गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:21 IST

मुंबई-गोवा हाईवे पर जाम से नाराज उद्योगपति प्रशांत पवार का फेसबुक पोस्ट वायरल, नेताओं से सीधा सवाल

गणेशोत्सव के लिए कोकण जा रहे चाकरमानियों को मुंबई-गोवा हाईवे पर जाम और खराब सड़कों से जूझना पड़ा, इस पर उद्योगपति प्रशांत पवार ने फेसबुक पर गुस्सा जाहिर करते हुए मंत्री, विधायक और सांसदों से सीधा जवाब मांगा।

मुंबई-गोवा हाईवे पर जाम से नाराज उद्योगपति प्रशांत पवार का फेसबुक पोस्ट वायरल, नेताओं से सीधा सवाल
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गणेशोत्सव के मौके पर बड़ी तादाद में चाकरमानी कोकण की तरफ निकल पड़े हैं, लेकिन मुंबई-गोवा हाईवे पर लगे जाम और सड़कों की बदहाली ने कोकणवासियों का गुस्सा एक बार फिर भड़का दिया है। इसी माहौल में उद्योगपति वामनराव पवार के बेटे और खुद उद्योगपति प्रशांत पवार ने फेसबुक पर जो पोस्ट लिखी, वह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।

हर साल गणेशोत्सव के दौरान कोकण आने वाले चाकरमानियों को ट्रैफिक जाम, खराब सड़कों और सफर की तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस बार भी हाईवे पर कई जगह गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लगने से यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी है। इसी हालात पर प्रशांत पवार ने सीधा सवाल खड़ा किया है।

उन्होंने पोस्ट में लिखा, "ट्रैफिक पुलिस डिपार्टमेंट आखिर कर क्या रहा है? महाराष्ट्र के मंत्री, विधायक और सांसदों के पास इस हालात का क्या जवाब है?"

सिर्फ आश्वासनों की राजनीति से नाराजगी जताते हुए प्रशांत पवार ने साफ कहा, "सिर्फ वादे नहीं चाहिए, अब असल में काम होना चाहिए।" उन्होंने यह भी पूछा कि सड़क, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं पर स्थायी हल कब निकलेगा।

इसी पोस्ट पर 'कालनिर्णय' के संपादक जयेंद्र साळगावकर की टिप्पणी भी चर्चा में आ गई। साळगावकर ने लिखा, "कोकण पर खास ध्यान कोई नहीं देता... और कोकणी जनता भी एकजुट होकर नहीं दिखाती।" उन्होंने कोल्हापुर की मिसाल दी, जहां वहां की जनता ने पार्टी की वफादारी छोड़कर टोल के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी थी, और कहा कि कोकण में भी लोगों को पार्टी का भेद भुलाकर अपने मुद्दों के लिए एक साथ आना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि छह-सात साल पहले उन्होंने इसी मुद्दे पर आवाज उठाई थी और उनकी बात अखबार के पहले पन्ने पर छपी भी थी, लेकिन जितना आगे लोगों को आना चाहिए था, उतने लोग सामने नहीं आए, इसका उन्हें अफसोस है।

साळगावकर की इस प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए प्रशांत पवार ने कहा कि अब कोकण के मुद्दों के लिए पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होने का वक्त आ गया है। उन्होंने बताया कि मुंबई-गोवा हाईवे के मसले पर बरसों से सिर्फ आश्वासन मिलते आए हैं। केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने भी हाईवे पूरा करने का कई बार वादा किया, लेकिन सरकारें बदलीं, पार्टियां बदलीं, सत्ता आई-गई, फिर भी हाईवे का सवाल जस का तस बना हुआ है।

प्रशांत पवार ने कहा, "कोकण की जनता को एक साथ आकर अपने लोकप्रतिनिधियों, विधायक और सांसदों से सीधा सवाल पूछना चाहिए कि कोकण के लिए ठोस काम क्यों नहीं होता?"

यह भूमिका किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं है, यह साफ करते हुए प्रशांत पवार ने कहा कि कोकण के पक्ष में खड़ी होने वाली आवाज अब बुलंद होनी चाहिए। उन्होंने यह भी इशारा किया कि अगर मौजूदा लोकप्रतिनिधि कोकण के सवाल असरदार तरीके से नहीं उठा पा रहे, तो विकल्प के बारे में सोचने का वक्त आ गया है।

गणेशोत्सव के दौरान हाईवे पर ट्रैफिक जाम का मसला गंभीर हो चुका है, ऐसे में प्रशांत पवार की इस पोस्ट से कोकण की सड़कों, ट्रैफिक व्यवस्था और लोकप्रतिनिधियों की भूमिका पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। प्रशांत पवार ने अपना नारा भी साफ रखा, "पार्टी बाद में... कोकण पहले! आश्वासन नहीं... काम चाहिए! आवाज उठनी चाहिए... और वह एकजुट होनी चाहिए!"

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