मुंबई में आंदोलन से पहले जरांगे पाटील को लेनी होगी परमिशन, हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर बड़ा आदेश दिया, साथ ही जरांगे पाटील की तबीयत की जांच के भी निर्देश दिए।
मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमाता दिख रहा है। मनोज जरांगे पाटील ने मुंबई में आंदोलन करने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बिना परमिशन मुंबई में कोई आंदोलन नहीं किया जा सकता। इसका मतलब यह हुआ कि मुंबई की तरफ कूच करने से पहले जरांगे पाटील और उनके समर्थकों को आंदोलन के लिए जरूरी परमिशन लेनी होगी।
दरअसल, एक याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि जरांगे पाटील के मुंबई आंदोलन से कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि पहले परमिशन ली जाए, उसके बाद ही मुंबई आकर आंदोलन किया जा सकता है।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने जरांगे पाटील की सेहत को लेकर भी चिंता जताई है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि उनकी सेहत की जांच कराई जाए और अगर जरूरत पड़े तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाए। यानी अब सबकी नजर जरांगे पाटील की तबीयत पर भी टिकी हुई है।
इसी बीच, मनोज जरांगे पाटील ने कल अंतरवाली सराटी में मराठा समाज के लोगों की राज्यस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में आगे के आंदोलन की दिशा और रणनीति तय हो सकती है। बताया जा रहा है कि जरांगे पाटील मुंबई में आंदोलन करने के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं, इसलिए इस बैठक में क्या फैसला होता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब जरांगे पाटील की अगली भूमिका पर सबकी नजर है। अगर मुंबई में आंदोलन करना है तो पहले परमिशन की पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसे में अंतरवाली सराटी की बैठक के बाद जरांगे पाटील क्या ऐलान करते हैं, आंदोलन की तारीख और स्वरूप क्या रहेगा, इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
मराठा आरक्षण के मुद्दे पर इससे पहले भी जरांगे पाटील सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाते रहे हैं। अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उनकी आगे की भूमिका को खास तौर पर अहमियत मिल गई है।