गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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03:47 IST

वेदांता के नंद घर ने बच्चों-माताओं के लिए देशव्यापी पोषण अभियान शुरू किया, 18 राज्यों को फायदा

वेदांता की सामाजिक शाखा नंद घर ने राष्ट्रीय पोषण माह से पहले 18 राज्यों में बच्चों, माताओं और अंगणवाडी कार्यकर्ताओं को जोड़ने वाला महीनाभर का अभियान शुरू किया है।

वेदांता के नंद घर ने बच्चों-माताओं के लिए देशव्यापी पोषण अभियान शुरू किया, 18 राज्यों को फायदा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की शुरुआत से पहले नंद घर ने 'नंद घर का मिशन, संपूर्ण पोषण' नाम से एक नया अभियान शुरू किया है। नंद घर, अनिल अग्रवाल फाउंडेशन (AAF) की प्रमुख पहल है और वेदांता की सामाजिक जिम्मेदारी वाली शाखा के तौर पर काम करती है। यह अभियान भारत सरकार के पोषण अभियान 2.0 के तहत चल रहे उन प्रयासों को आगे बढ़ाएगा, जिनका मकसद पोषण को जन आंदोलन बनाना और सामूहिक कोशिशों से बेहतर नतीजे हासिल करना है।

यह राष्ट्रीय स्तर का अभियान एक महीने तक चलेगा और इसका मकसद पोषण के मुद्दे को सीधे समुदायों तक ले जाना है, ताकि परिवार, संस्थाएं और नागरिक इसे अपनी साझा जिम्मेदारी मानें। इस सोच को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए यह अभियान 18 राज्यों के 15,000 से ज्यादा नंद घरों से जुड़े बच्चों, माताओं, पिताओं, नंद घर दीदी यानी अंगणवाडी कार्यकर्ताओं और समुदायों को साथ लाएगा। इसका संदेश साफ है, असली पोषण सुरक्षा का मतलब सिर्फ पेट भर खाना नहीं है, बल्कि हर बच्चे के आसपास एक सेहतमंद माहौल बनाना है।

नंद घर आधुनिक और तकनीक से लैस केंद्रों के जरिए भारत की अंगणवाडी व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। इन केंद्रों में पोषण, बच्चों की शुरुआती देखभाल और शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और महिला सशक्तिकरण, ये सभी सेवाएं एक ही जगह मिलती हैं। इसके पीछे सोच यह है कि बच्चे की भलाई सिर्फ उसके खाने पर नहीं, बल्कि उसे और उसके परिवार को मिलने वाले ज्ञान, देखभाल और सहयोग पर भी टिकी है।

इसी समुदाय-केंद्रित सोच का एक बड़ा उदाहरण है नंद घर का 'मदर्स फूड प्रिपरेशन प्रोग्राम', जिसमें माताओं को स्थानीय स्तर पर मिलने वाली चीजों से नंद घर में ही पौष्टिक खाना बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे पोषण की इस मुहिम में सक्रिय भागीदार बनें। अब तक इस कार्यक्रम में करीब 2 लाख माताएं शामिल हो चुकी हैं और लगभग 15 लाख भोजन बनाने में सहयोग दिया जा चुका है।

वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि उनका हमेशा से मानना रहा है कि पोषण का मतलब है हर बच्चे को जिंदगी की सही शुरुआत देना। उनके मुताबिक अगर इसमें शिक्षा और संस्कार भी जुड़ जाएं, तो जिंदगी के पहले छह साल में ही एक सक्षम और उत्पादक जीवन की मजबूत नींव पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि आबादी में करीब 50 फीसदी महिलाएं हैं और जब महिलाएं सशक्त और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती हैं, तो इसका असर परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ता है। उन्होंने बताया कि आज 18 राज्यों के 15,000 से ज्यादा नंद घरों के जरिए 5 लाख से ज्यादा बच्चों और 4 लाख महिलाओं की जिंदगी पर इसका सकारात्मक असर दिख रहा है, और केंद्र-राज्य सरकारों तथा जुड़े समुदायों के सहयोग से इस मुहिम को भारत के हर कोने तक पहुंचाया जा सकता है।

अभियान के तहत कई उपक्रम चलाए जाएंगे। 'पोषण के लिए उगाओ' के तहत नंद घरों में बने किचन गार्डन के जरिए बच्चों और माताओं को स्थानीय खाद्य उत्पादन से जोड़ा जाएगा। 'पोषण के लिए पकाओ' में नंद घर के शेफ स्थानीय जरूरतों के मुताबिक पौष्टिक खाना बनाएंगे और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देंगे। 'पोषण के लिए पूरक आहार' के तहत बच्चों को ताजे फल और फोर्टिफाइड पोषण सप्लीमेंट दिए जाएंगे, इसमें बाजरा आधारित न्यूट्री बार और कुपोषण से लड़ने वाला प्रोजेक्ट बलवर्धन भी शामिल है। 'पोषण के लिए सीखो' के तहत खासकर किशोरी लड़कियों में एनीमिया और आयरन से जुड़ी जागरूकता बढ़ाई जाएगी। 'पापा का पोषण' नाम के उपक्रम में पिताओं और बेटियों को साथ लाया जाएगा, ताकि यह संदेश जाए कि बच्चे के पोषण की जिम्मेदारी पूरे परिवार की है। साथ ही लोगों और समुदायों को अपने पोषण संकल्प लेने और उनकी प्रगति ट्रैक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

नंद घर के सीईओ शशी अरोरा ने कहा कि पोषण नंद घर के दरवाजे पर खत्म नहीं होता, बल्कि हर मां, पिता और बच्चे के साथ उनके घर तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि 9वां राष्ट्रीय पोषण माह पोषण अभियान 2.0 के तहत सरकार की उस प्रतिबद्धता की याद दिलाता है, जिसमें पोषण को जन आंदोलन बनाना है। उन्होंने बताया कि करीब 2 लाख माताओं की सक्रिय भागीदारी से मदर्स फूड प्रिपरेशन प्रोग्राम पहले ही असर दिखा चुका है, और इस पोषण माह में खाना बनाने, शिक्षा और सामूहिक कोशिशों के जरिए परिवारों और समुदायों को इस सफर से जोड़ा जाएगा, ताकि बेहतर पोषण एक स्थायी आदत बन जाए।

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