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03:49 IST

पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर: नए डॉक्टर सेवाभाव और संवेदनशीलता से करें मरीजों की सेवा

सेवाग्राम के महात्मा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में एमबीबीएस बैच 2020 के फाउंडेशन डे और ग्रेजुएशन सेरेमनी में पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने नए डॉक्टरों को संबोधित किया।

पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर: नए डॉक्टर सेवाभाव और संवेदनशीलता से करें मरीजों की सेवा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

वर्धा जिले के सेवाग्राम स्थित महात्मा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में एमबीबीएस बैच 2020 का फाउंडेशन डे और ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित हुई। इस कार्यक्रम में पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि यह संस्था सिर्फ वर्धा जिले तक सीमित न रहकर दूर-दराज और आदिवासी इलाकों के लोगों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम कर रही है। उन्होंने नए डॉक्टरों से अपील की कि वे संस्था से मिली शिक्षा, संस्कार और सेवाभाव की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज के आखिरी तबके तक सेवा पहुंचाएं।

पालकमंत्री डॉ. भोयर ने बताया कि 2020 का यह एमबीबीएस बैच कोरोना महामारी के सबसे मुश्किल दौर में अपनी पढ़ाई शुरू कर चुका था, और इन विद्यार्थियों ने विपरीत हालात में भी हिम्मत, आत्मविश्वास और सेवाभाव को बनाए रखा। इसी वजह से उन्होंने इस बैच को सिर्फ "कोरोना की बैच" न कहकर "कोरोना योद्धाओं की बैच" कहना ज्यादा सही बताया। उन्होंने नए डॉक्टरों से कहा कि वे संस्था से मिली सादगी, शालीनता, नैतिक मूल्य और सेवाभाव को हमेशा याद रखें और इन्हीं संस्कारों का इस्तेमाल समाज के जरूरतमंद और वंचित लोगों की सेवा के लिए करें।

नए डॉक्टरों को बधाई देते हुए डॉ. भोयर ने एमजीआईएमएस से जुड़ी अपनी पारिवारिक यादों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि सेवा के मकसद से 1969 में शुरू हुई इस संस्था ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है और यह सेवा परंपरा आज भी लगातार जारी है। उनके मुताबिक शहरों के साथ-साथ गांव और दूर-दराज इलाकों के आम लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना ही असल मायने में स्वास्थ्य व्यवस्था की कामयाबी है।

डॉ. भोयर ने आगे कहा कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या काफी बढ़ी है और एमबीबीएस के साथ-साथ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा की सीटों में भी अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। देश में एम्स की संख्या भी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत के जरिए लोगों को बड़े पैमाने पर कैशलेस स्वास्थ्य सेवा मिल रही है, और कैंसर की जांच और इलाज के लिए भी खास कोशिशें की जा रही हैं।

कस्तूरबा हेल्थ सोसायटी के सचिव डॉ. बी.एस. गर्ग ने कहा कि विद्यार्थी अब संवेदनशील डॉक्टर बनकर समाज में कदम रख रहे हैं, इसलिए मरीजों के साथ सहानुभूति से पेश आना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गरीब, महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, दिव्यांग और उपेक्षित तबके के मरीजों का इलाज करते वक्त दया, हुनर और इंसानियत बनाए रखनी चाहिए। डीन डॉ. ए.के. शुक्ला ने कहा कि यहां के विद्यार्थी चाहे कहीं भी काम करें, वे हमेशा एमजीआईएमएस के रुग्णदूत बने रहेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि संस्था से मिली शिक्षा और संस्कार को हमेशा साथ रखें, और माता-पिता के त्याग व शिक्षकों के मार्गदर्शन को याद करते हुए अपने ज्ञान का इस्तेमाल जरूरतमंद मरीजों की सेवा के लिए करें।

इस मौके पर डॉ. कांचन ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव का शुभकामना संदेश पढ़कर सुनाया, वहीं डॉ. पुनम शिवकुमार ने कस्तूरबा हेल्थ सोसायटी के अध्यक्ष पी.एल. तापड़िया का संदेश उपस्थित लोगों को सुनाया। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों के हाथों विद्यार्थियों को एमबीबीएस की डिग्री दी गई और नए डॉक्टरों को डॉक्टर प्रतिज्ञा दिलाई गई।

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