मुंबई लोकल: RailOne ऐप से अब परिवार और दूसरों के लिए भी बनेगा सीजन पास
रेलवे ने 2 सितंबर से RailOne ऐप पर शेयर किया जा सकने वाला सीजन पास शुरू किया है, लेकिन इसके साथ सख्त शर्तें भी लगाई हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई में लोकल से रोज सफर करने वाले पैसेंजरों के लिए टिकट बनवाने का तरीका अब और आसान हो गया है। सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स और रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद 2 सितंबर से RailOne ऐप पर एक नई सुविधा शुरू की गई है, जिसके तहत सीजन टिकट यानी पास अब शेयर भी किया जा सकता है।
इस नई सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब कोई पैसेंजर सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि अपने परिवार के मेंबर्स या फिर किसी और पांच लोगों के लिए भी पास बनवा सकता है। हालांकि, सफर के दौरान किसी को कोई परेशानी न हो, इसके लिए रेलवे ने कुछ सख्त नियम भी साथ में लागू किए हैं।
नए नियमों के मुताबिक, RailOne ऐप से बनाया गया पास या तो PDF फॉर्मेट में या फिर प्रिंट किए हुए कागज पर अपने पास रखना जरूरी होगा। लेकिन शर्त यह है कि इस पास पर संबंधित पैसेंजर की साफ फोटो और स्कैन हो सकने वाला QR कोड होना बहुत जरूरी है। पैसेंजरों को यह भी ध्यान रखना होगा कि सिर्फ ऐप पर दिखने वाला इनवॉइस, बुकिंग रिसीट या फिर पुराने तरीके का UTS पेपर पास सफर के लिए मान्य नहीं होगा।
पास बनवाने की उम्र सीमा को लेकर भी साफ नियम बताए गए हैं। खुद के लिए पास बनवाने वाले पैसेंजर की उम्र कम से कम 18 साल होनी अनिवार्य है, जबकि परिवार के दूसरे मेंबर यानी जिनके लिए पास बनवाया जा रहा है, उनकी न्यूनतम उम्र 5 साल तय की गई है। खुद के लिए बनाए गए पास की वैलिडिटी जियो-फेंसिंग वेरिफिकेशन के बाद, बुकिंग के दिन से ही शुरू हो जाती है। लेकिन दूसरों के लिए बनवाए गए पास की वैलिडिटी बुकिंग के अगले दिन से शुरू होगी। मुंबई की उपनगरीय रेलवे में जो मल्टी-टिकट पॉलिसी की छूट पहले से चली आ रही है, वह आगे भी वैसी ही जारी रहेगी।
टिकट चेकिंग को और पुख्ता बनाने के लिए रेलवे ने सभी टिकट चेकिंग स्टाफ, स्टेशन स्टाफ और स्क्वॉड टीमों को हैंडहेल्ड टर्मिनल यानी HHT डिवाइस का अपडेटेड वर्जन दिया है। सफर के दौरान TTE पहले तो पैसेंजर के चेहरे से फोटो मिलाकर सीधे वेरिफिकेशन करेंगे, और जरूरत पड़ने पर डिवाइस से QR कोड स्कैन करके भी कन्फर्म करेंगे।
पैसेंजरों को इस बारे में खास सावधानी बरतनी होगी। अगर पास पर मौजूद QR कोड धुंधला हो, फटा हो, उससे छेड़छाड़ की गई हो या किसी भी वजह से पढ़ा न जा सके, तो पास की सच्चाई साबित नहीं हो पाएगी। ऐसी हालत में संबंधित पैसेंजर को बिना वैलिड टिकट वाले पैसेंजर की कैटेगरी में गिन लिया जाएगा और रेलवे के नियमों के हिसाब से उस पर कानूनी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसीलिए रेलवे ने सफर करते वक्त डिजिटल हो या प्रिंट किया हुआ पास, उसकी कॉपी बिल्कुल साफ और सही हालत में रखने की अपील की है।