सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर महाराष्ट्र सरकार सख्त, हाईवे किनारे अवैध ढाबे-निर्माण 60 दिन में तोड़े जाएंगे
नागपुर सहित राज्य में नेशनल हाईवे पर बढ़ते हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद नगर विकास विभाग ने सभी महानगरपालिकाओं, नगर परिषदों और नगर पंचायतों को कड़े निर्देश दिए हैं।
नागपुर में नेशनल हाईवे पर लगातार बढ़ रहे हादसों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है, जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग ने राज्य की सभी महानगरपालिकाओं, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक रिट याचिका पर कोर्ट ने जो आदेश दिया था, उसका पालन सख्ती से कराने के लिए राज्य सरकार ने नया जीआर निकाला है।
सरकार की अधिसूचना के मुताबिक 13 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्देश दिए थे और 22 जुलाई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जो बैठक हुई थी, उसी के तहत राज्य की सभी स्थानीय निकायों को इन नियमों का तुरंत और शत-प्रतिशत पालन करने का आदेश दिया गया है।
सरकार के इस निर्णय के अनुसार नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे के भीतर अब कोई भी नया ढाबा, खानपान की दुकान या व्यावसायिक संरचना बनाने और चलाने पर तत्काल रोक लगा दी गई है। अधिसूचना में नियंत्रण अधिनियम और 7 अगस्त 2025 के एसओपी का हवाला देते हुए जिलाधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया है कि वे 60 दिनों के भीतर सभी नए या पुराने अनधिकृत निर्माण गिरा दें।
हाईवे सुरक्षा क्षेत्र में आने वाली जगहों के लिए अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई या पीडब्ल्यूडी की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी विभाग, प्राधिकरण या स्थानीय निकाय नया लाइसेंस, एनओसी या व्यापार मंजूरी न तो जारी करेगा और न ही नवीनीकृत करेगा।
इसके साथ ही सरकार ने ऐसी जगहों के लिए पहले से दिए गए सभी लाइसेंसों की समीक्षा 30 दिनों के भीतर करने का निर्देश भी दिया है। अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि स्थानीय निकाय इन निर्देशों का पालन करते वक्त मौजूदा कानूनों, नियमों और शासन निर्णयों का ध्यान रखें, और यह पक्का करें कि किसी भी हाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना न हो।
जिन जिलों से नेशनल हाईवे गुजरता है, वहां आदेश के 7 दिनों के भीतर जिलाधिकारियों को डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स बनाने को कहा गया है। इस टास्क फोर्स में जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई, संबंधित भूमि मालिक एजेंसी, पीडब्ल्यूडी और स्थानीय निकायों के अफसर शामिल होंगे।
अतिक्रमण समय पर हटे, इसके लिए जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक दोनों संयुक्त रूप से जवाबदेह होंगे। यह टास्क फोर्स हर 15 दिन में समीक्षा बैठक करेगी, ताकि हाईवे किनारे अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर लगातार नजर रखी जा सके।