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09:30 IST

नागपुर हाई कोर्ट के जजों ने 48 घंटे में विदर्भ की 86 तहसील अदालतों का सर्प्राइज मुआयना किया

नागपुर बेंच के जजों ने 12-13 सितंबर को विदर्भ के 10 जिलों की 86 तहसील अदालतों में जाकर हालात परखे।

नागपुर हाई कोर्ट के जजों ने 48 घंटे में विदर्भ की 86 तहसील अदालतों का सर्प्राइज मुआयना किया
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

विदर्भ में आम लोग जिस अदालत के पास न्याय मांगने जाते हैं, उसी की जमीनी हालत जानने के लिए हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक अलग तरह की मुहिम चलाई। नागपुर बेंच के प्रशासनिक न्यायाधीश अनिल किलोर की अगुवाई में सिर्फ 48 घंटे के भीतर विदर्भ के 10 जिलों की 86 तहसीलों में मौजूद अदालतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया गया।

इस दौरान अदालत की इमारतों से लेकर जजों के दफ्तर, स्टाफ की सुविधाएं, रहने की व्यवस्था और सिक्योरिटी तक हर चीज को खुद जाकर परखा गया। 12 और 13 सितंबर को हुई इस बड़ी मुहिम को नागपुर बेंच के इतिहास में अपनी तरह की पहली पहल बताया जा रहा है। खास बात यह रही कि सिर्फ सरकारी रिपोर्ट या कागजी रिकॉर्ड पर भरोसा करने की बजाय जज खुद तहसील स्तर तक पहुंचे।

इस मुहिम का मकसद तहसील स्तर की न्यायिक व्यवस्था में आ रही असली दिक्कतों को समझना था। निरीक्षण के वक्त जजों, कोर्ट के अफसरों, वकील संघों के नुमाइंदों, लोकल प्रशासन और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के इंजीनियरों से भी बातचीत की गई। नागपुर बेंच के प्रशासनिक प्रबंधक भूषण क्षीरसागर के मुताबिक इस मुहिम का मकसद यही था कि तहसील अदालतों की हालत का सही अंदाजा सिर्फ कागजी रिपोर्ट से नहीं बल्कि खुद जाकर देखने से लगाया जाए।

नागपुर को छोड़कर विदर्भ के बाकी 10 जिलों के लिए नागपुर बेंच के 10 जज पालक न्यायमूर्ति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस मुहिम में इन सभी जजों ने अपने-अपने जिलों की अलग-अलग तहसीलों में जाकर अदालतों का जायजा लिया। प्रशासनिक न्यायाधीश अनिल किलोर ने खुद लाखनी, वडसा और हिंगणा जैसी जगहों की चुनी हुई तहसील अदालतों का दौरा किया।

निरीक्षण के दौरान अदालत की इमारतों की मौजूदा हालत, जजों के दफ्तर, स्टाफ को मिलने वाली सुविधाएं और जुडिशियल ऑफिसर व कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था भी जांची गई। इसके अलावा कोर्ट परिसर की सिक्योरिटी को भी निरीक्षण में शामिल किया गया। इन सारी बातों का पूरा दस्तावेजीकरण किया गया, जिसके आधार पर आगे चलकर अदालतों के लिए जरूरी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग होने की उम्मीद है।

यह मुहिम 12 सितंबर को हुई राष्ट्रीय लोक अदालत के साथ ही चलाई गई, जिससे निरीक्षण के अलावा पेंडिंग मामलों के निपटारे और लोकल अदालतों के कामकाज को लेकर मार्गदर्शन का काम भी हुआ। लोक अदालत के दौरान सामने आई तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों को मौके पर ही सुलझाने की कोशिश की गई और संबंधित जुडिशियल ऑफिसरों को जरूरी गाइडेंस भी दिया गया।

हाई कोर्ट की विधि सेवा उपसमिति के मुताबिक, राष्ट्रीय लोक अदालत में नागपुर बेंच के तहत कुल 67 पेंडिंग मामलों का निपटारा हुआ, जिनमें समझौते के जरिए कुल 83.5 करोड़ रुपये का सेटलमेंट हुआ। इस तरह 48 घंटे की इस मुहिम में एक तरफ विदर्भ की तहसील अदालतों की बुनियादी सुविधाओं और सिक्योरिटी की जमीनी हकीकत सामने आई, तो दूसरी तरफ लोक अदालत के जरिए पेंडिंग मामलों के निपटारे को भी रफ्तार मिली।

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