गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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12:36 IST

शेयर बाजार में घबराहट, चीन की एन्ट्री से टेंशन बढ़ा, अब क्या होगा

क्रूड ऑइल की कीमत में बढ़ोतरी और चीन के मार्केट में फिर से एंट्री के चलते भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

शेयर बाजार में घबराहट, चीन की एन्ट्री से टेंशन बढ़ा, अब क्या होगा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भारतीय शेयर बाजार की हालत अभी भी सुधरती नजर नहीं आ रही है। बाजार फिलहाल रोज उठापटक झेलकर बंद हो रहा है, और पिछले हफ्ते भी गिरावट के साथ बंद हुआ था। अब फिर से एक बार उस पर बड़ा दबाव आता दिख रहा है। ग्लोबल लेवल पर जो समीकरण बदल रहे हैं, वो इसके पीछे अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी वजह है क्रूड ऑइल की कीमत में हो रही बढ़ोतरी, और उसमें अब एक बड़े खिलाड़ी की एंट्री से भारत का टेंशन और बढ़ गया है।

UBS इन्वेस्टमेंट बैंक के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट भानू बावेजा ने इस पर एक बड़ी चेतावनी दी है। उनके कहने के मुताबिक, चीन में डिमांड बढ़ गई है और होर्मुज की खाड़ी से जो तेल का सप्लाय होता है उसमें रुकावट आ रही है, इस वजह से तेल की कीमत में बड़ा उछाल आ सकता है। ऐसा हुआ तो शेयर बाजार में बड़ी गिरावट होगी और इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर जोरदार दिख सकता है, क्योंकि एनर्जी के लिए भारत बड़े पैमाने पर दूसरे देशों पर निर्भर है।

बावेजा ने बताया कि जब शुरुआत में होर्मुज की खाड़ी बंद की गई थी, तब ऐसा लग रहा था कि तेल की कीमतें २०० डॉलर प्रति बैरल तक जाएंगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और १२० डॉलर पर भी वो ज्यादा देर तक नहीं टिकीं। इसके पीछे एक बड़ी वजह चीन था, ऐसा उन्होंने कहा।

इस साल की शुरुआत में चीन तेल खरीद ही नहीं रहा था, इसलिए सप्लाय में रुकावट होने के बावजूद स्टॉक कम नहीं हुआ था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं, क्योंकि चीन ने बाजार में फिर से एंट्री ले ली है। जिन एयरलाइंस और दूसरी कंपनियों ने तेल की कीमतें कम होने का इंतजार करते हुए खरीद टाल दी थी, वो अब फिर से खरीदार बनकर बाजार में लौटेंगी। सप्लाय सीमित होने की वजह से, इसका सीधा मतलब है कि तेल की कीमतें बढ़ेंगी ही।

बावेजा के मुताबिक, रोजाना करीब २० दशलक्ष बैरल क्रूड ऑइल और दूसरे प्रॉडक्ट होर्मुज से होकर जाते थे, लेकिन वहां रुकावट आने के बाद जहाज चोरी छिपे आना जाना कर रहे हैं और फिलहाल सिर्फ एक तिहाई, यानी करीब ६ दशलक्ष बैरल ही इस रास्ते से जा रहा है। इसका मतलब है कि फिलहाल १४ दशलक्ष बैरल तेल इस रास्ते से नहीं जा पा रहा है, और इससे बाजार पर बड़ा दबाव आ सकता है। यह एक ऐसा खतरा है जिसे लेकर भारतीय और ग्लोबल दोनों बाजारों के निवेशकों को सतर्क रहना जरूरी है, ऐसा बावेजा ने आगे बताया। साथ ही बाजार को यह भी महसूस हो रहा है कि अमेरिकी प्रशासन अकेले के दम पर यह समस्या सुलझा नहीं पाएगा। लेकिन बाजार पर दबाव आया, तो व्हाइट हाउस के लिए शुल्क या दूसरी नीतियां वापस लेना आसान हो सकता है।

जानकारों के मुताबिक, शेयर बाजार फिलहाल अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन डर का माहौल अभी भी बना हुआ है। तेल की कीमत में बढ़ोतरी होने के बावजूद बाजार फिलहाल तो अच्छा प्रदर्शन दिखा रहा है, वहीं शेयर और करंसी में अस्थिरता निचले स्तर के करीब है।

तेल की बढ़ती कीमतों से सिर्फ ईंधन के दाम नहीं बढ़ेंगे, बल्कि नैफ्था और खाद के खर्च में भी बड़ी बढ़ोतरी होगी, जिससे आगे चलकर अनाज की महंगाई बढ़ सकती है। जानकारों ने बताया कि तेल की बढ़ी हुई कीमतें भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी नहीं हैं, और अगर यही हालात बने रहे तो कीमतें जल्द ही बढ़ सकती हैं।

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