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00:26 IST

MPSC पेपरफुटी रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव, व्ही. राधा समिति का फैसला

राज्य में भर्ती परीक्षा सुधार के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति ने पुणे में पत्रकार परिषद में पेपर तैयार करने से लेकर बांटने तक की पूरी प्रक्रिया बदलने की जानकारी दी।

MPSC पेपरफुटी रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव, व्ही. राधा समिति का फैसला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी MPSC की परीक्षाओं में पेपरफुटी की घटनाएं रोकने के लिए सरकार अब चार अलग-अलग स्टेज पर बदलाव करने वाली है - पेपर तैयार करना, छपाई, ट्रांसपोर्ट और बांटना। इसकी जानकारी शनिवार को पुणे में हुई पत्रकार परिषद में दी गई। यह जानकारी राज्य में भर्ती परीक्षा सुधार के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय कार्य समिति की अध्यक्ष और सामान्य प्रशासन विभाग की अपर मुख्य सचिव व्ही. राधा ने दी।

व्ही. राधा ने बताया कि अगर प्रश्नपत्र पहले से बना ही न हो, तो उसके लीक होने का खतरा भी नहीं रहेगा। इसीलिए यह तय किया गया है कि परीक्षा के ठीक समय पर ही पेपर तैयार किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में किसी एक व्यक्ति या सिस्टम के पास पेपर की पूरी जानकारी न पहुंचे, ऐसी सुरक्षित व्यवस्था बनाई जा रही है, और इसके लिए टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।

इस पत्रकार परिषद में समिति के सदस्य भी मौजूद थे - पुलिस महासंचालक (डीजीपी) सदानंद दाते, आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सचिव वीरेंद्र सिंह, नाशिक डिविजनल कमिश्नर डॉ. प्रवीण गेडाम, रिटायर्ड एयर मार्शल अजित भोसले, केंद्रीय लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर श्यामप्रसाद करगड्डे, आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर श्यामप्रसाद करगड्डे, और पशुसंवर्धन, डेयरी व मत्स्यव्यवसाय विभाग के सचिव डॉ. एन. रामास्वामी।

व्ही. राधा ने बताया कि स्टूडेंट्स की मांग है कि MPSC की परीक्षा पद्धति कम से कम पांच से आठ साल स्थिर रहे। स्टूडेंट्स का कहना है कि ऑब्जेक्टिव, डिस्क्रिप्टिव या किसी और पैटर्न में बार-बार बदलाव करने की बजाय यूपीएससी की तरह एक स्थिर और पहले से तय पैटर्न होना चाहिए, और परीक्षा शेड्यूल में भी लगातार बदलाव नहीं होना चाहिए। एक बार परीक्षा कैलेंडर जारी होने के बाद बार-बार उसमें बदलाव होने से उम्र सीमा, उम्र में छूट और स्टूडेंट्स की तैयारी पर असर पड़ता है। इसलिए स्टूडेंट्स की मांग है कि परीक्षा की तारीखें तय कर हर साल उसी अनुसार परीक्षा ली जाए।

व्ही. राधा के मुताबिक, MPSC पर परीक्षाओं का बढ़ता बोझ देखते हुए आयोग की खुद की क्षमता बढ़ाना जरूरी है। समिति मैनपावर, कंप्यूटर और तकनीकी सुविधाओं, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और शिकायत निवारण सिस्टम को और मजबूत करने पर सिफारिशें देगी। परीक्षा लेने की मूल जिम्मेदारी आयोग की ही रहेगी, लेकिन इसे पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए जरूरी नियम और तरीके तय किए जाएंगे।

राज्यभर से अब तक करीब 18 हजार से ज्यादा ई-मेल आ चुके हैं। पुणे में हुई बातचीत के दौरान करीब 200 स्टूडेंट्स के सुझाव दर्ज किए गए, और करीब 200 और स्टूडेंट्स चर्चा के लिए इंतजार में हैं जिनके सुझाव भी सुने जाएंगे, ऐसा व्ही. राधा ने बताया।

आने वाले एक साल तक MPSC की परीक्षाएं OMR पद्धति से ही ली जाने की दिशा में काम किया जाएगा। ऑनलाइन परीक्षा को लेकर स्टूडेंट्स के बीच जो मतभेद हैं उन्हें देखते हुए फिलहाल OMR पद्धति को ही ज्यादा सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए जरूरी सिस्टम डेवलप किया जाएगा।

स्टूडेंट्स की तरफ से जो सुझाव आए उनमें कम से कम पदों की संख्या पहले से जाहीर करने की मांग, उत्तरपत्रिका जांचने के लिए केंद्रीय व्यवस्था, एक बार रजिस्ट्रेशन और फीस पद्धति में सुधार, शिकायत निवारण के लिए अलग पोर्टल, परीक्षा केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं, दिव्यांग और स्पोर्ट्स कोटे के सर्टिफिकेट जल्दी चेक करना, पेपरफुटी और गड़बड़ियों को लेकर जीरो टॉलरेंस, और परीक्षा समय पर लेना शामिल है।

समिति के सदस्य और डीजीपी सदानंद दाते ने कहा कि कॉम्पिटिटिव एग्जाम की प्रक्रिया को और तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए टास्क फोर्स बनाया गया है। स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स, कोचिंग क्लास चलाने वालों और पेरेंट्स के सुझाव जानना इस टास्क फोर्स का मुख्य मकसद है। पुणे से पहली पब्लिक सुनवाई शुरू हुई है, और हर सुझाव को गंभीरता से लेकर परीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की कोशिश की जाएगी, ऐसा दाते ने कहा।

राज्य में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में कुछ तुरंत बदलाव भी किए जाएंगे, जिनके लिए 15 दिनों के अंदर कुछ सिफारिशें दी जाएंगी। वहीं लंबे समय के बदलाव चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे। यह समिति सिर्फ रिपोर्ट सौंपकर नहीं रुकेगी, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को तेज और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए काम करती रहेगी।

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