नायर, सायन और कूपर अस्पताल में नई एमआरआई मशीनें, अक्टूबर से राहत की उम्मीद
महापालिका अस्पतालों में महीनों से एमआरआई की वेटिंग झेल रहे मरीजों के लिए राहत की खबर, तीन टेस्ला की नई मशीनें लगनी शुरू
मुंबई महापालिका के अस्पतालों में एमआरआई जांच के लिए महीनों इंतजार करने वाले मरीजों को अब राहत मिलने के आसार हैं। ग्यारह बार फेरनिविदा यानी टेंडर की प्रक्रिया दोहराने के बाद आखिरकार महापालिका के बड़े अस्पतालों में अत्याधुनिक तीन टेस्ला की एमआरआई मशीनें आनी शुरू हो गई हैं।
नायर, सायन और कूपर अस्पताल में मशीनें पहुंच चुकी हैं और उन्हें लगाने का काम चल रहा है। केईएम अस्पताल में भी जल्द ही नई मशीन आने वाली है। अतिरिक्त आयुक्त (शहर) डॉ. प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे ने बताया कि अक्टूबर में यह एमआरआई सेवा पूरी तरह पटरी पर लाने की योजना है।
केईएम, सायन और नायर अस्पताल में एमआरआई की सुविधा बढ़ाने का प्रस्ताव 2018-19 से अटका पड़ा था। टेंडर प्रक्रिया में आई अड़चनों का सीधा असर मरीजों पर पड़ा। बताया जाता है कि केईएम में एमआरआई के लिए करीब नौ महीने की वेटिंग चल रही थी, वहीं नायर में पुरानी मशीन बंद पड़ी होने के चलते लंबे समय से सेवा ठप थी। इस वजह से कई मरीजों को मजबूरन प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर का सहारा लेना पड़ रहा था।
1.5 टेस्ला की तुलना में तीन टेस्ला एमआरआई से ज्यादा साफ तस्वीरें मिल पाती हैं। इससे दिमाग में होने वाले बारीक बदलाव, छोटी गांठें, मिर्गी से जुड़ी दिक्कतें और कान-नाक-गले की बीमारियों की पहचान ज्यादा सटीक तरीके से हो सकेगी।
डॉ. वर्मा-लवंगारे ने बताया कि अस्पतालों के लिए दवाइयां, मेडिकल उपकरण और बाकी जरूरी सामान की खरीद को प्राथमिकता दी जा रही है और यह प्रक्रिया तेजी से चल रही है। यानी सिर्फ मशीनें पहुंचना काफी नहीं, महापालिका का जोर इस बात पर भी है कि वे असल में मरीजों की सेवा में काम आएं और जरूरी सामान की कमी न रहे। नई मशीनें शुरू होने के बाद जांच की वेटिंग कम होगी, जिसका सबसे ज्यादा फायदा आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मिलेगा और उनका प्राइवेट सेंटरों पर होने वाला खर्च भी घटेगा।
प्रमुख महापालिका अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. शैलेश मोहिते के मुताबिक, तीन टेस्ला क्षमता की एमआरआई मशीन अभी इस्तेमाल हो रही 1.5 टेस्ला मशीन के मुकाबले ज्यादा साफ और बेहतर क्वालिटी की तस्वीरें दे सकती है। इससे शरीर में बहुत छोटे बदलाव, गांठें और बीमारी के शुरुआती लक्षण पकड़ना पहले से आसान हो जाता है। खासकर दिमाग से जुड़ी बीमारियों की जांच में इस मशीन का बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। मिर्गी के मरीजों के दिमाग में होने वाले बारीक बदलाव या छोटी चोटें अब ज्यादा साफ दिख सकेंगी, जिससे डॉक्टरों को सही डायग्नोसिस कर आगे के इलाज की प्लानिंग करने में मदद मिलेगी।