गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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03:47 IST

मुंबई महापालिका अस्पतालों की तक्रारें, जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड अब डैशबोर्ड से होंगे मॉनिटर

महापालिका प्रशासन ने अस्पतालों में डॉक्टरों की हाजिरी, नागरिकों की तक्रारें, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र और खरीदी प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से ट्रैक करने की तैयारी शुरू की है।

मुंबई महापालिका अस्पतालों की तक्रारें, जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड अब डैशबोर्ड से होंगे मॉनिटर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई महापालिका के अस्पतालों में डॉक्टर टाइम पर आते हैं या नहीं, किसी नागरिक की तक्रार कितने दिनों से पेंडिंग है, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए दिया गया अर्ज कहां अटका है, या दवाइयों और उपकरणों की खरीदी किस स्टेज पर रुकी हुई है, इन सबकी अब ज्यादा असरदार और डिजिटल तरीके से निगरानी करने की तैयारी महापालिका प्रशासन ने शुरू कर दी है।

यह जानकारी अतिरिक्त आयुक्त (शहर) डॉ. प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे ने सायन के लो. टिळक सार्वजनिक अस्पताल में दी। उन्होंने बताया कि आरोग्य सेवा को सिर्फ अस्पताल तक सीमित न रखते हुए हर स्टेज पर जवाबदेही तय करने वाली और नागरिक व मरीज केंद्रित व्यवस्था खड़ी करने पर जोर दिया जा रहा है।

महापालिका की आरोग्य व्यवस्था में जो पुराने और लंबे समय से पेंडिंग सवाल हैं, उनके लिए तात्कालिक उपाय करने के बजाय अब स्थायी सिस्टम बनाने की प्लानिंग की गई है। इसमें मनुष्यबल भर्ती, डॉक्टरों की उपस्थिति, नागरिकों की तक्रारें, अस्पतालों की खरीदी प्रक्रिया और डिजिटलाइजेशन, और रक्तपेढ़ियों की क्वालिटी बढ़ाने तक कई तरह के बदलाव किए जाएंगे।

जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए नागरिकों को दफ्तर के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए सेतु पद्धति के तहत सेवा को और आसान बनाने की कोशिश चल रही है। अर्ज, पेंडिंग मामले और वॉर्डवाइज परफॉर्मेंस पर डैशबोर्ड के जरिए नजर रखी जाएगी, और प्रमाणपत्र तैयार होते ही नागरिकों को एसएमएस से इसकी जानकारी देने की भी प्लानिंग है।

वर्मा-लवंगारे ने बताया कि नागरिकों की आरोग्य संबंधी तक्रारों के लिए 'मार्ग' प्रणाली का विस्तार किया जाएगा। अगर तय समय में कोई तक्रार निपटाई नहीं गई, तो वह अपने आप वरिष्ठ अधिकारियों के पास ट्रांसफर हो जाएगी, ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी।

दूसरी तरफ, महापालिका के अस्पतालों में डॉक्टरों की हाजिरी पर भी प्रशासन की नजर अब और सख्त रहेगी। बायोमेट्रिक हाजिरी को असरदार बनाकर अनियमित उपस्थिति की जांच की जाएगी और नियमों के मुताबिक कार्रवाई भी होगी। खाली पदों को भरना, नए डॉक्टरों के लिए ट्रेनिंग, बदलती मेडिकल जरूरतों के हिसाब से नई पदरचना यानी 'आकृतिबंध', मरीज केंद्रित पीपीपी मॉडल, और 2028 तक शुरू होने वाले नए अस्पतालों के लिए पहले से मनुष्यबल की प्लानिंग पर भी प्रशासन का जोर है।

रक्तपेढ़ियों को अगले साल भर के अंदर एनएबीएल मानांकन दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही अस्पतालों की साफ-सफाई और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली सेवाओं की क्वालिटी चेक करने के लिए आगे चलकर थर्ड पार्टी से जांच करवाने की भी प्लानिंग है। दवाइयों और उपकरणों की खरीदी से लेकर मरीज की सेवा तक, हर प्रक्रिया में जहां भी देरी हो रही है उसे ढूंढकर कम करने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड व्यवस्था तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

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