महसूल दफ्तरों में अब रोज दोपहर ३ से ५ बजे अफसर नागरिकों से मिलेंगे
महाराष्ट्र सरकार के महसूल व वन विभाग ने ९ सितंबर को आदेश जारी कर सभी महसूल दफ्तरों में यह समय आम लोगों के लिए तय किया है।
गोंदिया जिले सहित राज्यभर के महसूल दफ्तरों में अब नागरिकों को अफसर से मिलने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। महाराष्ट्र सरकार के महसूल व वन विभाग ने ९ सितंबर को एक शासन निर्णय जारी किया है, जिसके तहत जिलाधिकारी से लेकर तहसीलदार तक के सभी दफ्तरों में हर रोज दोपहर ३.०० से ५.०० बजे तक का समय आम लोगों से मिलने के लिए राखीव रखना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि आम नागरिकों की तक्रारें और अडचनें स्थानिक स्तर पर ही तेजी से निपट जाएं। महसूल विभाग के जरिए राज्य सरकार कई नीतिगत फैसले लेती रहती है, और तालुका, जिला व विभाग स्तर पर काम करने वाले महसूल दफ्तरों का सीधा वास्ता आम जनता से पड़ता है। लेकिन अक्सर देखा गया है कि स्थानिक दफ्तरों में अफसर या कर्मचारी समय पर उपलब्ध नहीं रहते, जिस वजह से लोगों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता। इससे नाराज लोगों को सीधे मुंबई के मंत्रालय तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। सरकार ने इसी बात को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है।
इस परिपत्रक से स्थानिक महसूल दफ्तरों में पारदर्शकता बढ़ेगी और प्रशासन पर आम लोगों का भरोसा और मजबूत होगा। अब किसान, आम नागरिक और छात्रों को अपने छोटे-मोटे काम या शिकायत के लिए अफसरों का घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
यह आदेश सभी महसूल अफसरों पर लागू होगा, जिनमें जिलाधिकारी, उपजिल्हाधिकारी, उपविभागीय अधिकारी (SDO), तहसीलदार और नायब तहसीलदार शामिल हैं। इन सभी को कार्यालयीन कामकाज के दिनों में दोपहर ३.०० से ५.०० बजे तक का समय आम नागरिकों से मिलने और उनकी शिकायतें सुनने के लिए राखीव रखना होगा।
इस तय समय में किसी भी तरह की अंदरूनी बैठक या वीडियो कॉन्फरन्सिंग (VC) आयोजित करने पर पूरी तरह रोक रहेगी, ताकि अफसर पूरा वक्त नागरिकों को दे सकें। इस राखीव समय की जानकारी देने वाला बोर्ड दफ्तर के मुख्य गेट पर और संबंधित अफसर के कमरे के बाहर, सबको साफ दिखे ऐसी जगह पर लगाना अनिवार्य किया गया है।
अगर किसी अफसर को बेहद जरूरी सरकारी काम, तय दौरे या उच्चस्तरीय बैठक की वजह से इस समय दफ्तर में मौजूद रहना संभव न हो, तो इसकी पूर्व सूचना नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी। साथ ही ऐसी स्थिति में नागरिकों के आवेदन लेने के लिए किसी दूसरे सक्षम अफसर की नियुक्ति करना भी अनिवार्य कर दिया गया है।