते हुए प्रशासन द्वारा बंद किया गया गेट तोड़ दिया और उसके बाद गणेशमूर्तियों का विसर्जन किया गया। इस घटना से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच का टकराव और गहरा गया। एक तरफ प्रशासन पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित और तय जगहों पर ही विसर्जन करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों का सवाल है कि सालों से चली आ रही परंपरागत विसर्जन पद्धति अचानक क्यों बंद की गई।

इस पूरे मामले के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल पूछे। उनका कहना था, "हम अपनी सालों पुरानी परंपरा के मुताबिक गणेश विसर्जन करते हैं, फिर इस बार अचानक विरोध क्यों?" साथ ही ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाया कि हिंदुओं के त्योहारों पर ही पाबंदी क्यों लगाई जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि गणेशोत्सव आस्था और भावना का विषय है, इसलिए प्रशासन को स्थानिक लोगों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए फैसला लेना चाहिए।

वहीं प्रशासन पर्यावरण के अनुकूल गणेशोत्सव मनाने की अपील कर रहा है। तालाब, नदी या किसी भी प्राकृतिक जलस्रोत में बड़ी मात्रा में मूर्तियों का विसर्जन करने से जल प्रदूषण होने का खतरा रहता है, इसलिए प्रशासन कृत्रिम तालाब या अधिकृत विसर्जन केंद्रों के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। इन्हीं पर्यावरणीय वजहों का हवाला देते हुए कोपरी तालाब में विसर्जन का विरोध किया गया, ऐसा बताया जा रहा है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही विरार पुलिस ने स्थिति पर नजर रखी। गणेश विसर्जन के मौके पर कोई अनुचित घटना न हो और कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो, इसके लिए पुलिस का बंदोबस्त तैनात किया गया। लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा बना रहने से प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

ग्रामीणों की मुख्य मांग यह है कि प्रशासन उनकी धार्मिक भावनाओं और सालों पुरानी परंपरा को ध्यान में रखे। अगर तालाब में विसर्जन को लेकर पर्यावरण से जुड़ी कोई दिक्कत है, तो प्रशासन को इसके लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, लेकिन अचानक पाबंदी लगाकर पारंपरिक विसर्जन को नहीं रोकना चाहिए। अब इस पूरे मामले में प्रशासन आगे क्या रुख अपनाता है, यह देखना अहम रहेगा।

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