MBA ग्रेजुएट की सलाह: महीने का 2 लाख से ज्यादा सैलरी को बताया 'ट्रैप', सोशल मीडिया पर बहस
इंस्टाग्राम पर वायरल हुई एक रील में MBA ग्रॅज्युएट मोहित तलरेजा ने ज्यादा सैलरी की दौड़ पर सवाल उठाए हैं।
आजकल ज्यादातर यंग वर्किंग प्रोफेशनल्स का बस एक ही मकसद रहता है, जितनी हो सके उतनी ज्यादा सैलरी कमाना। लेकिन एक MBA प्रोफेशनल ने इस सोच पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि ज्यादा कमाई की कीमत कभी-कभी उससे मिलने वाले फायदे से भी बड़ी हो सकती है, और जिंदगी में एक ऐसा पड़ाव भी आता है जहां यह सोचना जरूरी हो जाता है।
यह बात इंस्टाग्राम पर वायरल हुई एक रील में सामने आई है, जिसमें MBA ग्रॅज्युएट मोहित तलरेजा ने सलाह दी है। उनका कहना है कि शहरों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को बेतहाशा सैलरी के पीछे भागने के बजाय, महीने के 1.5 लाख से 2 लाख रुपये की कमाई को अपनी 'पर्सनल फाइनेंशियल लिमिट' मान लेना चाहिए। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा सैलरी पाने की इस होड़ को सीधे-सीधे एक 'ट्रॅप' करार दिया है।
तलरेजा के मुताबिक, शहर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को जल्द से जल्द एक तय सैलरी लेवल तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। उनका कहना है कि अगर भारत में आप महीने के डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच जाते हैं, तो यही आपका बेंचमार्क होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि हर कोई अपनी हालात के हिसाब से यह बेंचमार्क खुद तय कर सकता है।
वे आगे बताते हैं कि जितना ज्यादा आप सैलरी के पीछे भागते हैं और जितना ऊपर जाना चाहते हैं, उतनी ही ज्यादा चीजों की कुर्बानी देनी पड़ती है। इसका सीधा असर जिंदगी के दूसरे जरूरी पहलुओं पर पड़ता है।
तलरेजा की सलाह है कि करियर की शुरुआत में जमकर मेहनत करें, एक फाइनेंशियल सिक्योरिटी लेवल हासिल करें, और उसके बाद करियर में आगे बढ़ने का सिलसिला जारी रखें। लेकिन इसी को जिंदगी की इकलौती प्राथमिकता मत बनाइए।
उनका इशारा सेहत, परिवार और नई-नई चीजें सीखने जैसी बातों की तरफ था। उनका कहना है कि जब आप सफलता या तरक्की का एकमात्र पैमाना सिर्फ सैलरी और काम को बना लेते हैं, तो ये बेहद जरूरी चीजें पीछे छूटने लगती हैं।
अपना वक्त बेचकर लगातार पैसा कमाना, ज्यादा सैलरी के पीछे दौड़ना, या दिन-रात मेहनत करके किसी और को अमीर बनाना, इस रास्ते से शायद लंबे समय तक चलने वाला सुकून नहीं मिलता। उनकी सलाह है कि इसके बजाय, उस वक्त का कुछ हिस्सा खुद कुछ नया सीखने या कमाई का दूसरा जरिया बनाने में लगाना चाहिए।