मीरा-भाईंदर पालिका स्कूलों में छात्र संख्या एक साल में लगभग आधी, 9,613 से घटकर 5,042
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के स्कूलों की पटसंख्या में अचानक बड़ी गिरावट सामने आई, प्रशासन ने आधार अपलोडिंग को वजह बताया
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मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के शिक्षण विभाग के कामकाज पर सवाल उठाने वाला एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। पिछले कुछ सालों से लगातार बढ़ रही पालिका स्कूलों की छात्र संख्या इस बार अचानक करीब आधी रह गई है, जिसने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है। साल 2025-26 में यह संख्या 9,613 थी, जो 2026-27 में फिलहाल सिर्फ 5,042 पर आ गई है। यानी एक झटके में 4,571 छात्रों की एंट्री गायब हो गई। इतनी बड़ी गिरावट ने पालिका प्रशासन की प्लानिंग पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
खास बात यह है कि पिछले तीन साल से पटसंख्या लगातार बढ़ती ही रही थी। 2023-24 में पालिका स्कूलों में 8,942 छात्र दर्ज हुए थे, 2024-25 में यह आंकड़ा 9,454 पहुंचा और 2025-26 में 9,613 तक गया। लेकिन नए शैक्षणिक साल में यह संख्या सीधे 5,042 पर गिर गई। सिर्फ एक साल में करीब 47.5 प्रतिशत की गिरावट ने यह सवाल खड़ा किया है कि यह महज तकनीकी गड़बड़ है या शिक्षण विभाग की प्लानिंग की नाकामी।
इतने सारे छात्र आखिर गए कहां? पालिका प्रशासन ने इस गिरावट का ठीकरा आधार कार्ड अपलोडिंग और यू-डायस की ऑनलाइन एंट्री पर फोड़ा है। शिक्षण विभाग का दावा है कि फिलहाल यू-डायस में सिर्फ उन्हीं छात्रों की गिनती दिख रही है जिनका आधार कार्ड अपलोड हो चुका है। विभाग के मुताबिक कुछ छात्र ऑनलाइन रिकॉर्ड से बाहर हैं, तो कुछ छात्र गांव चले जाने की वजह से स्कूल में मौजूद नहीं हैं।
लेकिन यह सफाई प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ा रही है। शैक्षणिक साल शुरू हो जाने के बाद भी अगर छात्रों की आधार एंट्री पूरी नहीं हुई, तो इसका जिम्मेदार कौन है? अगर पालिका स्कूलों में असल में कितने छात्र पढ़ रहे हैं, इसकी सही जानकारी शिक्षण विभाग के पास ही नहीं है, तो करोड़ों रुपयों की शैक्षणिक प्लानिंग आखिर किस आधार पर की जाती है?
शिक्षण विभाग के मुताबिक छात्रों की अंतिम पटसंख्या 30 सितंबर के बाद तय होगी, इसलिए फिलहाल का 5,042 का आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा सकता। लेकिन सवाल यह है कि पिछले साल जुलाई महीने में ही 9,613 छात्र दर्ज हो चुके थे, तो इस बार उसी दौरान संख्या आधे से भी कम कैसे रह गई? अगर छात्र असल में स्कूल में पढ़ ही रहे हैं, तो उनके नाम, आधार नंबर और शैक्षणिक रिकॉर्ड ऑनलाइन करने में प्रशासन को इतना वक्त क्यों लग रहा है। पैरेंट्स के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि 'आधार अपलोड नहीं हुआ' के बहाने कहीं पूरे सिस्टम की लापरवाही तो नहीं छिपाई जा रही।
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका हर साल शिक्षण विभाग पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। छात्रों को मुफ्त शैक्षणिक सामग्री दी जाती है, स्कूलों की सुविधाएं बढ़ाने के दावे किए जाते हैं और अच्छी क्वालिटी की पढ़ाई की पॉलिसी लागू होने की बात कही जाती है। लेकिन दूसरी तरफ स्कूलों में असल में कितने छात्र हैं, इसकी सही ऑनलाइन एंट्री समय पर उपलब्ध ही नहीं है, तो अब पूरे सिस्टम की परफॉर्मेंस का ऑडिट करने का वक्त आ गया है।
अब मांग उठ रही है कि पालिका प्रशासन सिर्फ सामान्य सफाई देने की बजाय हर स्कूल का पिछले साल और इस साल का अलग-अलग आंकड़ा, आधार अपलोड की संख्या, ऑनलाइन और ऑफलाइन छात्रों की अलग गिनती और असल में मौजूद रहने वाले छात्रों की संख्या सार्वजनिक करे। क्योंकि 9,613 से सीधे 5,042 पर गिरा यह आंकड़ा कोई मामूली तकनीकी अंतर नहीं, बल्कि पूरे 4,571 छात्रों से जुड़ा सवाल है। ये छात्र असल में स्कूल में हैं या रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में ही कहीं गुम हो गए, इसका जवाब शिक्षण विभाग को शहर को देना होगा।
सितंबर के आखिर तक पटसंख्या बढ़ने की उम्मीद जताकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। अगर आंकड़ा बढ़ता है, तो सवाल यह होगा कि इतने दिन ये छात्र कहां थे, और अगर नहीं बढ़ता, तो हजारों छात्रों ने पालिका स्कूलों से मुंह क्यों मोड़ लिया, इसका जवाब प्रशासन को देना ही होगा।