MPSC पेपर लीक पर नागपुर के संविधान चौक पर हजारों छात्रों का हल्ला बोल
विदर्भ स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिति के बैनर तले हुए आंदोलन में एमपीएससी और सरकार के खिलाफ गुस्सा फूटा, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
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नागपुर के ऐतिहासिक संविधान चौक पर बुधवार को पूरे विदर्भ से आए हजारों प्रतियोगी छात्र सड़कों पर उतर आए। इनकी मांग थी अपना हक, भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी एमपीएससी और राज्य सरकार के खिलाफ इस मौके पर जमकर नारेबाजी हुई और छात्रों ने अपनी ताकत का अहसास कराया।
'विदर्भ स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिति' के बैनर तले हुए इस आंदोलन में नागपुर, अमरावती, चंद्रपुर, गड़चिरोली, यवतमाल, वर्धा और भंडारा जैसे जिलों से छात्रों का हुजूम पहुंचा। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस चार घंटे लंबे प्रदर्शन ने जिला प्रशासन को भी हिला कर रख दिया।
दरअसल छात्रों का कहना है कि सालों की मेहनत, पैसों की तंगी और घर-परिवार से दूर रहकर की गई तैयारी के बाद जब पेपर लीक जैसी खबरें सामने आती हैं तो उनका भरोसा पूरी तरह टूट जाता है। इसी गुस्से को लेकर विदर्भ के कोने-कोने से पहुंचे छात्रों ने संविधान चौक पर एमपीएससी की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोला।
हाल ही में औषधि निरीक्षक पद की भर्ती में पेपर लीक का मामला सामने आया था, जिसमें एमपीएससी के ही अवर सचिव और सहायक कक्ष अधिकारी को गिरफ्तार किया गया। इसी घटना ने विदर्भ के छात्रों के गुस्से को और भड़का दिया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि पिछले 8 साल में 7 बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, जो साफ बताता है कि यह सिर्फ किसी एक विभाग की गड़बड़ी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी है। छात्रों ने कहा कि एमपीएससी की विश्वसनीयता अब खत्म हो चुकी है और मांग रखी कि आयोग में पारदर्शी और सक्षम अफसरों की नियुक्ति हो, साथ ही मौजूदा अध्यक्ष व सचिव समेत जितने भी दोषी हैं उन सबके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उन्हें पद से हटाया जाए।
इस आंदोलन को शहर भर से जबरदस्त समर्थन मिला। नागपुर के 60 से 70 कोचिंग सेंटर, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं, बुधवार को पूरी तरह बंद रहे। कोचिंग चलाने वाले, टीचर और गाइड करने वाले लोग भी छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संविधान चौक पर डटे रहे।
प्रदर्शन में विदर्भ की अपनी बोली और अंदाज की झलक भी खूब दिखी। छात्रों ने तख्तियों पर मारबत, बड़गे, झामल झामल, तरी पोहा और भैताड़ जैसे ठेठ नागपुरी और वैदर्भीय शब्दों का इस्तेमाल कर एमपीएससी पर तीखा तंज कसा। इस अलग अंदाज ने पूरे प्रदर्शन का ध्यान अपनी ओर खींचा।
आंदोलन के आखिर में समन्वय समिति के प्रतिनिधि मंडल में शामिल अतुल खोब्रागडे, अभिलाष वराडे, संजय रणदिवे, शैलेश तुमडे, खेमराज चमौशिकर, संघपाल निकोसे, प्रणय सातकर और अनिकेत माते ने नागपुर के जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर परीक्षा प्रणाली में तुरंत सुधार नहीं हुआ और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो विदर्भ से शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में और उग्र रूप ले लेगा।