गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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04:24 IST

रत्नागिरी में डेढ़ दिन के बप्पा का ढोल-ताशों के साथ भावुक विसर्जन

गणेश चतुर्थी के मौके पर रत्नागिरी जिले में डेढ़ दिन के गणपति बप्पा की मूर्तियों का पारंपरिक तरीके से विसर्जन हुआ

रत्नागिरी में डेढ़ दिन के बप्पा का ढोल-ताशों के साथ भावुक विसर्जन
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गणेश चतुर्थी के पावन मौके पर रत्नागिरी जिले में बड़ी भक्ति और जोश के साथ लाडले गणपति बप्पा की स्थापना की गई थी। घर-घर में और सार्वजनिक मंडलों में गणपति के आगमन से पूरे जिले में उत्सव जैसा माहौल बन गया था।

इस साल के गणेशोत्सव में जिले में कुल 1 लाख 69 हजार 538 घरेलू और 126 सार्वजनिक गणेशमूर्तियों की स्थापना हुई। इस तरह कुल मिलाकर 1 लाख 69 हजार 664 गणेशमूर्तियों की पूजा करके लोगों ने उत्सव का आनंद लिया। हर घर से धूप-दीप की खुशबू और आरतियों की आवाज सुनाई दे रही थी, और गणेशोत्सव का उत्साह हर तरफ छलक रहा था।

डेढ़ दिन के मेहमान बप्पा को मंगलवार को विदा करने के लिए कुओं और तालाबों पर विसर्जन की व्यवस्था की गई थी। मशहूर मांडवी, भाट्ये और पांढरा समुद्र इन मुख्य समुद्र किनारों पर डेढ़ दिन के गणपति को निरोप देने के लिए भारी भीड़ जमा हुई थी। "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" और "मंगलमूर्ती मोरया" के जयकारों से पूरा समुद्र किनारा और आस-पास का इलाका गूंज उठा।

ढोल-ताशों की गूंज, गुलाल उड़ाते हुए और पारंपरिक तरीके से आरती करके भक्तों ने अपने प्यारे गणपति को विदाई दी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तरफ से किनारों पर सुरक्षा और बिना किसी दिक्कत के विसर्जन की पूरी व्यवस्था की गई थी। बप्पा को निरोप देते समय भक्तों ने अगले साल फिर आने की उम्मीद के साथ विदाई ली। इस तरह रत्नागिरी जिले में डेढ़ दिन का गणेशोत्सव पूरी शांति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

गणेशोत्सव के इसी जोश में चिपळूण शहर और तालुके में घर-घर विराजमान डेढ़ दिन के गणपति को मंगलवार को भक्तिमय माहौल में भावुक विदाई दी गई। "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" के नारों से शहर के अलग-अलग इलाके गूंज उठे। ढोल-ताशों की गूंज, गुलाल की उड़ान और पारंपरिक वाद्यों की आवाज के बीच गणेशभक्तों ने बप्पा को विदा किया। गणेशमूर्ति के विसर्जन के लिए शाम को भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। घरेलू गणपति की मूर्तियां सजी हुई गाड़ियों में और हाथों में लेकर विसर्जन स्थल तक ले जाई गईं।

विसर्जन से पहले परिवारों ने गणपति की पूजा, आरती और नैवेद्य चढ़ाकर अगले साल फिर सुख-समृद्धि के साथ आने की प्रार्थना की। शहर के बाजारपुल, खंड बावशेवाडी नदी, बहादूरशेखनाका के पास वाशिष्ठी नदी और पाग नदी किनारे पर भी बड़ी भीड़ देखने को मिली। गणेशभक्तों की सुविधा के लिए स्थानीय प्रशासन, नगरपरिषद और संबंधित विभागों की तरफ से जरूरी व्यवस्था की गई थी। पुलिस प्रशासन की तरफ से भी बंदोबस्त लगाया गया था।

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